Thursday , April 23 2026

ईरान के कड़े तेवर: ‘अमेरिका के धोखे को न भूले हैं, न भूलेंगे’, बातचीत के बीच तेहरान ने अलापा…

तेहरान/इस्लामाबाद (ब्यूरो)। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही कूटनीतिक रस्साकशी अब एक बेहद पेचीदा मोड़ पर पहुंच गई है। शांति की उम्मीदों के बीच ईरान ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह वाशिंगटन के ‘वादे तोड़ने’ के इतिहास को कभी माफ नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने अमेरिका को आईना दिखाते हुए कहा कि बातचीत का मतलब यह कतई नहीं है कि ईरान अपने अधिकारों से समझौता करेगा।

‘डिप्लोमेसी हमारे लिए पवित्र जिहाद’—इस्माइल बाकई

ईरानी प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद तीखा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनके देश के लिए कूटनीति केवल मेज पर बैठना नहीं, बल्कि ‘ईरानी जमीन के रक्षकों के पवित्र जिहाद’ को जारी रखना है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल (यहूदी शासन) पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान अपने खिलाफ किए गए जघन्य अपराधों और थोपे गए युद्धों के जख्मों को भूला नहीं है। बाकई ने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका के साथ विश्वास की गहरी कमी है और एक दौर की बातचीत से किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद करना बेमानी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच

इस्लामाबाद में हुई मैराथन बैठकों का जिक्र करते हुए प्रवक्ता ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz), परमाणु कार्यक्रम, युद्ध का हर्जाना, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय विवादों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। हालांकि, ईरान ने साफ किया कि बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका अपनी ‘गैर-कानूनी’ अपीलों और ‘अत्यधिक मांगों’ को कब छोड़ता है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, बातचीत में कुछ शुरुआती प्रगति जरूर दिखी है, लेकिन अमेरिका की ‘बेतुकी शर्तों’ के कारण गंभीर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।

ईरानी सभ्यता और हितों की रक्षा का संकल्प

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इरादों को फौलादी बताते हुए बाकई ने कहा कि उनके बातचीत करने वाले अधिकारी देश के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी पूरी ताकत और अनुभव झोंक रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों और शहीद देशवासियों के बलिदान ने हमारे संकल्प को और मजबूत किया है। कोई भी ताकत हमें अपने ऐतिहासिक मिशन और महान ईरानी सभ्यता के हितों को सुरक्षित करने से नहीं रोक सकती।” ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने देश की भलाई के लिए कूटनीति समेत हर संभव रास्ता अपनाने को तैयार है।

निष्कर्ष: गेंद अब अमेरिका के पाले में

ईरान के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के सामने झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस्लामाबाद वार्ता की दिशा अब इस बात पर तय होगी कि जो बाइडन प्रशासन ईरान की कानूनी मांगों को किस हद तक स्वीकार करता है। फिलहाल, अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि कूटनीतिक गलियारों में इस बातचीत के नतीजे को लेकर संशय बना हुआ है।

The post ईरान के कड़े तेवर: ‘अमेरिका के धोखे को न भूले हैं, न भूलेंगे’, बातचीत के बीच तेहरान ने अलापा… appeared first on voice of india.