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गंगा में पानी कम, वाराणसी-प्रयागराज के बीच क्रूज चलाने की योजना पर लगा ब्रेक, सर्वे टीम लौटी बैरंग

News India Live, Digital Desk : धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण दो शहरों, वाराणसी और प्रयागराज को गंगा के रास्ते क्रूज और मालवाहक पोतों से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना को एक बड़ा झटका लगा है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा इस जलमार्ग की faisibility जांचने के लिए किया गया सर्वे बुरी तरह विफल हो गया है। सर्वे करने गई टीम को प्रयागराज पहुंचने से पहले ही कम पानी के कारण रास्ते से ही बैरंग लौटना पड़ा।क्यों फेल हुआ सर्वे?IWAI की योजना वाराणसी से प्रयागराज के बीच बड़े क्रूज लाइनर और मालवाहक जहाज चलाने की थी। इसके लिए नदी में कम से-कम तीन मीटर पानी की गहराई होना अनिवार्य है। लेकिन जब सर्वे टीम जलमार्ग का जायजा लेने निकली, तो प्रयागराज के पास सिरसा से लेकर संगम तक गंगा में कई जगहों पर पानी की गहराई डेढ़ मीटर से भी कम पाई गई।नदी में पानी की कमी, जगह-जगह उभरे रेत के टीले (चर) और नदी का कई धाराओं में बँट जाना इस सर्वे के विफल होने का मुख्य कारण बना। इन बाधाओं के चलते टीम अपनी बोट को आगे नहीं ले जा सकी और उन्हें सर्वे अधूरा छोड़कर ही वापस लौटना पड़ा।विशेषज्ञ बोले- सिल्ट और प्रदूषण है असली वजहगंगा मामलों के विशेषज्ञ और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रोफेसर बी.डी. त्रिपाठी के अनुसार, इस समस्या की असली जड़ नदी में बढ़ती सिल्ट (गाद) और प्रदूषण है। उन्होंने कहा कि गंगा में लगातार बढ़ रही गाद के कारण इसकी गहराई और पानी ढोने की क्षमता दोनों कम हो गई है। ऐसे में ड्रेजिंग (नदी तल से गाद निकालना) भी कोई स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि यह बहुत खर्चीला है और इसका असर भी लंबे समय तक नहीं रहता। जब तक नदी में सिल्ट आने और प्रदूषण के मूल कारणों को खत्म नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकतीं।क्या कहते हैं अधिकारी?IWAI के क्षेत्रीय निदेशक (नोएडा) एल. के. रजक ने इस बात की पुष्टि की है कि सर्वे टीम को प्रयागराज में कम पानी की वजह से वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि फिलहाल कोलकाता से वाराणसी तक क्रूज का संचालन सफलतापूर्वक हो रहा है। प्रयागराज तक क्रूज सेवा तभी शुरू की जा सकेगी, जब गंगा में जलस्तर संतोषजनक स्तर तक बढ़ जाएगा।फिलहाल इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया है। अब पर्यटकों और व्यापारियों को इस जलमार्ग के शुरू होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जब तक कि मां गंगा में जलस्तर इस योजना के अनुकूल न हो जाए।