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Bihar Minister : नए दफ्तर में बैठते ही मंत्रियों ने अफसरों को चेताया, बिहार में विकास की नई पारी शुरू

News India Live, Digital Desk: बिहार में मंत्रालयों का बंटवारा होते ही अब असली काम-काज शुरू हो गया है। पटना का सचिवालय (Secretariat) और विकास भवन आज सुबह से ही गुलजार रहा। गाड़ियों का काफिला, कार्यकर्ताओं की भीड़ और गुलदस्तों की महक के बीच नीतीश सरकार के मंत्रियों ने अपना-अपना पदभार (Took Charge) ग्रहण कर लिया है।आज सबकी नज़रें जेडीयू के कद्दावर नेता अशोक चौधरी (Ashok Choudhary) और आरएलएम (RLM) कोटे से मंत्री बने दीपक कुशवाहा (Deepak Kushwaha) पर थीं, जिन्होंने शुभ मुहूर्त देखकर अपनी कुर्सी संभाली।अशोक चौधरी का ‘ग्रामीण’ मिशनग्रामीण कार्य विभाग की अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद अशोक चौधरी जैसे ही अपने चैंबर में पहुंचे, वहां अफसरों और समर्थकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के बाद उन्होंने कलम उठाई और अपनी कुर्सी पर बैठे।पदभार संभालते ही अशोक चौधरी बिल्कुल ‘एक्शन मोड’ में नजर आए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिहार के गांवों को शहरों से जोड़ना सीएम नीतीश कुमार का सपना है।कड़ा संदेश: उन्होंने अधिकारियों को इशारा कर दिया कि विभाग में लापरवाही या गड़बड़ी (Corruption) के लिए कोई जगह नहीं है।प्राथमिकता: टूटी सड़कों की मरम्मत और टोला संपर्क योजना (Tola Sampark Yojana) को समय पर पूरा करना उनका सबसे पहला काम होगा।दीपक कुशवाहा ने भी संभाली कमानउधर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के कोटे से मंत्री बने दीपक कुशवाहा ने भी पूरे उत्साह के साथ अपने विभाग का जिम्मा संभाला। अपने नए कार्यालय में बैठते ही उन्होंने फाइलों पर दस्तखत किए और कहा कि सरकार ने उन पर जो भरोसा जताया है, वे उस पर खरे उतरेंगे। उन्होंने भी विकास कार्यों में तेजी लाने और जनता की शिकायतों को प्राथमिकता से सुनने की बात कही।सचिवालय में बदला माहौलजैसे ही मंत्रियों ने चार्ज लिया, सचिवालय के गलियारों में फिर से रौनक लौट आई है। फाइलें जो काफी समय से रुकी पड़ी थीं, अब उनके आगे बढ़ने की उम्मीद है। मंत्री जी के आते ही अफ़सर भी चुस्त-दुरुस्त नजर आए।यह सिर्फ़ कुर्सी संभालने की रस्म नहीं थी, बल्कि 2025 के चुनाव से पहले ‘मिशन मोड’ (Mission Mode) में काम शुरू करने का शंखनाद था। अशोक चौधरी जैसे अनुभवी नेता और दीपक कुशवाहा जैसे नए जोश के साथ, नीतीश सरकार यह सन्देश देना चाहती है कि “काम बोलता है” का नारा सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बनेगा।