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कानपुर में कोहराम: यमुना में डूबने से शहीद हुए 27 वर्षीय जांबाज कांस्टेबल अनुराग का पार्थिव शरीर पहुंचते ही चीखों से कांपा रामपुर, तिरंगे में लिपटा देख मां-पत्नी हुईं बेसुध

सरसौल (कानपुर)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल अंतर्गत रामपुर गांव से एक बेहद मर्माहत और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यमुना नदी में नहाते समय गहरे पानी में डूबने से जान गंवाने वाले चिल्ला (बांदा) थाने में तैनात 27 वर्षीय जांबाज कांस्टेबल अनुराग सिंह भदौरिया का पार्थिव शरीर जैसे ही रविवार की देर शाम उनके पैतृक गांव रामपुर पहुंचा, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। जिस आंगन में कुछ साल पहले बेटे की सरकारी नौकरी लगने पर ढोल-नगाड़ों के साथ खुशियां मनाई गई थीं, उसी आंगन में रविवार की रात सिर्फ सिसकियां और चीखें गूंज रही थीं। अनुराग के शव के घर पहुंचते ही माता-पिता, पत्नी और बहन की चित्कार से वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों का कलेजा मुंह को आ गया।

पुलिस लाइन बांदा में दी गई अंतिम सलामी, अफसरों की भी नम हुईं आंखें

अमर उजाला को मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांस्टेबल अनुराग सिंह के पार्थिव शरीर को सबसे पहले बांदा पुलिस लाइन ले जाया गया। वहां आयोजित एक विशेष शोक सभा में पुलिस विभाग के आला अधिकारियों और साथी जवानों ने अपने जांबाज साथी को श्रद्धासुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। विदाई के समय पुलिस के जवानों ने अनुराग के साहस, जिंदादिली और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को विशेष एंबुलेंस से कानपुर के सरसौल स्थित उनके पैतृक गांव रामपुर के लिए रवाना किया गया।

“मेरा राम लौट आया…” मां और पत्नी को नहीं थी मौत की खबर, एंबुलेंस देखते ही दहाड़ मारकर रो पड़े परिजन

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि अनुराग की मां कांति देवी और पत्नी सैजल को अनुराग की मौत की पूरी सच्चाई पहले नहीं बताई गई थी। उन्हें सिर्फ तबीयत खराब होने की बात कही गई थी। लेकिन देर शाम जैसे ही एंबुलेंस हूटर बजाते हुए रामपुर स्थित आवास के सामने रुकी और तिरंगे में लिपटा अनुराग का पार्थिव शरीर नीचे उतारा गया, घर की महिलाएं बदहवास हो गईं। पिता महेंद्र सिंह भदौरिया, मां कांति, पत्नी सैजल और बहन कीर्ति दहाड़ें मारकर “मेरा राम… मेरा राम…” कहकर रो पड़े। आपको बता दें कि अनुराग को घर के लोग प्यार से ‘राम’ कहकर पुकारते थे। उस वक्त वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंख से आंसू बह रहे थे और लोग चाहकर भी एक-दूसरे को संभाल नहीं पा रहे थे।

चिल्ला थाने से लेकर रामपुर तक पसरा सन्नाटा, पिता के संघर्षों का हुआ दुखद अंत

हादसे की खबर मिलते ही पिता महेंद्र सिंह भदौरिया अपने कुछ करीबियों के साथ तुरंत बांदा के चिल्ला पहुंच गए थे। बेटे के शव के साथ जब वे गांव लौटे तो पूरे रामपुर गांव में सन्नाटा पसर गया। अनुराग के निधन की खबर मिलते ही आसपास के कई गांवों से भारी संख्या में लोग महेंद्र सिंह के घर ढांढस बंधाने पहुंचे। गांव के बुजुर्गों की जुबान पर बस एक ही बात थी कि जिस पिता ने वर्षों तक खुद तंगी झेलकर, दिन-रात मेहनत और संघर्ष कर अपने लाडले को पुलिस की खाकी वर्दी पहनाई थी, आज उसी होनहार बेटे को तिरंगे में लिपटा देखना उस पिता की जिंदगी का सबसे काला दिन बन गया। इस हृदयविदारक घटना से पूरे कानपुर और बांदा पुलिस महकमे में शोक की लहर है।