[ad_1]

– पैंगॉन्ग लेक से तीन चरणों में होगी दोनों पक्षों की सेना की वापसी

नई दिल्ली: वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई महीनों से जारी गतिरोध और तनाव को खत्म करने के लिए भारत और चीन के बीच सहमति बनती नजर आने लगी है। बता दें कि 3 मई से ही आक्रामक चीन भारत की चौखट पर खड़ा है। अब तक भारत ने ड्रैगन के हर वार का मुंहतोड़ जवाब दिया है। अब तक भारत और चीन के बीच 8 बार उच्च स्तरीय सैन्य सन्मार्गएं हो चुकि हैं और हर बार वह निष्प्रभावी साबित हुआ है। हालांकि, 8वीं उच्च स्तरीय बैठक द्वारा सकारात्मक परिणाम सामने आता नजर आ रहा है।

ये भी पढ़ें …..

हालांकि, दोनों पक्ष अब पूर्वी लद्दाख के पैगॉन्ग लेक क्षेत्र से सेना पीछे हटाने पर राजी हो गए हैं। सूत्रों के हवाले से खबर के मुताबिक, दोनों ओर की सेनाएं अप्रैल-मई वाली अपनी पुरानी स्थिति में वापस अपनी-अपनी जगहों पर लौट जाएंगी। अर्थात, मई 2021 तक यथास्थिति बहाल हो जाएगी और चीन सीमा के अग्रिम मोर्चों पर तैनात अपने 400 टैंकों को वापस ले लेगा। हालांकि, सैनिकों की वापसी की तारीख के बारे में जानकारी फिलहाल नहीं मिल सकी है।

8वीं सन्मार्ग का क्या पड़ा प्रभाव6 नवंबर को चुशूल में कमांडर लेवल की बातचीत में सीमा पर से सेना-वापसी पर बातचीत हुई थी। भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन ब्रिगेडियर घई बातचीत में शामिल हुए थे। गलवान घाटी में 15 जून को सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों ने अपने हजारों जवान आमने-सामने तैनात कर दिए थे। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

किस प्रकार होगी सैन्य बल की वापसीसूत्रों के मुताबिक, एक सप्ताह तक चली बातचीत के बाद तय हुआ कि यह मूवमेंट तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।– पहले चरण में टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और सैनिकों को सीमा से एक तय दूरी पर वापस ले जाना है। बातचीत में बनी सहमति के मुताबिक, टैंक और सैनिक एक दिन के अंदर हटाए जाने हैं।– दूसरे चरण में पैगॉन्ग लेक के नॉर्दर्न बैंक के पास से दोनों पक्षों को 3 दिन तक हर दिन लगभग 30 फीसदी सैनिकों को वापस बुलाना है। इसके बाद भारतीय सैनिक अपनी एडमिनिस्ट्रेटिव धन सिंह थापा पोस्ट के करीब आ जाएंगे। वहीं, चीन ने फिंगर 8 की अपनी पहले वाली स्थिति में वापस जाने पर सहमति जताई है।– तीसरे और अंतिम चरण में दोनों पक्षों को पैगॉन्ग झील एरिया के दक्षिणी तट के साथ-साथ चुशूल और रेजांग ला के आसपास ऊंचाई वाले इलाकों में अपनी तैनाती वाली जगहें खाली करनी है।

समझौते के बावजूद भारत सतर्कबता दें कि भले की चीन ने सैन्य बल को वापस लेने की बात की है मगर गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद भारत इस मुद्दे पर बहुत सावधानी से आगे बढ़ रहा है क्योंकि चीन पर आंख मूंद कर भरोसा करना कठिन है। यही वजह रही कि भारत ने इस क्षेत्र में 60 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात कर दिए थे। साथ ही सर्दियों के मौसम में लंबी तैनाती की तैयारी भी कर ली है।

कैसे हुई थी विवाद की शुरुआत– 5 मई को पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के 200 सैनिक आमने-सामने आ गए थे– 9 मई को उत्तरी सिक्किम में 150 सैनिकों के बीच भिड़ंत हुई थी– 9 मई को लद्दाख में चीन ने एलएसी पर हेलिकॉप्टर भेजे– भारत-चीन के सैनिकों के बीच 15 जून को गलवान में झड़प हुई