लाॅकडाउन में घर वापसी की आस में बैठे प्रवासी मजदूरों के लिए एक हजार बसों के इंतजाम को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के निजी सचिव और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच छिड़ी जुबानी तकरार लगातार चौथे दिन मंगलवार को भी जारी रही। यूपी सरकार ने पहले बस लखनऊ मंगवाई, लेकिन कांग्रेस की ओर कहां गया कि मजदूर नोएडा और गाजियाबाद में फंसे हैं। ऐसे में बसें और परमिट लखनऊ भेजने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद सरकार और कांग्रेस दोनों के बीच लेटर वार चलता रहा।

मजदूरों के लिए बस की व्यवस्था को लेकर अब खुलकर राजनीति होने लगी है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

आइए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या क्या हुआ:  

>>पिछले शनिवार 16 मई को कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रवासी श्रमिकों के लिये एक हजार बसें चलाने की अनुमति मांगी थी।

>>सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने के बावजूद अगले दिन यानी रविवार को कांग्रेस की राजस्थान सरकार ने सीमा पर बसों का बेड़ा खड़ा कर दिया। इस बीच प्रियंका गांधी ने एक के बाद एक तीन ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधते हुये बसों के संचालन की अनुमति देने को कहा।

>>देर शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट के जरिये प्रतिक्रिया देते हुये इसे कांग्रेस की कुटिल राजनीति का सूचक बताया। सीएम योगी ने कहा कि सरकार प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिये कटिबद्ध है और इसके लिये बसों का इंतजाम सीमावर्ती जिलों में किया जा चुका है।

>>बाद में सूबे के अपर मुख्य सचिव गृह ने कांग्रेस से बस का रजिस्ट्रेशन नम्बर,फिटनेस प्रमाणपत्र,चालक परिचालक की सूची मांगी जिसे कांग्रेस ने सोमवार दोपहर बाद सरकार को भेज दिया गया। कांग्रेस द्वारा भेजी गयी सूची को स्वीकार करते हुये सरकार की तरफ से कहा गया कि बसों को लखनऊ चालक परिचालक के साथ भेजा जाए।

>>प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने सोमवार और मंगलवार की रात दो बजे सूबे के अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिख कर कहा, ‘लाकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों के सिलसिले में रविवार शाम चार बजे सरकार ने एक हजार बसों की सूची चालक परिचालक के नाम के साथ मांगी थी जिसे उपलब्ध करा दिया गया है। आपने मंगलवार सुबह दस बजे लखनऊ में बसें उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है जबकि प्रवासी गाजियाबाद और नोएडा स्थित दिल्ली सीमा पर फंसे है। ऐसे में लखनऊ को बस भेजना समय और संसाधन की बरबादी है और गरीब विरोधी मानसिकता की उपज है। ऐसा लगता नहीं है कि आपकी सरकार श्रमिकों की मदद करना चाहती है।’