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केजीएमयू में एक और बड़ा खेल: यूरोलॉजी के बाद अब लारी कार्डियोलॉजी में आयुष्मान योजना में ‘महाघोटाला’! एक ही मरीज को ठोक दिए 5-5 स्टेंट, जांच शुरू

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में घोटालों और अनियमितताओं के जिन्न एक-एक कर बाहर आने लगे हैं। अभी यूरोलॉजी विभाग में हुआ करोड़ों रुपये का दवा घोटाला पूरी तरह ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब लारी कार्डियोलॉजी विभाग से एक और बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए चलाई जा रही ‘प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना’ में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत मिलने के बाद केजीएमयू प्रशासन में हड़कंप मच गया है और आनन-फानन में उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में ही जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने डॉक्टरों की नीयत और प्रशासनिक चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुछ ही दिनों के अंतराल पर बार-बार डाला स्टेंट, बजट ठिकाने लगाने का खेल!

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शुरुआती पड़ताल में ऐसे करीब 15 मरीजों की फाइलें सामने आई हैं, जिनके साथ इलाज के नाम पर अजीबोगरीब प्रक्रिया अपनाई गई। इन मरीजों को कुछ-कुछ दिनों के बेहद कम अंतराल पर बार-बार अस्पताल में भर्ती किया गया और उनके दिल की धमनियों में स्टेंट (छल्ला) डालने की प्रक्रिया दोहराई गई।

हैरत की बात तो यह है कि कुछ मामलों में एक ही मरीज को पांच-पांच स्टेंट तक लगा दिए गए। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने कम समय में एक ही मरीज को बार-बार स्टेंट लगाना बेहद असाधारण है। इसी के बाद से यह आशंका गहरा गई है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले भारी-भरकम सरकारी बजट का दुरुपयोग करने और उसका नाजायज लाभ उठाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया।

गायब मिली मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री, सवालों के घेरे में डॉक्टर

इस मामले की जांच के लिए गठित टीम अब उन सभी संदिग्ध मरीजों की फाइलें और दस्तावेज खंगाल रही है, जिन्हें कम समय के भीतर दोबारा एडमिट कर स्टेंट लगाए गए। जांच टीम मुख्य रूप से इन सुलगते सवालों के जवाब तलाश रही है:

  • जब मरीज को दोबारा भर्ती किया गया, तो उस वक्त उसकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति क्या थी?

  • मरीज के शरीर में ऐसे कौन से गंभीर लक्षण उभरे थे, जिसके कारण दोबारा सर्जरी (हस्तक्षेप) की चिकित्सीय आवश्यकता पड़ी?

  • मरीजों की दोबारा की गई एंजियोग्राफी रिपोर्ट के निष्कर्ष क्या थे? क्या वाकई कोई नया ब्लॉकेज सामने आया था या पहले की कोई गंभीर समस्या थी?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्राथमिक जांच में कई ऐसे संदिग्ध मामले मिले हैं, जहां मरीजों की विस्तृत ‘मेडिकल हिस्ट्री’ (चिकित्सा इतिहास) तक रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों में दर्ज नहीं मिली। इससे डॉक्टरों की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है।

सरकारी खजाने पर डाका: पैकेज के चक्कर में अनावश्यक इलाज के आरोप

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल में होने वाले हर इलाज और ऑपरेशन का भुगतान सरकार द्वारा निर्धारित पैकेज के आधार पर किया जाता है। लारी कार्डियोलॉजी विभाग पर आरोप लग रहे हैं कि इसी सरकारी भुगतान का मोटा फायदा उठाने के लिए बिना किसी पर्याप्त या ठोस चिकित्सीय कारणों के मरीजों को बार-बार भर्ती दिखाया गया और अनावश्यक रूप से स्टेंट ठोक दिए गए। इससे सीधे तौर पर सरकारी बजट और राजस्व को भारी चपत लगने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि जांच टीम अब इलाज से जुड़े सभी दस्तावेजों, एंजियोग्राफी की मूल रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी और भर्ती रिकॉर्ड (आईपीडी) की एक-एक बारीकी की समीक्षा कर रही है।

केजीएमयू प्रशासन ने तलब किए सारे रिकॉर्ड, दोषियों पर गिरेगी गाज!

केजीएमयू प्रशासन ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। लारी कार्डियोलॉजी विभाग से संदिग्ध मरीजों के इलाज से जुड़े सभी मूल दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड तत्काल प्रभाव से तलब कर लिए गए हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात को स्थापित करना है कि क्या ये तमाम प्रक्रियाएं मेडिकल काउंसिल के तय मानकों के अनुरूप की गईं, या फिर केवल आयुष्मान योजना के फंड को ठिकाने लगाने के लिए मरीजों की जान को जोखिम में डालकर यह अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया।

मामले की पुष्टि करते हुए केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया, “शिकायत मिलने के बाद लगे आरोपों की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। विभाग से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज मंगाए गए हैं। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी और नियमानुसार आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।”