
अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो?चाहे घर में कोई मेडिकल इमरजेंसी हो,बच्चों की पढ़ाई का खर्च हो,या घर की मरम्मत… ऐसी स्थितियों में पर्सनल लोन एक बहुत ही आसान और तेज समाधान नजर आता है। सिर्फ कुछ ही क्लिक्स में या एक फोन कॉल पर पैसा आपके अकाउंट में आ जाता है।लेकिन जितनी आसानी से यह मिलता है,उतनी ही आसानी से यह एक बड़ा जाल भी बन सकता है। कई लोग सिर्फ’सबसे कम ब्याज’का विज्ञापन देखकर लोन ले लेते हैं और बाद में छिपे हुए चार्ज और मुश्किल शर्तों में फंसकर परेशान होते हैं।इसलिए,अगर आप पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं,तो किसी भी बैंक में अप्लाई करने से पहले इन5बातों की जांच पड़ताल जरूर कर लें।1.आपका सिबिल स्कोर (आपकी फाइनेंशियल कुंडली)बैंक आपको लोन देने से पहले सबसे पहली चीज जो देखता है,वो है आपका सिबिल या क्रेडिट स्कोर। यह3अंकों का एक नंबर होता है जो बताता है कि आप अपने पुराने लोन और क्रेडिट कार्ड के बिल चुकाने में कितने जिम्मेदार रहे हैं।क्यों जरूरी है?अगर आपका स्कोर750से ऊपर है,तो बैंक आपको एक भरोसेमंद ग्राहक मानता है। इससे न केवल आपका लोन जल्दी अप्रूव होता है,बल्कि आपको कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।क्या करें:अप्लाई करने से पहले अपना सिबिल स्कोर फ्री में ऑनलाइन चेक करें। अगर यह कम है,तो पहले उसे सुधारने की कोशिश करें।2.ब्याज दर (सिर्फ विज्ञापन पर न जाएं)हर बैंक का विज्ञापन कहता है कि वे’सबसे कम’ब्याज दर पर लोन दे रहे हैं। लेकिन यह पूरा सच नहीं होता। ब्याज दर दो तरह की होती है- फिक्स्ड (जो पूरी अवधि के लिए एक समान रहती है) और फ्लोटिंग (जो बाजार के हिसाब से बदलती रहती है)।क्या करें:सिर्फ एक बैंक पर भरोसा न करें। कम से कम3-4बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करें। उनसे साफ-साफ पूछें कि आपको कौन सी दर (फिक्स्ड या फ्लोटिंग) और कितने प्रतिशत पर लोन मिलेगा।3.छिपे हुए चार्ज (जहां शैतान छिपा होता है)लोन का असली बोझ सिर्फ ब्याज नहीं होता,बल्कि कई छोटे-छोटे चार्ज होते हैं जो मिलकर एक बड़ी रकम बन जाते हैं। इन पर जरूर ध्यान दें:प्रोसेसिंग फीस:यह लोन की रकम का1%से3%तक हो सकती है।प्री-पेमेंट चार्ज:अगर आप समय से पहले लोन चुकाना चाहते हैं,तो बैंक इस पर भी पेनल्टी लगाता है।लेट पेमेंट फीस: EMIलेट होने पर लगने वाला जुर्माना।क्या करें:बैंक से इन सभी चार्ज के बारे में लिखित में जानकारी मांगें।4.लोन की अवधि (EMIका गणित)यह वो समय है जिसमें आपको पूरा लोन चुकाना होता है।लंबी अवधि (जैसे5साल):आपकीEMIछोटी होगी,लेकिन आपको कुल मिलाकर बहुत ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा।छोटी अवधि (जैसे2साल):आपकीEMIबड़ी होगी,लेकिन आप ब्याज पर काफी पैसा बचाएंगे।क्या करें:ऐसी अवधि चुनें जिसकीEMIआप बिना किसी परेशानी के चुका सकें,लेकिन कोशिश करें कि अवधि बहुत ज्यादा लंबी न हो।5.नियम और शर्तें (जो कोई नहीं पढ़ता)पूरी कहानी लोन एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों में ही छिपी है। हम जानते हैं कि इसे पूरा पढ़ना मुश्किल है, लेकिन कम से कम इन बातों पर गौर तो कीजिए:ब्याज दर कैसे कैलकुलेट की जाएगी।प्री-पेमेंट से जुड़े नियम क्या हैं।किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर क्या जुर्माना लगेगा।कहावत है: “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।” ऋण के मामले में यह बात बिल्कुल सटीक बैठती है।पर्सनल लोन एक बहुत उपयोगी चीज है,अगर उसे समझदारी से लिया जाए। इन5बातों का ध्यान रखकर आप न सिर्फ एक अच्छा सौदा पा सकते हैं,बल्कि भविष्य की कई परेशानियों से भी बच सकते हैं।
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