लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मौसम में इन दिनों जबरदस्त उठापटक का दौर जारी है। शुक्रवार सुबह से ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में ठंडी हवाओं के साथ बूंदाबांदी ने दस्तक दी है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) की मानें तो असली हलचल 4 अप्रैल को देखने को मिलेगी, जब प्रदेश के कई जिलों में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) होने की संभावना है। मौसम का यह मिजाज रुक-रुक कर 9 अप्रैल तक बना रह सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ ने बदला मिजाज: लखनऊ से नोएडा तक अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण पूरे प्रदेश का वायुमंडल प्रभावित हुआ है। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा और रायबरेली जैसे 50 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। शुक्रवार को हुई हल्की बारिश ने लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
4 अप्रैल को रहेगा सबसे ज्यादा असर
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 4 अप्रैल का दिन मौसम के लिहाज से सबसे संवेदनशील रहेगा। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर और बाराबंकी जैसे इलाकों में तेज हवाओं के साथ ओले गिर सकते हैं। 5 अप्रैल को भी मौसम का यही रुख बना रहेगा, हालांकि 6 अप्रैल को पश्चिमी यूपी में मौसम थोड़ा शुष्क हो सकता है, लेकिन 7 से 9 अप्रैल के बीच एक बार फिर बादलों की आवाजाही और बौछारें पड़ने का अनुमान है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बारिश का दौर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 3 से 5 अप्रैल तक बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा। यहां भी 4 अप्रैल को सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा, जिसमें तेज आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। हालांकि, विभाग ने 6 से 9 अप्रैल के बीच पूर्वी यूपी के लिए कोई बड़ा अलर्ट तो जारी नहीं किया है, लेकिन छिटपुट बारिश की संभावना से इनकार भी नहीं किया है। 9 अप्रैल के बाद ही मौसम पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।
किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी: फसल सुरक्षा सर्वोपरि
खराब मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने अन्नदाताओं के लिए विशेष सलाह जारी की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि:
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किसान अपनी कटी हुई फसल को खुले खेतों में न छोड़ें, उसे तुरंत सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर पहुंचाएं।
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ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद होने का खतरा है, इसलिए कटाई में जल्दबाजी न करें या कटी फसल का उचित प्रबंधन करें।
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अगले कुछ दिनों तक फल और सब्जी वाली फसलों में किसी भी प्रकार की कीटनाशक दवा का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश से दवा धुल जाएगी और मेहनत बेकार जाएगी।
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