
अयोध्या: राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में भारी वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार दोपहर करीब 2:53 बजे एसआईटी की हाई-प्रोफाइल टीम जांच के लिए सीधे राम मंदिर परिसर पहुंची। परिसर में कदम रखते ही टीम के सदस्यों ने सबसे पहले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामलला के दर्शन-पूजन किए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके तुरंत बाद टीम ने मंदिर में हुए कथित करोड़ों रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितताओं की कड़ाई से जांच शुरू कर दी।
एसआईटी ने सबसे पहले उन मुख्य दानपात्रों (Hundi) का बारीकी से मुआयना किया, जिनमें देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। इसके बाद टीम ने दानपात्र से पैसे निकालने, उनकी गिनती करने और उस सुरक्षित स्थान (स्ट्रांग रूम) का भी गहन निरीक्षण किया जहां इस भारी-भरकम धनराशि को सुरक्षित रखा जाता है। जांच को आगे बढ़ाते हुए टीम ने पिछले महीनों के सीसीटीवी फुटेज भी अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बैंक ट्रांजैक्शन और ऑडिट रिपोर्ट की स्क्रूटनी, बंद कमरे में आला अफसरों संग बैठक
मंदिर परिसर में करीब कई घंटों तक चली इस शुरुआती जांच के दौरान एसआईटी के अधिकारियों ने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और ट्रस्ट के कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने राम मंदिर निर्माण और दान राशि के रखरखाव से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेजों और बही-खातों को अपने कब्जे में ले लिया है। दानपात्रों से निकलने वाली नगदी, उसके लेखा-जोखा और सीधे बैंक खातों में होने वाले लेनदेन (Banking Transactions) के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने अयोध्या के जिलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), एसपी सुरक्षा, मंदिर के मजिस्ट्रेटों और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा नियुक्त कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बेहद गोपनीय बैठक की। इस बैठक में अब तक के पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी ली गई। हालांकि, जांच के दौरान मंदिर परिसर में ट्रस्ट का कौन सा बड़ा पदाधिकारी मौजूद था, इसे पूरी तरह गुप्त रखा गया है।
सिविल लाइंस में बनेगा एसआईटी का हाईटेक कंट्रोल रूम, पूरी तरह गोपनीय रहेगी जांच
इस हाई-प्रोफाइल जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और लीक-प्रूफ रखने के लिए कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। एसआईटी टीम के रहने, खाने-पीने और उनकी कार्यशैली में पूरी गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अयोध्या के सिविल लाइंस स्थित ‘अयोध्या तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद’ के कार्यालय को एसआईटी के मुख्य जांच दफ्तर (कंट्रोल रूम) के रूप में चिह्नित किया गया है।
इस अस्थाई कार्यालय को हाईटेक बनाने के निर्देश जारी हो चुके हैं, जिसमें एयर कंडीशनर (AC) के साथ-साथ सुरक्षित सर्वर वाले कंप्यूटर, प्रिंटर और आधुनिक फर्नीचर तुरंत उपलब्ध कराने को कहा गया है। अब इसी दफ्तर से राम मंदिर दान घोटाले की पूरी कड़ियां जोड़ी जाएंगी।
कर्मचारियों के बयान और डिलीट हुए CCTV फुटेज बनेंगे सबसे बड़ा हथियार
एसआईटी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घोटाले की परतें खोलने में दान राशि की गिनती (Cash Counting) करने वाले कर्मचारियों के बयान और मंदिर के सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम सबूत साबित होने वाले हैं। जांच टीम मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर फोकस कर रही है— पहला यह कि दानपात्र से जो नगदी निकाली गई और जो वास्तव में बैंक खातों में जमा हुई, उसके बीच कितना बड़ा अंतर (Mismatch) है। दूसरा यह कि ट्रस्ट द्वारा कराए जा रहे आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) में अब तक क्या-क्या खामियां पकड़ में आई हैं। टीम ने कुछ महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज को फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है।
रडार पर आए 5 संदिग्ध कर्मचारी; अचानक बदली लाइफस्टाइल और करोड़ों की संपत्ति का शक
इस जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा मंदिर के ही 5 कर्मचारियों को लेकर हुआ है, जो सीधे एसआईटी के रडार पर आ चुके हैं। अयोध्या में यह चर्चा जोरों पर है कि इनमें से एक कर्मचारी की पिछले कुछ समय में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति सामने आई है। इतना ही नहीं, दान राशि की गिनती करने वाले एक अन्य संदिग्ध कर्मचारी के ठिकाने पर छापेमारी में करीब 30 लाख रुपये की भारी-भरकम नगदी (Cash) मिलने की बात भी सामने आ रही है।
इसके अलावा, रामलला को चढ़ने वाले सोने-चांदी के जेवरों और बहुमूल्य रत्नों की गिनती करने वाले एक कर्मचारी की भूमिका भी बेहद संदिग्ध मानी जा रही है। एसआईटी इन सभी कर्मचारियों और उनके करीबियों की अचानक बदली हुई आलीशान जीवन शैली (Lifestyle) की गहराई से स्क्रूटनी कर रही है। हालांकि, जांच की गोपनीयता को देखते हुए अभी तक टीम या प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कैसे और किसने किया इस ‘महाघोटाले’ का पर्दाफाश?
आपको बता दें कि इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब राम मंदिर के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी (Ex-Chief Accountant) महिपाल सिंह ने कुछ दिनों पहले एक सनसनीखेज दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मंदिर के चढ़ावे और दान में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की गई है और शुरुआती आकलन में ही करीब 7 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बात सामने आई है। महिपाल सिंह ने यह गंभीर आरोप भी लगाया था कि इस घोटाले को छुपाने के लिए पिछले 8 महीनों के महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज को भी सिस्टम से जानबूझकर डिलीट कर दिया गया।
इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और राम मंदिर ट्रस्ट ने तुरंत उत्तर प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष एसआईटी जांच कराने की सिफारिश की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस और वित्तीय अधिकारियों की सदस्यता वाली एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया, जो अब अयोध्या में डेरा डालकर दान के एक-एक पैसे का हिसाब खंगालने में जुट गई है।
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