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मैनपुरी में 9 साल पुराने युधिष्ठिर हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला : बकरियां बांधने की नसीहत देने पर ली थी जान, कोर्ट ने 4 दोषियों को सुनाई उम्रकैद!

मैनपुरी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से एक बड़े फैसले की खबर सामने आ रही है, जहां अदालत ने करीब नौ साल पुराने बहुचर्चित युधिष्ठिर सिंह हत्याकांड में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी द्वितीय) कमल सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही माननीय न्यायालय ने सभी दोषियों पर 65-65 हजार रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। फैसला आते ही कोर्ट परिसर में हलचल तेज हो गई और पुलिस ने चारों दोषियों को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

मामूली सी बात पर हुआ था जघन्य हत्याकांड, लाठी-डंडों से पीटकर ली थी जान

यह सनसनीखेज वारदात मैनपुरी के औंछा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम महलोई में 22 अप्रैल 2017 की शाम करीब 5 बजे घटित हुई थी। मृतक किसान युधिष्ठिर सिंह ने सिर्फ इतनी सी नसीहत दी थी कि गांव का ही रहने वाला इरफान अपनी बकरियों को खुला न छोड़े, क्योंकि वे उनके घर के सामने लगे हरे-भरे पेड़-पौधों को लगातार नुकसान पहुंचा रही थीं। बस इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि इरफान ने आगबबूला होकर अपने परिजनों और धारदार हथियारों से लैस साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद हमलावरों ने युधिष्ठिर सिंह और उनके परिवार पर लाठी-डंडों, कुल्हाड़ी और ईंट-पत्थरों से जानलेवा हमला बोल दिया। दरिंदों ने युधिष्ठिर सिंह को जमीन पर गिराकर तब तक बेरहमी से पीटा जब तक कि वे लहूलुहान होकर अचेत नहीं हो गए। परिजन उन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल मैनपुरी लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कोर्ट में पेश किए गए अकाट्य सबूत, 4 को जेल, 2 निर्दोष बरी

इस हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में तनाव और सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर हत्या सहित कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य, चश्मदीद गवाह और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश की, जिससे आरोपियों के खिलाफ दोष पूरी तरह सिद्ध हो गया। न्यायाधीश कमल सिंह ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए इरफान, सत्तार, स्वराज और बंटी को मुख्य हत्यारा माना और उन्हें उम्रकैद की सजा से दंडित किया। वहीं दूसरी ओर, सबूतों के अभाव और गलत नामजदगी के चलते कोर्ट ने साबिर और बंटी (पुत्र बाबूद्दीन) को बरी कर राहत दे दी। इस मामले से जुड़े एक अन्य नाबालिग आरोपी की फाइल को पहले ही किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) के पास भेज दिया गया था।

सालों की कानूनी लड़ाई के बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय, छलके आंसू

मैनपुरी कोर्ट के इस बड़े फैसले के पीछे अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता (क्राइम) राकेश गुप्ता की प्रभावी और मजबूत पैरवी सबसे अहम रही, जिन्होंने अपराधियों को सजा दिलाने के लिए कोर्ट में दमदार दलीलें रखीं। अदालत का फैसला सुनते ही मृतक युधिष्ठिर सिंह के बेटे मुकेश सिंह और अन्य परिजनों की आंखें नम हो गईं। मुकेश ने भावुक होते हुए न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि वर्षों के लंबे इंतजार और मानसिक पीड़ा को सहने के बाद आज आखिरकार उनके पिता की आत्मा को शांति मिली है। पीड़ित परिवार ने इसे सत्य और न्याय की बड़ी जीत बताते हुए न्यायपालिका पर अपना अटूट भरोसा जताया है।