अरशद वारसी से शादी से पहले जब जया बच्चन ने मारिया को दी थी दो-टूक सलाह; अमिताभ बच्चन के साथ 50 साल के अनुभव से खोला था फिल्मी शादियों का कड़वा सच

अरशद वारसी से शादी से पहले जब जया बच्चन ने मारिया को दी थी दो-टूक सलाह; अमिताभ बच्चन के साथ 50 साल के अनुभव से खोला था फिल्मी शादियों का कड़वा सच

भारतीय सिनेमा जगत में रिश्तों का बनना और बिगड़ना अक्सर सुर्खियों में रहता है, लेकिन कुछ जोड़ियां और उनके मार्गदर्शक ऐसी मिसाल पेश करते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सबक बन जाती हैं। बॉलीवुड के सबसे वर्सेटाइल और चहेते अभिनेताओं में शुमार अरशद वारसी और उनकी पत्नी मारिया गोरेट्टी की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी ही है। हालांकि, इस खूबसूरत रिश्ते की शुरुआत से पहले एक ऐसा किस्सा जुड़ा हुआ है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। अरशद वारसी को बॉलीवुड में लॉन्च करने वाली और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानने वाली दिग्गज अभिनेत्री व सांसद जया बच्चन ने शादी के मंडप में जाने से पहले मारिया गोरेट्टी को एक बेहद संजीदा और जीवन बदलने वाली सलाह दी थी।

जया बच्चन, जिन्होंने खुद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ सिनेमा और जीवन के हर उतार-चढ़ाव को बेहद करीब से देखा है, जानती थीं कि एक अभिनेता की पत्नी होना बाहर से जितना ग्लैमरस और आकर्षक दिखता है, अंदर से वह उतना ही चुनौतीपूर्ण और त्याग से भरा सफर होता है। जब अरशद और मारिया ने शादी करने का फैसला किया, तो जया बच्चन ने एक वरिष्ठ अभिभावक के रूप में मारिया से सीधे बात की और उन्हें एक अभिनेता के साथ जिंदगी बिताने की जमीनी हकीकतों से रूबरू कराया।

'एक्टर्स के साथ रहना आसान नहीं': अमिताभ बच्चन के साथ 50 साल के अनुभव का निचोड़

जया बच्चन ने मारिया गोरेट्टी से बातचीत के दौरान बड़ी बेबाकी से कहा था कि एक अभिनेता के साथ वैवाहिक जीवन बिताना किसी आम इंसान के साथ रहने जैसा नहीं होता। उन्होंने मारिया को समझाते हुए कहा था, "एक एक्टर से शादी करना बहुत मुश्किल काम है। एक अभिनेता का मिजाज, उसकी भावनाएं और उसका मानसिक संतुलन सीधे तौर पर उसके काम, उसकी फिल्मों की सफलता और विफलता से जुड़ा होता है। जब एक एक्टर की फिल्म फ्लॉप होती है या उसे काम नहीं मिलता, तो वह गहरे तनाव और असुरक्षा से घिर जाता है। ऐसे वक्त में एक पत्नी को केवल जीवनसाथी नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा सहारा और भावनात्मक लंगर (Anchor) बनना पड़ता है।"

जया बच्चन ने अपने और अमिताभ बच्चन के पांच दशकों के वैवाहिक जीवन के अनुभवों का हवाला देते हुए मारिया को समझाया कि अभिनेताओं को बहुत अधिक 'स्पेस' और भावनात्मक समझ की जरूरत होती है। वे कई बार सेट से घर लौटने के बाद भी अपने किरदार के हैंगओवर में रहते हैं या फिर अगले दिन के सीन की चिंता में खोए रहते हैं। ऐसे में अगर घर के भीतर धैर्य और आपसी तालमेल न हो, तो रिश्ते में दरारें आने में वक्त नहीं लगता। जया बच्चन ने मारिया को आगाह किया था कि अगर वे इस रिश्ते में कदम रख रही हैं, तो उन्हें बहुत सारा सब्र, सहनशीलता और समझदारी अपने साथ रखनी होगी।

'तेरे मेरे सपने' और अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन (ABCL): जब जया ने बदला था अरशद का मुकद्दर

जया बच्चन का अरशद वारसी के जीवन में कितना बड़ा स्थान है, इसे समझने के लिए 90 के दशक के उस दौर में जाना होगा जब अरशद वारसी कोरियोग्राफी और बैकग्राउंड डांसिंग की दुनिया में संघर्ष कर रहे थे। साल 1996 में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की कंपनी 'अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (ABCL) अपनी पहली फिल्म 'तेरे मेरे सपने' बना रही थी।

जया बच्चन ने ही एक डांस शो और नाटकों में अरशद की ऊर्जा व कॉमिक टाइमिंग को देखकर उन्हें फिल्म के मुख्य किरदार के लिए चुना था। अरशद वारसी ने कई साक्षात्कारों में यह खुलकर स्वीकार किया है कि अगर जया बच्चन ने उन पर भरोसा न जताया होता, तो वे शायद कभी सिनेमा के इतने बड़े परदे पर हीरो नहीं बन पाते। जया बच्चन हमेशा अरशद के प्रति एक मां जैसा स्नेह और संरक्षण रखती थीं। यही वजह थी कि जब अरशद की निजी जिंदगी में मारिया गोरेट्टी की एंट्री हुई, तो जया बच्चन ने एक पारिवारिक गार्जियन की तरह मारिया को हर परिस्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार करना अपना फर्ज समझा।

