आजमगढ़। गुरु पूर्णिमा यानि गुरु पूजा का दिन। इस दिन विद्यालयों, मठों और गुरुद्वारों आदि में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। ना ही कोई भक्त मठ और गुरुद्वारे के अंदर प्रवेश कर सकेगा।

रविवार को गुरु पूर्णिमा का त्योहार है। इस पर्व पर अपने गुरु के प्रति आस्था को प्रगट किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन विधिवत रूप से गुरु पूजन किया जाता है। इसको व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन को चारों वेदों के रचयिता और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले वेद व्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन पर अपने गुरुओं और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का पूजन करने की परंपरा है। महर्षि वेद व्सास की जयंती पर इस पर्व को मनाया जाता है। चारों वेदों, 18 पुराणों, महाभारत के रचयिता और कई अन्य ग्रंथों के रचनाकार का श्रेय महर्षि वेद व्यास को दिया जाता है। वेदों का विभाजन करने के कारण इनका नाम वेद व्यास पड़ा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुओं की पूजा और उनका सम्मान करते हुए उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हर वर्ष इस दिन मठों, गुरुद्वारों और विद्यालयों में गुरु पूजा का आयोजन किया जाता है। इसके बाद लोगों में प्रसाद का वितरण किया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना काल में मठों और गुरुद्वारे में इसका आयोजन नहीं होगा। जबकि कोरोना महामारी के कारण विद्यालय पहले ही 31 जुलाई तक के लिए बंद हैं।