अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और अगले चुनाव में राष्ट्रपति पद के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक, डोनाल्ड ट्रंप, एक बार फिर अपने पुराने और जाने-पहचाने ‘डॉनल्ड ट्रंप’ वाले अंदाज में लौटे हैं। उन्होंने गाजा शांति प्रस्ताव को लेकर आतंकी संगठन हमास को सीधी और सख्त चेतावनी दी है।
ट्रंप ने हमास को सिर्फ चार दिनों का अल्टीमेटम दिया है और साथ में एक सीधी धमकी भी दी है कि अगर हमास ने शांति प्रस्ताव को नहीं माना, तो ‘अंजाम बहुत बुरा होगा’।
क्या है यह पूरा मामला?
ट्रंप हमेशा से खुद को एक बेहतरीन ‘डीलर’ और मध्यस्थ मानते आए हैं। उनका दावा है कि जो काम दूसरे नेता सालों में नहीं कर पाते, वो उसे चुटकियों में सुलझा सकते हैं। इसी छवि को मजबूत करते हुए, उन्होंने कहा है कि अगर वह दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं, तो वह इस इजरायल-हमास के युद्ध को बहुत तेजी से खत्म कर सकते हैं।
उनका यह बयान मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों पर भी एक सीधा हमला है, मानो वह कह रहे हों कि बाइडेन प्रशासन इस मामले को सुलझाने में नाकाम रहा है।
चुनाव से पहले बड़ा दांव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की गर्मी अपने चरम पर है। ट्रंप इस बयान के जरिए अमेरिकी जनता और दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके पास दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं का भी सीधा और सख्त समाधान है।
यह अल्टीमेटम हमास के लिए तो है ही, साथ ही यह दुनिया भर के नेताओं के लिए भी एक संकेत है। ट्रंप यह जता रहे हैं कि अगर वह सत्ता में वापस आए, तो वे बातचीत के लंबे और थकाऊ दौर में यकीन नहीं रखेंगे, बल्कि अपने आक्रामक और सीधे तरीके से ही काम करेंगे।
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हमास ट्रंप की इस धमकी पर क्या प्रतिक्रिया देता है। लेकिन एक बात तो तय है, ट्रंप ने इस एक बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है।
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