नई दिल्ली: केरल में मिली प्रचंड जीत के बाद अब सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथ में होगी? मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाने के लिए शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर एक हाई-वोल्टेज बैठक हुई। शाम 4 बजे शुरू हुआ यह मंथन देर रात तक चला, जिसमें राहुल गांधी और पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों ने दावेदारों के साथ लंबी गुफ्तगू की। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के नाम का लिफाफा लगभग तैयार हो चुका है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
राहुल गांधी और खरगे ने दावेदारों से की ‘वन-टू-वन’ बात
बैठक में कांग्रेस आलाकमान ने किसी भी तरह की जल्दबाजी के बजाय सर्वसम्मति पर जोर दिया। मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला को दिल्ली तलब किया गया था। राहुल गांधी और खरगे ने इन तीनों नेताओं से पहले अलग-अलग कमरों में अकेले बात की और फिर तीनों को साथ बैठाकर भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। इस ‘वन-टू-वन’ चर्चा का मकसद गुटबाजी को खत्म कर एक स्थिर सरकार देना है।
कार्यकर्ताओं की अनुशासनहीनता पर आलाकमान सख्त
बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब हुईं कांग्रेस नेता दीपा दास मुंशी ने बताया कि केरल में पिछले दो-तीन दिनों में कुछ समर्थकों द्वारा की गई नारेबाजी और प्रदर्शन को नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने साफ कहा कि अति उत्साह में की गई अनुशासनहीनता कांग्रेस की संस्कृति नहीं है। नेतृत्व का मानना है कि केरल की जनता ने 140 में से 102 सीटों पर यूडीएफ (UDF) को जो ऐतिहासिक जनादेश दिया है, उसका अपमान नहीं होना चाहिए।
केरल की सियासी बिसात पर तीन बड़े चेहरे
भले ही कांग्रेस विधायक दल ने मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार हाईकमान को सौंप दिया है, लेकिन असली पेंच वरिष्ठता और सांगठनिक कौशल के बीच फंसा है।
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केसी वेणुगोपाल: संगठन में मजबूत पकड़ और आलाकमान के भरोसेमंद।
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वीडी सतीशन: विपक्ष के नेता के तौर पर दमदार प्रदर्शन।
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रमेश चेन्निथला: लंबा प्रशासनिक अनुभव और पार्टी का पुराना चेहरा।
इन तीनों दिग्गजों के बीच संतुलन बैठाना खरगे और राहुल गांधी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और प्रचंड बहुमत का सम्मान
इससे पहले पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने तिरुवनंतपुरम जाकर नवनिर्वाचित विधायकों की राय ली थी। विधायकों की पसंद वाली सीलबंद रिपोर्ट खरगे को सौंपी जा चुकी है। केरल चुनाव में कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीती हैं, जो पार्टी के पुनरुद्धार का संकेत है। सूत्रों का कहना है कि आलाकमान ऐसे चेहरे को चुनना चाहता है जो 2026 के इस जनादेश को अगले पांच साल तक मजबूती से संभाल सके।
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