अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में हुई कथित हेराफेरी के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नित नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एसआईटी और पुलिस की संयुक्त जांच में अब यह साफ संकेत मिले हैं कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच दान-पात्रों के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर जो लिखित समझौता (MoU) हुआ था, उसके कड़े नियमों की धज्जियां नियमित रूप से उड़ाई जा रही थीं। इस प्रशासनिक लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपियों ने करोड़ों की हेराफेरी की। अब पुलिस ने गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों की चल-अचल संपत्ति को कुर्क करने की तैयारी के साथ उनके पिछले 3 वर्षों के आर्थिक रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
फरवरी 2025 के समझौते में बड़ी लापरवाही, नियमों को ताक पर रखा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फरवरी 2025 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच दान-पात्र खोलने और उसकी पारदर्शी गिनती के लिए एक विस्तृत एमओयू साइन किया गया था। इस नियम के तहत गिनती कक्ष (काउंटिंग रूम) के संचालन के समय बैंक और ट्रस्ट दोनों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति अनिवार्य थी। इसके साथ ही नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड (बिना जेब वाले कपड़े) और रोजाना रैंडम तलाशी (फ्रिस्किंग) की व्यवस्था तय की थी।
हैरानी की बात यह है कि इन सुरक्षा नियमों का जमीनी स्तर पर पालन ही नहीं हुआ। समझौते के मुताबिक, काउंटिंग रूम में तैनात बैंक कर्मियों का हर महीने रोटेशन (तबादला) होना था, लेकिन कुछ चुनिंदा कर्मचारी लंबे समय तक एक ही जगह जमे रहे। प्रत्येक दान-पात्र की राशि का अलग-अलग रिकॉर्ड रखने और क्रमवार गणना करने के नियमों को भी पूरी तरह दरकिनार किया गया, जिससे चोरी का यह खेल लंबे समय तक चलता रहा।
आरोपियों की अकूत दौलत पर टिकी नजरें, लवकुश और टिन्नू यादव के ठिकानों पर छापेमारी
एसआईटी अब इस पूरे मामले को वित्तीय अपराध के कोण से देख रही है। पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचे सभी 8 आरोपियों से पिछले तीन साल की आय, खर्च और अर्जित की गई संपत्तियों का पूरा ब्यौरा मांगा है। तफ्तीश में सामने आया है कि मुख्य आरोपी लवकुश ने अपनी पत्नी के नाम पर बेशकीमती जमीन खरीदी थी, जिस पर एक तीन मंजिला आलीशान मकान बनकर तैयार है। इस मकान के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका स्रोत आरोपी नहीं बता पा रहा है।
इसी तरह, जांच दल एक अन्य आरोपी अनुकल्प की संपत्तियों की भी गहनता से पैमाइश कर रहा है। मामले के मुख्य सूत्रधार टिन्नू यादव के बैंक खातों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, और उसके ठिकानों से भारी मात्रा में सोने के आभूषण और कीमती सामान जब्त किए गए हैं। पुलिस यह मिलान कर रही है कि इनकी वैध आय के मुकाबले इनके पास इतनी अकूत संपत्ति कहां से आई।
400 निजी सुरक्षा गार्ड्स भी शक के घेरे में, दलालों को छूट देने का आरोप
इस महाघोटाले की आंच अब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों तक भी पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 400 निजी सुरक्षा कर्मी इस वक्त एसआईटी के सीधे रडार पर हैं। पुलिस इन सुरक्षाकर्मियों के ड्यूटी रोस्टर, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और प्रवेश-निकास द्वारों के लॉग बुक की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
आरोप है कि मंदिर परिसर के मुख्य रास्तों, दर्शन पथ और चढ़ावे को काउंटिंग रूम तक ले जाने वाले रास्तों पर तैनात कुछ गार्ड्स तस्करों और दलालों के साथ मिले हुए थे। वे मोटी रकम लेकर संदिग्ध लोगों को बिना जांच के संवेदनशील क्षेत्रों में आने-जाने की छूट देते थे। ड्यूटी के दौरान किस गार्ड की तैनाती किस पॉइंट पर थी, इसका पूरा टाइमलाइन चार्ट तैयार किया जा रहा है।
चोरी पकड़े जाने के बाद बदला पूरा सिस्टम, अब तैनात किए गए 39 कर्मचारी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड का पर्दाफाश होने और 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब ट्रस्ट पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। दान की गणना प्रक्रिया को अभेद्य और फुलप्रूफ बनाने के लिए काउंटिंग रूम की पूरी व्यवस्था को बदल दिया गया है। वर्तमान में नोटों की गिनती के काम में बेहद कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के बाद 39 विश्वासपात्र कर्मचारियों को लगाया गया है। आपको बता दें कि इस घोटाले के सामने आने से ठीक पहले तक यहां 45 कर्मचारी काम कर रहे थे, जबकि शुरुआत में यह संख्या महज 22 थी। नए सिस्टम में अब हर एक गतिविधि की त्रिस्तरीय डिजिटल निगरानी की जा रही है।
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