
News India Live, Digital Desk : जब कड़ाके की ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और बसंत की आहट सुनाई देती है, तभी आती है ‘रथ सप्तमी’। हम सब जानते हैं कि इस दुनिया को रोशनी और जीवन देने वाले भगवान सूर्य ही हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि रथ सप्तमी को भगवान सूर्य के जन्मदिवस (Surya Jayanti) के रूप में मनाया जाता है?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव ने पहली बार अपने सात घोड़ों वाले स्वर्ण रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड को आलोकित किया था। अगर आप साल 2026 की शुरुआत ऊर्जा और अच्छी सेहत के साथ करना चाहते हैं, तो रथ सप्तमी का यह मौका हाथ से जाने न दें।साल 2026 में कब है रथ सप्तमी?साल 2026 में रथ सप्तमी की पावन तिथि 25 जनवरी (रविवार) को पड़ रही है। मज़े की बात ये है कि रविवार का दिन खुद सूर्य देव को समर्पित है, इसलिए इस बार इस त्यौहार का महत्व कई गुना बढ़ गया है। रविवार के दिन रथ सप्तमी का संयोग किसी बड़े आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं है।पूजा की वो विधि जो आपको ‘सकारात्मकता’ देगीअक्सर हम त्यौहारों में भारी-भरकम विधियों के पीछे भागते हैं, लेकिन रथ सप्तमी सादगी और शुद्धता का पर्व है।ब्रह्म मुहूर्त का स्नान: हो सके तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर घर पर हैं, तो पानी में गंगाजल मिला लें। माना जाता है कि सात आक के पत्तों (Arka leaves) को सिर और कंधों पर रखकर स्नान करने से शारीरिक बीमारियों से मुक्ति मिलती है।सूर्य को अर्घ्य: तांबे के लोटे में पानी भरकर, उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाएं और सूर्य की ओर देखते हुए जल अर्पित करें।आँगन में रथ की रंगोली: दक्षिण भारत में इस दिन घर के द्वार पर चावल के आटे से सूर्य और उनके रथ की सुंदर रंगोली बनाने की परंपरा है। यह सुख-समृद्धि के स्वागत का प्रतीक है।सूर्य मंत्र और दान का महत्वरथ सप्तमी के दिन ‘ॐ घृणि सूर्याय नम:’ या सूर्य अष्टकम का पाठ करना आपकी एकाग्रता और ऊर्जा के स्तर को बढ़ा देता है। साथ ही, आज के दिन ज़रूरतमंदों को गुड़, लाल वस्त्र या अनाज का दान करना आपको ‘अक्षय पुण्य’ का भागी बनाता है।विज्ञान और अध्यात्म का मेलअगर हम अध्यात्म से हटकर सोचें, तो रथ सप्तमी दरअसल ऋतु परिवर्तन और सूर्य की बदलती किरणों की दिशा का प्रतीक है। इस समय की धूप हमारी हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए बहुत लाभदायक मानी जाती है। पूर्वजों ने शायद इसी बहाने हमें प्रकृति के करीब रहने की सीख दी है।तो दोस्तों, 25 जनवरी की उस सुहानी सुबह को आलस छोड़िए और भगवान भास्कर का स्वागत करने के लिए तैयार रहिये। जो लोग सेहत और आत्म-सम्मान की तलाश में हैं, उनके लिए यह दिन एक नई शुरुआत की तरह है।
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