वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) से एक बेहद स्तब्ध करने वाला मामला सामने आया है। यहां सुश्रुत छात्रावास (हॉस्टल) में रह रहे एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने रविवार की रात संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम को घटनास्थल से तीन पन्नों का एक भावुक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है।
हॉस्टल के कमरे में ड्रिप लगी हालत में मिला शव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र की पहचान 26 वर्षीय ऋतिक कुंडू के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के निवासी थे। डॉ. ऋतिक बीएचयू में एनेस्थीसिया विभाग में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर अपनी प्रैक्टिस कर रहे थे और परिसर के सुश्रुत छात्रावास की छठी मंजिल पर स्थित अपने कमरे में रहते थे।
रविवार की रात करीब 10 बजे जब उनके सीनियर डॉक्टरों ने किसी विभागीय कार्य के सिलसिले में उन्हें फोन करना शुरू किया, तो ऋतिक की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। बार-बार फोन न उठने पर जब साथी छात्र और सीनियर उनके कमरे पर पहुंचे, तो भीतर का नजारा देखकर सन्न रह गए। डॉ. ऋतिक कमरे में किसी दवा का डिप (ड्रिप) लगाए हुए अचेत पड़े थे। आनन-फानन में जांच करने पर उन्हें मृत पाया गया।
सुसाइड नोट में प्यार का जिक्र, लिखा— ‘वह बहुत अच्छी लड़की है’
घटना की जानकारी मिलते ही लंका थाना प्रभारी राजकुमार वर्मा, पुलिस बल और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती तफ्तीश के दौरान पुलिस को मृतक के पास से तीन पन्नों का एक विस्तृत सुसाइड नोट मिला है। थाना प्रभारी ने बताया कि सुसाइड नोट में डॉक्टर ने साफ तौर पर लिखा है कि वह यह आत्मघाती कदम अपनी मर्जी से उठा रहा है और इसके लिए किसी भी दूसरे इंसान को जिम्मेदार न ठहराया जाए।
नोट में डॉ. ऋतिक ने एक लड़की का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि वह एक बहुत अच्छी लड़की है, जो उनसे बेहद प्यार करती थी और उसने उनके लिए बहुत कुछ किया है। ऋतिक ने अपील की है कि उनके जाने के बाद उस लड़की को किसी भी तरह से दोषी न माना जाए और उसका पूरा ख्याल रखा जाए।
‘बाहर से सब अच्छा था, लेकिन भीतर संघर्ष कर रहा था’
डॉक्टर ऋतिक ने अपने सुसाइड नोट में परिवार के प्रति गहरा दर्द और लगाव व्यक्त किया है। उन्होंने अपने माता-पिता और बहन से इस कदम के लिए बार-बार माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनका आखिरी सहारा थे और उनके जाने से परिवार को एक बड़ा आघात लगेगा। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि वह अपने परिवार की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सके।
नोट की सबसे संवेदनशील लाइनों में डॉक्टर ने अपने मानसिक तनाव का संकेत देते हुए लिखा कि ‘मेरा जीवन बाहर से देखने में जितना अच्छा और सामान्य लगता था, मैं भीतर से उतने ही बड़े मानसिक संघर्ष से जूझ रहा था।’ सुसाइड नोट के आखिर में उन्होंने अपने दोस्तों, परिवार और सभी करीबियों से क्षमा मांगते हुए ‘अलविदा दुनिया’ लिखकर अपना आखिरी संदेश खत्म किया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर बीएचयू मोर्चरी में रखवा दिया है और पश्चिम बंगाल में रह रहे परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
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