News India Live, Digital Desk: सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं जो राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर देती हैं. ऐसा ही कुछ हुआ जब समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव के आधिकारिक फेसबुक पेज को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया. इस खबर ने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को चौंका दिया, जिसके बाद सियासी पारा गरमा गया.
सपा ने तुरंत इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी का आरोप था कि यह बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) की साजिश है, जो विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है. समाजवादी पार्टी ने साफ शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया ही अब जनता से जुड़ने और अपनी बात रखने का सबसे बड़ा जरिया है, और अगर इस पर भी रोक लगाई जाएगी तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा.
हालांकि, थोड़े समय बाद ही अखिलेश यादव का फेसबुक पेज बहाल कर दिया गया. लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए थे. सपा के प्रवक्ता और नेता इस बात पर जोर दे रहे थे कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. उनका कहना था कि जब चुनाव नजदीक होते हैं या बड़े राजनीतिक मुद्दे पर बहस चल रही होती है, तब इस तरह की ‘तकनीकी खामियां’ अक्सर देखने को मिलती हैं. इसे लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया कि कहीं ये कोई बड़ी चाल तो नहीं?
सोशल मीडिया कंपनियां अक्सर अपनी नीतियों का हवाला देकर किसी पेज को निलंबित करती हैं, लेकिन राजनीतिक हस्तियों से जुड़े ऐसे मामलों पर हमेशा ज्यादा ध्यान दिया जाता है. सपा ने इसे सीधा ‘अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए बीजेपी पर विपक्ष की आवाज कुचलने का आरोप लगाया. इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर राजनीतिक अभिव्यक्ति की आजादी और उस पर होने वाले नियंत्रण पर बहस छेड़ दी.
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