लद्दाख में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को अचानक लेह पहुंचे। प्रधानमंत्री का अचानक लेह पहुंचना चीन और पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। तनातनी के बीच लेह पहुंच कर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे असली कमांडर हैं, जो मुश्किल वक्त में जरूरत पड़ने पर फ्रंट में आने से नहीं चूकते। लेह में प्रधानमंत्री ने आईटीबीपी, वायु सेना और थल सेना के जवानों से मुलाकात कर उनकी हौसला अफजाई की और वरिष्ठ अधिकारियों से मौजूदा हालात के बारे में जानकारी ली।

प्रधानमंत्री शुक्रवार सुबह औचक दौरे पर लेह पहुंचे और उसक बाद हेलीकॉप्टर से लेह से 35 किमी दूर 11 हजार फीट पर स्थित निमू फारवर्ड पोस्ट पहुंचे और जवानों का मनोबल बढ़ाया। जांस्कर रेंज से घिरे सिंधु नदी के किनारे स्थित नीमू चीन सीमा की तरफ नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान एलओसी की तरफ पड़ता है।
यह प्रधानमंत्री मोदी की हिस्मत है कि वे एक्लाइमेटाइज हुए बिना इतनी ऊंचाई पर स्थित फारवर्ड पोस्ट पर पहुंचे। सेना के जवानों को यहां की पोस्टिंग से पहले 15 दिनों तक एक्लाइमेटाइज होना अनिवार्य है, क्योंकि यह हाई एल्टीट्यूड एरिया है और सांस लेने में कठिनाई होती है।