मारिया गोरेट्टी और अरशद वारसी की प्रेम कहानी: MTV वीजे से शादी के मंडप तक

मारिया गोरेट्टी 1990 के दशक में भारतीय टेलीविजन और एमटीवी (MTV) की सबसे मशहूर और बिंदास वीडियो जॉकी (VJ) हुआ करती थीं। उनकी अपनी एक अलग पहचान, फैन फॉलोइंग और बेबाक व्यक्तित्व था। अरशद वारसी और मारिया की पहली मुलाकात 1991 में सेंट जेवियर्स कॉलेज के मशहूर फेस्टिवल 'मल्हार' के दौरान हुई थी, जहां अरशद एक डांस प्रतियोगिता को जज करने गए थे और मारिया वहां एक प्रतिभागी थीं।

शुरुआती मुलाकातों के बाद दोनों के बीच गहरी दोस्ती हुई जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। लगभग आठ वर्षों तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद दोनों ने 14 फरवरी 1999 को वैलेंटाइन डे के खास मौके पर शादी के बंधन में बंधने का फैसला किया। मारिया जहां ईसाई पृष्ठभूमि से थीं, वहीं अरशद मुस्लिम परिवार से आते थे। दोनों ने निकाह और चर्च वेडिंग दोनों रीति-रिवाजों से शादी की। इस शादी में दोनों के परिवारों के साथ-साथ बच्चन परिवार का आशीर्वाद भी पूरी तरह उनके साथ था।

चकाचौंध के पीछे का अकेलापन और इनसिक्योरिटी: जया बच्चन का व्यावहारिक नजरिया

मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, पटना, कोलकाता और बेंगलुरु समेत देश भर के सिनेमा प्रेमियों को अक्सर फिल्मी सितारों की जिंदगी केवल रेड कार्पेट, आलीशान गाड़ियां और करोड़ों की कमाई जैसी नजर आती है। लेकिन जया बच्चन की यह सलाह इस बात का आइना है कि इस चकाचौंध के पीछे कितना गहरा अकेलापन और अनिश्चितता छिपी होती है।

बॉलीवुड में शुक्रवार को जब फिल्में रिलीज होती हैं, तो हर शुक्रवार किसी अभिनेता की तकदीर बदलती या बिगड़ती है। एक हिट फिल्म अभिनेता को आसमान पर बैठा देती है, जबकि लगातार दो-तीन फ्लॉप फिल्में उसे घर बैठने पर मजबूर कर देती हैं।

अरशद वारसी के करियर में भी एक ऐसा दौर आया था जब 'तेरे मेरे सपने' के बाद लगभग तीन-चार साल तक उनके पास कोई ठोस काम नहीं था और वे घर पर खाली बैठे थे। उस मुश्किल दौर में मारिया गोरेट्टी ने जिस तरह से घर की कमान संभाली और अरशद का मनोबल टूटने नहीं दिया, वह इस बात का सबूत था कि उन्होंने जया बच्चन की उस सलाह को अपने दिल में पूरी तरह उतार लिया था। इसके बाद 2003 में जब राजकुमार हिरानी की 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में अरशद ने 'सर्किट' का अमर किरदार निभाया, तो उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

25 साल बाद भी कायम है मारिया और अरशद का अटूट रिश्ता: जया की सीख बनी ढाल

आज अरशद वारसी और मारिया गोरेट्टी की शादी को ढाई दशक (25 साल) से अधिक का समय बीत चुका है। बॉलीवुड की इस चकाचौंध भरी और नाजुक रिश्तों वाली दुनिया में जहां आए दिन तलाक और अलगाव की खबरें आती रहती हैं, वहां अरशद और मारिया का रिश्ता चट्टान की तरह मजबूत खड़ा है। उनके दो बच्चे—बेटा जेके और बेटी जेने ज़ोए हैं।

मारिया गोरेट्टी ने खुद बाद में कई बार यह माना कि जया बच्चन द्वारा दी गई वह सलाह उनके वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी साबित हुई। जब भी उनके जीवन में अभिनेताओं से जुड़ी असुरक्षाएं, व्यस्त शेड्यूल या तनाव के पल आए, तो उन्होंने जया जी के शब्दों को याद रखा और हमेशा शांति व समझदारी से हर तूफान का सामना किया।

जया बच्चन का यह बेबाक संस्मरण केवल मारिया गोरेट्टी के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक बड़ी सीख है जो किसी रचनात्मक, अनिश्चित और दबाव भरे पेशे से जुड़े व्यक्ति के साथ अपनी जिंदगी की डोर बांधता है। यह कहानी सिखाती है कि सच्चा प्रेम केवल अच्छे दिनों में साथ हंसने का नाम नहीं है, बल्कि सबसे कठिन और अंधेरे दिनों में एक-दूसरे की ढाल बनकर खड़े रहने का नाम ही वास्तविक वैवाहिक समर्पण है।

Latest Posts