अयोध्या सिर्फ आस्था व श्रद्धा का केंद्र नहीं है, बल्कि वह वोटों की फसल के लिए खादी-पानी का काम भी करती है। भाजपा को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने में अयोध्या के राममंदिर मुद्दे की अहम भूमिका रही है।

मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ हो जाने से प्रदेश की सियासत में भाजपा को बढ़त तो मिली है, लेकिन विपक्ष पर हमले की धार अब पहले जैसी पैनी नहीं है। भाजपा के लिए वोटों का ध्रुवीकरण कराने की चुनौती होगी तो विपक्षों दलों के सामने ध्रुवीकरण को रोकने की।
राममंदिर के शिलान्यास पर सपा, बसपा व कांग्रेस का जैसा रुख रहा है, उससे भाजपा को ज्यादा हमलावर होने का मौका शायद ही मिले। कुछ नेताओं ने श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में पिछड़ों, अनुसूचित जाति के लोगों की भागदारी नहीं होने पर सवाल उठाकर भविष्य में राजनीति की दिशा के संकेत भी दे दिए हैं।