
बिहार की राजनीति को अगर आप देखें, तो सालों से दो ही बड़े खिलाड़ी नज़र आते हैं-एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काNDAगठबंधन,और दूसरी तरफRJDके नेतृत्व वाला विपक्ष। मुकाबला हमेशा इन्हीं दोनों के बीच होता आया है। लेकिन इस बार,नवंबर में होने वाले चुनाव की कहानी थोड़ी अलग हो सकती है। इस बार एक तीसरी ताकत भी मैदान में है,जो पूरे खेल को दिलचस्प बना रही है, और उसका नाम है’जन सुराज पार्टी’ (JSP)।इस पार्टी के पीछे जो चेहरा है,वह राजनीति के गलियारों में किसी पहचान का मोहताज नहीं है-प्रशांत किशोर,जिन्हें लोग’पीके’ के नाम से जानते हैं। लगभग10सालों तक देश की बड़ी-बड़ी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने और उन्हें जीत दिलाने वाले पीके अब खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। पिछले साल अपनी3000किलोमीटर की लंबी पदयात्रा पूरी करने के बाद,उन्होंने2अक्टूबर 2024को अपनी पार्टी लॉन्च की।क्या कुछ नया है जन सुराज पार्टी के पास?यह पार्टी बिहार के उन करोड़ों मतदाताओं के लिए एक नए विकल्प के तौर पर उभरी है,जो BJP-JDUऔरRJDकी पारंपरिक राजनीति से कुछ अलग चाहते हैं। बिहार में पिछले25-30सालों से सत्ता इन्हीं दो गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।प्रशांत किशोर अपने पुराने अनुभवों के आधार पर बिहार के राजनीतिक सिस्टम को बदलने का वादा कर रहे हैं। उनका मुख्य फोकस है-अच्छा शासन और युवाओं को रोजगार,ताकि बिहार के नौजवानों को नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े। यह बिहार की सबसे दुखती रग है,क्योंकि यह राज्य राजनीति में जितना जागरूक है,उतना ही पलायन का दर्द भी झेलता है।जेएसपी ने अपने उम्मीदवारों की सूची में भी नयापन दिखाने की कोशिश की है। उनके 239 उम्मीदवारों में बुजुर्ग नेताओं की बजाय डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और पढ़े-लिखे लोगों को तरजीह दी गई है। उम्मीदवारों की औसत आयु 50 वर्ष के करीब है, जो दर्शाता है कि पार्टी अनुभव और युवा जोश के साथ चल रही है।क्या राजनीति में ऐसा पहले भी हुआ है?किसी नए दल का आना और राजनीति को बदल देना कोई नई बात नहीं है। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं:तेलुगु देशम पार्टी (TDP):फिल्मों के सुपरस्टार एनटी रामाराव ने’तेलुगु स्वाभिमान’के नारे पर यह पार्टी बनाई और पूरे आंध्र प्रदेश में रथ यात्रा करके लोगों का दिल जीत लिया।असम गण परिषद (AGP):असम के छात्रों ने एक आंदोलन खड़ा किया और1985में चुनाव जीतकर सीधे सत्ता में आ गए।आम आदमी पार्टी (AAP): 2012में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए आंदोलन से जन्मी इस पार्टी ने दिल्ली की राजनीति से कांग्रेस को बाहर कर दिया और एक नई मिसाल कायम की।अब प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी बिहार में कुछ ऐसा ही करने का सपना देख रही है। पीके को राजनीति की नस-नस की समझ है,क्योंकि उन्होंने कई पार्टियों की ताकत और कमजोरियों को बहुत करीब से देखा है। उनकी पार्टी उन युवाओं पर दांव लगा रही है,जो मौजूदा विकल्पों से निराश हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर बिहार के लिए नए एनटीआर या अरविंद केजरीवाल साबित हो पाएंगे?
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