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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: SIT ने शासन को सौंपी 20 पन्नों की रिपोर्ट, 14 बड़े पदाधिकारियों पर लटकी तलवार, टिन्नू के पास ही थीं दानपात्रों की चाभियां

लखनऊ। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में सामने आए करोड़ों रुपये के चढ़ावा चोरी और गबन प्रकरण में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस पूरे मामले की कड़ियों को खंगाल रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक गोपनीय जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है।

मंगलवार (23 जून) को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई इस 20 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट ने मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट के भीतर मचे हड़कंप को और बढ़ा दिया है। एसआईटी ने न सिर्फ सुरक्षा और प्रबंधन में लगी गंभीर सेंध का खुलासा किया है, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन से लेकर दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की बेहद सख्त सिफारिश की है।

चंपत राय और अनिल मिश्र समेत 14 दिग्गजों पर आ सकती है आंच

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की अब तक की जांच की आंच सीधे ट्रस्ट के सबसे शीर्ष और रसूखदार चेहरों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अहम सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, मुख्य व्यवस्थापक गोपाल राव और व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ सहित कुल 14 बड़े लोगों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

जांच में सामने आया है कि इन ज़िम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे न सिर्फ बड़े पैमाने पर नकदी उड़ाई जा रही थी, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा भगवान राम को श्रद्धा से दान किए गए बेशकीमती आभूषण (सोने-चांदी के गहने) भी रहस्यमयी ढंग से गायब हो चुके हैं। एसआईटी ने इन गायब आभूषणों को भी अपनी रिपोर्ट का मुख्य हिस्सा बनाया है।

5 साल के चढ़ावे के ऑडिट और ‘IAS’ स्तर के CEO की तैनाती की सिफारिश

एसआईटी के अध्यक्ष और लखनऊ के मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय टीम ने मंदिर प्रबंधन के मौजूदा ढर्रे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में व्यवस्था को सुधारने के लिए कई कड़े सुझाव दिए गए हैं:

  • सीईओ की नियुक्ति: मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज और सुरक्षा की कमान किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS स्तर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी) को सौंपने की बात कही गई है।

  • ट्रस्ट का पुनर्गठन: दागियों को बाहर कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से ट्रस्ट का ढांचा तैयार करने की सिफारिश की गई है।

  • 5 साल का स्पेशल ऑडिट: पिछले 5 वर्षों में मंदिर को मिले कुल चढ़ावे का किसी स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक व वित्तीय ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है।

  • सीसीटीवी बैकअप: सुरक्षा को कड़ा करने के लिए सीसीटीवी कैमरों का डेटा स्टोरेज बैकअप 45 दिनों से बढ़ाकर सीधे 180 दिन करने को कहा गया है।

सेवादारों को पहले से थी भनक, टिन्नू के पास ही थीं दानपात्रों की चाभियां

जांच के दौरान पुलिस को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पांच मुख्य आरोपियों— लवकुश, अविनाश, अनुकल्प, करुणेश और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर दो करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी पहले ही बरामद की जा चुकी है। जांच में खुलासा हुआ कि सभी दानपात्रों (तिजोरियों) की चाभियां मुख्य रूप से रामशंकर उर्फ टिन्नू के पास ही रहती थीं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि मंदिर में तैनात कई अन्य सेवादारों और कर्मचारियों को इस गबन और चोरी की भनक पहले से थी, लेकिन सबने रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी।

एसआईटी ने अब तक ट्रस्ट और बैंक के कर्मचारियों सहित करीब 150 से अधिक लोगों से कड़ाई से पूछताछ की है। इस पूछताछ में दर्ज हुए कई बयान ट्रस्ट के कागजों और खातों से बिल्कुल मेल नहीं खा रहे हैं। इसे देखते हुए एसआईटी आने वाले दिनों में अपनी जांच का दायरा और ज्यादा बढ़ाने जा रही है। सभी आरोपियों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने की हिदायत दी गई है।

बिना तलाशी के आना-जाना और कमीशनखोरी का खेल

इस पूरे स्कैम में केवल चोरी ही नहीं, बल्कि ‘कमीशनखोरी’ के साक्ष्य भी एसआईटी के हाथ लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की भर्ती और उनकी मॉनिटरिंग में जानबूझकर भारी खामियां छोड़ी गईं। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि मंदिर के कर्मचारियों के आने-जाने के समय उनकी कोई पुख्ता शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी, जिसका फायदा उठाकर करोड़ों रुपयों को आसानी से बाहर भेज दिया गया। इस पूरे नेक्सस में 25 से 30 लोगों की सीधी और सक्रिय भूमिका सामने आ रही है।

राज्य सरकार इस प्रारंभिक रिपोर्ट को जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजने की तैयारी में है। चूंकि यह एक बेहद संवेदनशील और करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ही यह अंतिम फैसला लेगा कि ट्रस्ट से किन-किन बड़े नामों की छुट्टी की जाएगी और किन पर सीधे कानूनी हथौड़ा चलाया जाएगा।