आजमगढ़। अध्यात्मिक गुरू व शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाईलामा का 85वां जन्मदिन प्रयास सामाजिक संगठन ने कुंवर सिंह उद्यान में मनाया। उन्हें भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित करने की मांग की गई। सचिव सुनील यादव ने बताया कि दलाईलामा विश्व में तिब्बत के प्रतीक है। तिब्बत की आजादी के लिए गांधीवादी सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए अहिंसक संघर्ष जारी रखने पर इन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। 14वें दलाईलामा तेनजिन ग्यात्सो का जन्म छह जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर क्षेत्र में ओमान परिवार में हुआ था। दलाईलामा एक मंगोलियाई पदवी है, इसका मतलब होता है ज्ञान का महासागर। दलाईलामा ने लगातार अहिंसा की नीति का समर्थन जारी रखा है। पूर्व राजनयिक निरूपमा राव ने दलाई लामा को भारतरत्न देने की भारत सरकार से अनुशंसा की है। इसे सरकार को शीघ्र मान लेना चाहिए। अध्यक्ष रणजीत सिंह, शीला विश्वकर्मा, प्रिया कुमारी, शिवांगी पांडेय, संजय सिंह, रामकेश यादव, धर्मेंद्र सैनी, घनश्याम मौर्या, आशीष कुमार, सूर्यबली, हरिश्चंद्र, अंगद साहनी मौजूद रहे।