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दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और 10 दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान के बीच डिजिटल शिखर बैठक की 12 नवंबर, गुरुवार को सह-अध्यक्षता करेंगे, जिसमें कोरोनावायरस महामारी से से पैदा हुई आर्थिक उथल-पुथल से उबरने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करने के आलावा बड़े पैमाने पर रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी. इस शिखर सम्मेलन में सभी दस आसियान सदस्य राज्यों के नेता भाग लेंगे.

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को कहा कि आसियान शिखर सम्मेलन भारत की रणनीतिक साझेदारी की स्थिति की समीक्षा करेगा और कनेक्टिविटी, समुद्री सहयोग, व्यापार और वाणिज्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हुए विकास का जायजा लेगा.

17वें शिखर सम्मेलन का मकसद

बताया जा रहा है कि यह शिखर सम्मलेन लद्दाख में चीन (China) के साथ जारी गतिरोध और दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक रवैये को लेकर हो रहा है. इस सम्मलेन में वे तमाम देश शामिल होंगे जिनका दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद चल रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक भी 17वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे.

विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि इस शिखर बैठक में शामिल नेता आसियान-भारत के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करेंगे और आसियान-भारत कार्य योजना (2021-2025) को अपनाने पर भी ध्यान देंगे. उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद के आर्थिक सुधार और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की जाएगी.

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आसियान

दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान को इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है और भारत के साथ अन्य बड़े देश जैसे अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया इस संगठन में संवाद भागीदार हैं. इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया इसके सदस्य देश हैं.

रणनीतिक साझेदार होने के साथ-साथ आसियान और भारत एक-दूसरे के साथ अपनी समुद्री सीमाओं को भी साझा करते हैं. भारत हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक बड़े समुद्री क्षेत्रों के साथ रणनीतिक रूप से स्थित है. ये समुद्री क्षेत्र आसियान के कई सदस्य देशों के लिये महत्वपूर्ण व्यापार के रास्ते भी हैं.