आज पूरे देश में गणेशचतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में ये पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आज दिन शुक्रवार, 10 सितंबर से गणेशोत्सव शुरू हो रहा है। आज भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि है और इसी तिथि पर सुख और समृद्धि के देवता भगवान गणेश का जन्म हुआ था। जैसा की हम सभी जानतें है कि गणेशोत्सव का त्योहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर मनाया जाता है। और इससे शुरू होकर ये पर्व तिथि से शुरू होकर ये पर्व अनंत चतुर्दशी तिथि पर विसर्जन करके समाप्त होता है।  चित्रा नक्षत्र में इस बार गणेशपूजन पड़ा है। 10 सितंबर, शुक्रवार को गणेश चतुर्थी के दिन बुद्धि और वाणी के ग्रह बुध और साहस व पराक्रम के कारक माने जाने वाले मंगल ग्रह कन्या राशि में युति होगी। इसके अलावा शुक्र और चंद्रमा की तुला राशि में युति होगी। ज्योतिष में शुक्र और चंद्रमा को महिला प्रधान ग्रह की संज्ञा दी गई है। ऐसे में इन दोनों ग्रहों की युति से गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए बहुत ही खास और उत्तम कही जा रही है। जिसका फल बहुत ही सुखद और उपयोगी है। 
इस गणेशचतुर्थी पर और एक अच्छा संयोग बना है कि राशि यानी सिंह में, बुध भी अपनी राशि कन्या में, शनि का स्वयं की राशि मकर में गोचर करना और शुक्र का अपनी राशि तुला में रहना। इन चार ग्रहों का एक साथ स्वयं की राशि में रहना विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा दो बड़े ग्रह शनि और गुरु का एक साथ वक्री होना भी शुभ संयोग का संकेत है
ज्योतिषों की मानें तो 59 साल पहले भी इस तरह का संयोग बना था, जब गणेश चतुर्थी तिथि पर चित्रा नक्षत्र के साथ चार ग्रहों का स्वयं की राशि में थे और चंद्रमा व शुक्र ग्रह का तुला राशि में बैठे थे। 

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