यूपी से पंजाब जा रही 30 सीटर बस और ट्रेन में भीषण टक्कर! रेस्क्यू में अंदर से निकले इतने यात्री कि गिनती में लगे 4 घंटे, मंजर देख पुलिस के उड़े होश
उत्तर प्रदेश के मार्ग पर उस समय चीख-पुकार मच गई जब यात्रियों से खचाखच भरी एक प्राइवेट बस और एक्सप्रेस ट्रेन के बीच जबरदस्त भिड़ंत हो गई। यह हादसा इतना भीषण था कि टक्कर की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्य इलाकों से रोजाना सैकड़ों यात्री रोजी-रोटी की तलाश में पंजाब और हरियाणा के औद्योगिक शहरों की ओर रुख करते हैं। इसी कड़ी में देर रात एक 30 सीटर बस उत्तर प्रदेश के जिलों से यात्रियों को लेकर पंजाब के लुधियाना और जालंधर के लिए रवाना हुई थी। जैसे ही बस रेलवे ट्रैक के पास से गुजर रही थी, तभी तेज रफ्तार ट्रेन से उसकी आमने-सामने या साइड से सीधी टक्कर हो गई। टक्कर लगते ही बस के परखच्चे उड़ गए और चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। राहत कार्य शुरू करने के लिए रात के अंधेरे में टॉर्च और एम्बुलेंस की लाइटों का सहारा लिया गया। पुलिस के लिए सबसे पहली चुनौती बस के मलबे में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को पास के जिला अस्पताल पहुंचाना था।
भीषण टक्कर के बाद चीख-पुकार और रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन
दुर्घटना स्थल पर दृश्य बेहद भयावह था। ट्रेन की रफ्तार और बस की बॉडी आपस में टकराने के कारण बस का एक हिस्सा पूरी तरह से पिचका हुआ था। कांच के टुकड़े, बिखरा हुआ सामान और खून से लथपथ यात्री मदद की गुहार लगा रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस के आने से पहले ही अपने स्तर पर बस की खिड़कियों को तोड़कर फंसे हुए लोगों को निकालना शुरू कर दिया था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए आसपास के तीन से चार थानों की पुलिस फोर्स और आधा दर्जन से ज्यादा एम्बुलेंस गाड़ियों को तत्काल मौके पर भेजा गया। गैस कटर की मदद से बस की लोहे की चादरों को काटा गया ताकि अंदर फंसे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बिना किसी और चोट के बाहर निकाला जा सके। रात के समय रोशनी की कमी और जगह संकरी होने के कारण रेस्क्यू टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
30 सीटर बस और 100 से ज्यादा सवारियां: गिनती करते-करते हक्के-बक्के रह गए अधिकारी
जब रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ा और पुलिस ने अस्पताल भेजे जाने वाले घायलों तथा सुरक्षित बचे यात्रियों का ब्योरा जुटाना शुरू किया, तो मौके पर मौजूद आला अधिकारी हैरान रह गए। ऑन-पेपर और चेसिस रिकॉर्ड के मुताबिक यह बस महज 30 से 32 सीटिंग कैपेसिटी वाली थी। लेकिन जब एक-एक करके यात्रियों को बाहर निकालकर एम्बुलेंस में बिठाया जाने लगा और उनकी सूची तैयार की जाने लगी, तो आंकड़ा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
पुलिस प्रशासन की पूरी टीम को बस में सवार कुल यात्रियों की सही गिनती करने और उनकी पहचान दर्ज करने में ही लगभग 4 घंटे का लंबा समय लग गया। 30 सीटों वाली इस मिनी/मॉडिफाइड बस के अंदर 100 से भी अधिक यात्री किसी तरह ठूंस-ठूंस कर बिठाए गए थे। बस के स्लीपर केबिनों, गैलरी (पैसेज) और यहाँ तक कि सामान रखने वाली जगह में भी यात्रियों को बैठाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की इतनी अत्यधिक संख्या थी कि पुलिस को गिनती के दौरान बार-बार रजिस्टर का पन्ना बदलना पड़ा।
यूपी से पंजाब जा रहे प्रवासी मजदूरों की दास्तान: क्यों दांव पर लगाई जाती है जिंदगी?
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर अवैध प्राइवेट ट्रैवल एजेंटों और बस ऑपरेटरों के काले कारोबार को उजागर कर दिया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बस में सवार ज्यादातर यात्री दिहाड़ी मजदूर, कृषि श्रमिक और छोटे कामगार थे, जो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से पंजाब के खेतों और कारखानों में मजदूरी करने जा रहे थे।
प्राइवेट बस ऑपरेटर कम किराए का लालच देकर या फिर सीधी बस सेवा देने के नाम पर इन गरीब मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं। परमिट 30 या 35 सवारी का लिया जाता है, लेकिन मुनाफा कमाने के चक्कर में क्षमता से तीन से चार गुना अधिक टिकट बेच दिए जाते हैं। बस के अंदर इतनी जगह भी नहीं बची थी कि कोई पैर फैला सके। यही कारण रहा कि जब हादसा हुआ, तो यात्रियों को हिलने तक का मौका नहीं मिला और एक-दूसरे के ऊपर गिरने के कारण कई लोग दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई और आरटीओ-रेलवे तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज हादसे और उजागर हुई भारी ओवरलोडिंग के बाद उत्तर प्रदेश शासन और परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थानीय पुलिस ने बस मालिक, ट्रैवल ऑपरेटर और चालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की कोशिश, लापरवाही से गाड़ी चलाने और मोटर व्हीकल एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। इसके साथ ही, इस बात की भी जांच की जा रही है कि इतने अंतरराज्यीय चेकपोस्टों और आरटीओ (RTO) बैरियरों को पार करते हुए यह ओवरलोड बस पंजाब की सीमा की तरफ कैसे बढ़ रही थी।
रेलवे प्रशासन ने भी घटना के कारणों की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। क्या यह हादसा समपार फाटक (Level Crossing) पर लापरवाही के कारण हुआ या फिर सिग्नल ब्रेक करने की वजह से, इसकी तकनीकी जांच की जा रही है। जिला प्रशासन ने घायलों के समुचित और मुफ्त इलाज के निर्देश दिए हैं, जबकि गंभीर रूप से घायल यात्रियों को हायर मेडिकल सेंटर रेफर किया गया है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सड़कों पर दौड़ती ये ओवरलोड 'चलता-फिरता ताबूत' जैसी बसें किस तरह मासूम लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रही हैं।