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Omar Abdullah Statement : चंद आतंकियों की वजह से पूरे कश्मीरी समाज को गुनेहगार क्यों माना जा रहा है

News India Live, Digital Desk: जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) पिछले कुछ समय से फिर से सुर्खियों में है। आतंकी गतिविधियों में आई अचानक तेजी ने घाटी में डर का माहौल बना दिया है। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल बार-बार उठता है जब कोई आतंकी हमला होता है, तो क्या उसकी कीमत वहां की आम, निर्दोष जनता को अपनी बदनामी से चुकानी पड़ती है?इसी मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने एक बेहद संजीदा और कड़ा बयान दिया है। विधानसभा में बोलते हुए उनका दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने जो कहा, वह घाटी के हर उस नागरिक की आवाज है जो शांति चाहता है, लेकिन शक की निगाहों से देखा जाता है।”सिर्फ कुछ लोग जिम्मेदार, लेकिन बदनाम सब हो रहे”उमर अब्दुल्ला ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकी हमलों के लिए मुट्ठी भर लोग जिम्मेदार हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि माहौल ऐसा बनाया जा रहा है जैसे पूरा का पूरा कश्मीरी समाज ही गलत है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है जैसे एक स्टेज सजा दी गई है (Stage Set), जिसका मकसद सिर्फ यही है कि कुछ लोगों की हरकतों के बहाने सभी कश्मीरियों को बदनाम किया जा सके।”उनका इशारा साफ था कि जब कोई घटना होती है, तो मीडिया और सोशल मीडिया पर एक ऐसा नरेटिव (Narrative) चलाया जाता है, जिससे यह संदेश जाता है कि कश्मीर के आम लोग भी आतंकियों के साथ हैं। जबकि सीएम के मुताबिक, हकीकत इससे कोसों दूर है।सरकार की जिम्मेदारी और जनता की सुरक्षामुख्यमंत्री ने यह भी माना कि सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों को सुरक्षा का अहसास कराया जाए। उन्होंने कहा कि हम आतंक के खिलाफ खड़े हैं, लेकिन आतंकवाद से लड़ने के नाम पर किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।सदन में गूंजी गूंजउमर अब्दुल्ला ने जब ये बातें कहीं, तो विधानसभा में सन्नाटा था। उन्होंने उप-राज्यपाल (LG) के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान ये बातें रखीं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को लगता है कि नई सरकार आने के बाद वे आतंकी हमलों से सरकार को कमजोर कर देंगे, वे गलतफहमी में हैं।हमारा नजरियाउमर अब्दुल्ला का यह बयान सिर्फ राजनीति नहीं है, यह एक सामाजिक मुद्दा भी है। आतंकवाद का कोई धर्म या इलाका नहीं होता। कुछ भटके हुए लोगों की सजा उन लाखों कश्मीरियों को नहीं मिलनी चाहिए जो अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, दुकान चलाते हैं और अमन-चैन से जीना चाहते हैं।फिलहाल, घाटी में चुनौतियां बड़ी हैं, और उमर अब्दुल्ला के लिए अपनी जनता का भरोसा जीतना और शांति बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।