डीजल कीमतों में हुई रिकॉर्ड वृद्धि के कारण ट्रकों से होने वाली माल ढुलाई की लागत में 15 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर दूध, सब्जी, दवाई और अनाज की कीमतों पर पड़ेगा।

इस तरह खाद्य वस्तुओं की मुद्रा स्फीति दर में बढ़ोतरी हो सकती है। डीजल कीमतों में वृद्धि का असर कृषि फसलों की उत्पादन लागत में भी पड़ेगा, जिसके कारण कृषि उत्पादों के मूल्य भी बढ़ सकते हैं।
विपक्ष इसे आर्थिक मंदी के इस दौर में आम आदमी की कमर तोड़ने वाला कदम बता रहा है। विशेषज्ञों ने सरकार से डीजल की बढ़ी कीमतों को वापस लेकर लोगों को राहत देने की अपील की है।
अप्रैल माह में खाद्य पदार्थों की मुद्रा स्फीति दर 2.55 फीसदी थी, जो मांग में लगातार कमी के कारण  मई माह में गिरकर 1.13 फीसदी पर आ गई थी। लेकिन डीजल की कीमतों में पिछले 19 दिनों के बीच 10.63 रुपये की वृद्धि हुई है और पेट्रोल की कीमतों में 8.66 रुपये प्रति लीटर का उछाल आया है।