Tuesday , June 30 2026

चंपत राय के इस्तीफे और SIT एक्शन के बीच राम मंदिर में कैसे गिने जा रहे दान के नोट? सामने आया पाई-पाई का नया फॉर्मूला

अयोध्या।  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी और कई कीमती आभूषण गायब होने के सनसनीखेज खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। एसआईटी (SIT) की ताबड़तोड़ जांच, एफआईआर, गिरफ्तारियों और लगातार हो रही छापेमारी के बीच अयोध्या में एक तरफ जहां सियासत गरमाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ रामलला के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब लगातार उमड़ रहा है। इस भारी बवाल और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब देश-दुनिया के रामभक्तों के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर अब मंदिर में आने वाले दान के पैसों की गिनती कैसे हो रही है? कौन इसकी देखरेख कर रहा है और सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं?

भक्तों की अगाध आस्था को ठेस न पहुंचे और दान की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे, इसके लिए मंदिर परिसर के भीतर कैश काउंटिंग (नोटों की गिनती) की पूरी प्रक्रिया को अब पूरी तरह से पलट दिया गया है।

महासंकट के बीच ‘गोपाल राव’ ने संभाली कमान, बदला गया सुरक्षा घेरा

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों को इस बार एक बेहद कड़े और अभेद्य नए सुरक्षा घेरे के बीच खोला गया। चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई तथा कई महत्वपूर्ण सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद, राम मंदिर ट्रस्ट के बेहद भरोसेमंद और वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव ने स्वयं ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाल लिया है। उनकी सीधी निगरानी में ही दानपात्रों को खोलने और नकदी निकालने का काम शुरू हुआ। पिछले दिनों सेवादारों और बैंक कर्मियों द्वारा मिलकर किए गए बड़े गबन को ध्यान में रखते हुए, इस बार ट्रस्ट ने किसी भी तीसरे पक्ष पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय अपने सबसे आला और निष्पक्ष अधिकारियों को सीधे काउंटिंग टेबल पर तैनात कर दिया है।

तीसरी आंख का कड़ा पहरा, खत्म किए गए सीसीटीवी के ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’

दानपात्र से नकदी निकालने से लेकर उनकी गिनती पूरी होने और बैंक खाते में जमा होने तक, इस बार सुरक्षा व्यवस्था में रत्ती भर भी ढील नहीं दी गई है। संपूर्ण काउंटिंग परिसर और एक-एक काउंटिंग टेबल को हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में रखा गया है। तकनीकी टीम को लगाकर कैमरों के उन सभी ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ (जहां कैमरे की नजर नहीं पहुंचती) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, ताकि कोई भी शातिर कर्मचारी या सेवादार कैमरों की आड़ लेकर नोटों को इधर-उधर न कर सके। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपाल राव के साथ-साथ संबंधित बैंक के विशेष रूप से अधिकृत किए गए बेहद ईमानदार और चुनिंदा बैंक अधिकारी ही मौजूद रहे।

हेरफेर रोकने के लिए 100, 50 और 500 के नोटों का नया फॉर्मूला

अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि दानपात्र से निकली धनराशि में से 100, 50 और 500 रुपये के नोटों को अलग-अलग करके उनकी बेहद व्यवस्थित गड्डियां बनाई जा रही हैं। पूर्व में जिस तरह की खामियां (Loopholes) सामने आई थीं—जहां 5 लाख रुपये के बड़े बंडलों के बीच में चालाकी से 500-500 रुपये के नोट छुपाकर लाखों का हेरफेर कर दिया जाता था—उस लूपहोल को इस बार नई व्यवस्था के तहत पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है।

अब हर एक गड्डी की गिनती पूरी होते ही उसे तुरंत फिजिकल लेजर बुक के साथ-साथ डिजिटल सेंट्रलाइज्ड सिस्टम में भी रीयल-टाइम अपडेट किया जा रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट का एकमात्र प्रयास है कि रामलला के दरबार में आने वाले चढ़ावे के एक-एक पैसे का हिसाब पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी रहे, ताकि भविष्य में आस्था के इस पावन केंद्र पर इस तरह के किसी घिनौने वित्तीय अपराध की पुनरावृत्ति न हो सके।