
एक वक्त था जब बिहार की पहचान यहां की चीनी मिलों से होती थी,जिनकी चिमनियों से निकलता धुआं इलाके की तरक्की का संकेत देता था। लेकिन समय के साथ कई मिलें बंद हो गईं और बिहार की यह’मिठास’ फीकी पड़ गई। लेकिन अब एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने और नई मिलें खोलने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और ठोस कदम उठाया गया है।सरकार ने न सिर्फ इसके लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है,बल्कि एक उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee)का गठन भी कर दिया है,जो इस पूरे मिशन को जमीन पर उतारेगी।पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया था फैसलाइस बड़े फैसले की नींव नई सरकार बनने के बाद हुई पहली ही कैबिनेट बैठक में रख दी गई थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया था कि बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया था कि इसका मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों को एक स्थिर बाजार देना,राज्य में निवेश को बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।क्या है सरकार का एक्शन प्लान?इस मिशन को सफल बनाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-पॉवर कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी दो मुख्य मोर्चों पर काम करेगी:पुरानी मिलों का पुनरुद्धार:कमेटी उन सभी चीनी मिलों की लिस्ट और मौजूदा स्थिति की गहनता से स्टडी करेगी जो सालों से बंद पड़ी हैं। रिपोर्ट में यह देखा जाएगा कि क्या इन्हें फिर से चालू किया जा सकता है,इसमें कितना खर्च आएगा और क्या ये भविष्य में मुनाफा कमा पाएंगी।नई मिलों की स्थापना:इसके साथ ही,कमेटी राज्य में नई चीनी मिलें लगाने के लिए निवेश को आकर्षित करने की रणनीति पर भी काम करेगी।इस कमेटी में कृषि,उद्योग,गन्ना उद्योग,वित्त और सहकारिता जैसे सभी महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष अधिकारियों को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई रुकावट न आए।क्यों है यह फैसला इतना महत्वपूर्ण?बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां गन्ना एक प्रमुख नकदी फसल है।किसानों को सीधा फायदा:मिलों के दोबारा चालू होने से लाखों गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें सही समय पर सही दाम मिलेगा।रोजगार के अवसर:चीनी उद्योग एक ऐसा सेक्टर है जो बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करता है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही घर के पास काम मिलेगा और पलायन रुकेगा।औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार:पिछले कुछ सालों में बिहार में उद्योगों के विस्तार ने जो गति पकड़ी है,चीनी उद्योग के पुनर्जीवित होने से उसे एक नई और बड़ी छलांग मिलेगी।यह फैसला बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंक सकता है और एक बार फिर राज्य को’चीनी के कटोरे’के रूप में अपनी पुरानी पहचान वापस दिला सकता है।
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