आईपीएल के मुख्य प्रायोजक से चीनी कंपनी वीवो के हटने को राष्ट्रभक्ति से भले जोड़कर देखा जा रहा हो, लेकिन इसके अंदर की कहानी बाजार से जुड़ी नजर आ रही है। बीसीसीआई इससे भली-भांति परिचित था। मगर बोर्ड इतने अहम मौके पर 440 करोड़ रुपये का मोटा प्रायोजक खोना नहीं चाहता था। बोर्ड को उम्मीद थी कि चीनी कंपनी मान जाएगी, लेकिन इससे पहले ही वीवो के हटने की बात बाहर निकल आई।
2 अगस्त को आयोजित आईपीएल संचालन परिषद की बैठक से पहले ही वीवो के इस साल आईपीएल से नहीं जुड़ने की मंशा के बारे में बीसीसीआई के कुछ आला अधिकारियों को पता था। अनुबंध में इससे बाहर निकलने का भी प्रावधान है, लेकिन यह सिर्फ बोर्ड और वीवो को ही मालूम था।

यूएई में होने जा रहे आईपीएल के 13वें संस्करण में VIVO टाइटल स्पॉन्सर नहीं होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा 6 अगस्त को हो गई, हालांकि यह एलान महज औपचारिक ही था क्योंकि बीते कई दिन से आईपीएल और चीनी कंपनी के अलगाव की खबर मीडिया में आ चुकी थी।