LPG गैस आपूर्ति पर मोदी सरकार की नई रणनीति! मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अमेरिका से बढ़ा रिकॉर्ड आयात, खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाने के लिए शुरू हुआ महा-सप्लाई मिशन

LPG गैस आपूर्ति पर मोदी सरकार की नई रणनीति! मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अमेरिका से बढ़ा रिकॉर्ड आयात, खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाने के लिए शुरू हुआ महा-सप्लाई मिशन

देश के करोड़ों परिवारों के लिए रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर उत्पन्न संकट के बीच भारत ने पारंपरिक खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता घटाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका से एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) के आयात में अभूतपूर्व वृद्धि की है। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के साथ आयात की रफ्तार तेज कर दी है। इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या समुद्री नाकेबंदी जैसी विषम परिस्थितियों में भी भारतीय उपभोक्ताओं के चूल्हे जलते रहें और देश में एलपीजी की कोई किल्लत न हो।

केप्लर के आंकड़े: 73% से अधिक एलपीजी आपूर्ति अमेरिका से, खाड़ी देशों में भारी गिरावट

वैश्विक ऊर्जा और समुद्री जहाजरानी डेटा पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय रिसर्च एजेंसी 'केप्लर' (Kpler) के नवीनतम आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि भारत की एलपीजी आपूर्ति टोकरी में अमेरिकी महाद्वीप का दबदबा तेजी से बढ़ा है। केप्लर के अनुसार, भारत ने अगस्त महीने में अमेरिका से लगभग 6.2 लाख टन एलपीजी का आयात किया है। इससे पहले जुलाई के महीने में यह आंकड़ा करीब 8.9 लाख टन के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में अमेरिका से हुई आपूर्ति भारत के कुल एलपीजी आयात का 73 प्रतिशत से अधिक रही है। ऐतिहासिक रूप से भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का 60 से 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है और इसमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा आपूर्ति कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों से होती रही है। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में खाड़ी देशों से होने वाले आयात में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी भरपाई के लिए भारत ने तेजी से अमेरिकी स्रोतों का रुख किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने का कारण

भारत द्वारा एलपीजी आयात के इस बड़े भौगोलिक बदलाव (Geographical Shift) के पीछे पश्चिम एशिया का ताजा भू-राजनीतिक संकट मुख्य वजह है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के संवेदनशील जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है, जिसके रास्ते खाड़ी के तेल और गैस उत्पादक देशों से भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों को कच्चे तेल और गैस की अधिकांश आपूर्ति होती है। इस मार्ग पर हमलों, प्रतिबंधों और बीमा जोखिमों के कारण कई जहाजों का आवागमन बाधित हुआ है। किसी भी संभावित घरेलू संकट से बचने के लिए भारत सरकार ने प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाते हुए तुरंत अमेरिकी खाड़ी तट (US Gulf Coast) से एलपीजी कार्गो की बुकिंग बढ़ा दी। यद्यपि अमेरिका से भारत तक की लंबी समुद्री दूरी के कारण मालभाड़ा (Freight Cost) और लॉजिस्टिक्स लागत अधिक आती है, लेकिन सरकार ने लागत के बजाय ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी है।

2.2 मिलियन टन का वार्षिक दीर्घकालिक समझौता: मॉन्ट बेल्व्यू बेंचमार्क पर खरीद

भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए दोनों देशों ने पहले ही एक ऐतिहासिक रूपरेखा तैयार कर ली थी। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारतीय सार्वजनिक तेल कंपनियों ने वर्ष 2026 के लिए अमेरिकी गल्फ कोस्ट से लगभग 2.2 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) एलपीजी आयात करने का एक संरचित अनुबंध (Structured Contract) किया है।

यह समझौता भारत के कुल वार्षिक एलपीजी आयात के लगभग 10 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इस अनुबंध के तहत एलपीजी की खरीद का मूल्य निर्धारण अमेरिकी बेंचमार्क 'मॉन्ट बेल्व्यू' (Mont Belvieu) के आधार पर तय किया गया है। शेवरॉन, फिलिप्स और अन्य शीर्ष वैश्विक उत्पादकों से जहाजों के जरिए एलपीजी के बड़े कार्गो भारत लाए जा रहे हैं। इस दीर्घकालिक अनुबंध ने भारत को सऊदी अरामको के मूल्य निर्धारण दबाव से भी राहत दी है और मूल्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है।

रसोई गैस की कीमतों और 10 करोड़ उज्ज्वला परिवारों पर क्या होगा असर?

देश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के विस्तार के बाद एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या में भारी उछाल आया है और 10 करोड़ से अधिक गरीब ग्रामीण परिवारों सहित देश के 30 करोड़ से अधिक घरों में एलपीजी प्राथमिक ईंधन बन चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या आयात के स्रोत बदलने और लंबी दूरी के मालभाड़े का असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य अस्थिरता (Price Volatility) से पूरी तरह सुरक्षित रखने की व्यवस्था की है। पूर्व में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई थीं, तब भी सरकार ने सब्सिडी और क्षतिपूर्ति के रूप में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का भार खुद वहन किया था ताकि उज्ज्वला लाभार्थियों को 500 से 550 रुपये के दायरे में ही सिलेंडर मिलता रहे। अमेरिका से आपूर्ति आधार में विविधता लाने से वैश्विक स्तर पर सौदेबाजी की ताकत बढ़ती है, जिससे भारत को प्रतिस्पर्धी दरों पर गैस मिलती है और घरेलू खुदरा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है।

अल्जीरिया और वेनेजुएला से भी आपूर्ति: भारत की वैश्विक 'फ्यूल डाइवर्सिफिकेशन' नीति

भारत सरकार अपनी ऊर्जा सुरक्षा को केवल एक या दो देशों के भरोसे नहीं रखना चाहती। इसी बहुआयामी रणनीति के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) उत्तरी अफ्रीकी देश अल्जीरिया की राष्ट्रीय ऊर्जा कंपनी 'सोनाट्राच' (Sonatrach) के साथ भी एक बड़ा एलपीजी आयात समझौता करने के अंतिम चरण में है। इस समझौते के तहत भारत हर महीने लगभग 45,000 से 55,000 टन एलपीजी अल्जीरिया से प्राप्त करेगा।

इसके साथ ही, कच्चे तेल के मोर्चे पर भी भारत ने अगस्त में वेनेजुएला से करीब 3.83 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल का आयात किया है। अमेरिका और वेनेजुएला के इस संयुक्त प्रवाह ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी महाद्वीप अब भारत की संपूर्ण ऊर्जा बास्केट का एक अनिवार्य और रणनीतिक हिस्सा बन चुका है।

ऊर्जा सुरक्षा की नई गारंटी: किसी भी संकट में नहीं रुकेगी आपूर्ति

मोदी सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा कूटनीति (Energy Diplomacy) में किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। अमेरिका से रिकॉर्ड एलपीजी खरीद, अल्जीरिया से नए करार और रणनीतिक गैस भंडार का विस्तार भारत की दूरदर्शी योजना को दर्शाता है। पश्चिम एशिया के अनिश्चित माहौल में अमेरिका से 73% गैस आयात की यह नई व्यवस्था न केवल देश के करोड़ों घरों में रसोई गैस के सिलेंडरों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि भारत के आर्थिक विकास की गति को भी वैश्विक संकटों के असर से सुरक्षित रखेगी।

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