SCO समिट में आमने-सामने होंगे मोदी और पुतिन: बिश्केक से नई दिल्ली तक तैयार हुआ भारत-रूस का महा-प्लान; जानिए ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा और $100B ट्रेड का पूरा रोडमैप
वैश्विक भू-राजनीति में मची भारी उथल-पुथल, पश्चिम एशिया के तनाव और यूक्रेन संघर्ष के बीच पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर मध्य एशिया के पहाड़ों में बसे किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक पर टिक गई हैं। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक बहुप्रतीक्षित और रणनीतिक रूप से बेहद अहम द्विपक्षीय वार्ता होने जा रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 29 अगस्त से अपने चार दिवसीय मध्य एशिया दौरे की शुरुआत कर रहे हैं, जिसके तहत वे 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा करेंगे और 31 अगस्त से 1 सितंबर तक बिश्केक में एससीओ सम्मेलन में भाग लेंगे। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों महानेताओं की आमने-सामने की मुलाकात केवल औपचारिक कूटनीतिक संवाद नहीं है, बल्कि यह आने वाले दशकों के लिए भारत और रूस के आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला 'मास्टर प्लान' है।
बिश्केक से नई दिल्ली: अगले तीन हफ्तों में मोदी-पुतिन की बैठकों की हैट्रिक
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय कूटनीति इस समय अपने चरम पर है। बिश्केक में होने वाली यह बैठक केवल एक शुरुआत है। इसके ठीक बाद 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आएंगे, जहां दोनों नेता एक बार फिर विस्तृत द्विपक्षीय विमर्श करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक (Annual Summit) को लेकर भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
इस महा-बैठक की ठोस जमीन तैयार करने के लिए हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मॉस्को का दो दिवसीय दौरा किया था, जहां उन्होंने क्रेमलिन में राष्ट्रपति पुतिन से सीधी मुलाकात कर प्रधानमंत्री मोदी का एक निजी संदेश सौंपा था। इसके साथ ही मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की 27वीं बैठक संपन्न हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता जयशंकर और रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने की। इस उच्चस्तरीय आयोग में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, वैज्ञानिक तकनीक और कनेक्टिविटी पर जो विस्तृत सहमति बनी है, उसी ब्लूप्रिंट पर बिश्केक में मोदी और पुतिन अंतिम मुहर लगाएंगे।
भारत के किसानों के लिए उर्वरक और ऊर्जा सुरक्षा: मॉस्को का सीधा वादा
भारत-रूस मास्टर प्लान का सबसे अहम और प्राथमिक खंभा ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा है। पश्चिम एशिया (रेड सी) में जारी व्यापारिक व्यवधानों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बावजूद रूस ने भारत को रियायती कच्चे तेल (Crude Oil) और एलएनजी की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव से सुरक्षित रखने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
इसके साथ ही, भारतीय कृषि और किसानों के लिए एक बड़ी राहत की पटकथा भी लिखी गई है। डॉ. जयशंकर के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि रूस भारत को डीएपी (DAP), पोटाश और एनपीके जैसे जरूरी उर्वरकों (Fertilizers) की आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी कर रहा है। आने वाले रबी और खरीफ सीजन के लिए भारतीय किसानों को बिना किसी किल्लत के सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए रूस के साथ दीर्घकालिक अनुबंधों पर सहमति बनी है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।
$100 अरब डॉलर का ट्रेड टारगेट: रुपए-रूबल और नेशनल करेंसी में भुगतान तंत्र
भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर (US$ 100 Billion) के पार ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच का व्यापार रिकॉर्ड 68.7 अरब डॉलर के स्तर को छू चुका था, और मामूली उतार-चढ़ाव के बाद 2026 में यह ग्राफ फिर से तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। राष्ट्रपति पुतिन ने खुद इस बात को रेखांकित किया है कि व्यापार में यह निरंतर बढ़ोतरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा द्विपक्षीय संबंधों पर दिए जा रहे 'व्यक्तिगत ध्यान' का नतीजा है।
इस व्यापारिक मास्टर प्लान की सबसे बड़ी चुनौती व्यापार असंतुलन (Trade Deficit) और पश्चिमी बैंकिंग प्रतिबंधों (SWIFT Ban) से निपटना रही है। बिश्केक वार्ता में दोनों नेता राष्ट्रीय मुद्राओं—रुपया और रूबल—में व्यापार निपटान (Direct Rupee-Ruble Settlement Mechanism) को और अधिक सुगम व संस्थागत बनाने पर चर्चा करेंगे। इसके तहत रूस से तेल और खाद आयात के बदले भारत से रूस को फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां), ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कृषि उत्पाद और इंजीनियरिंग मशीनरी के निर्यात को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार अधिक संतुलित और टिकाऊ बन सके।
रक्षा आपूर्ति और रणनीतिक संप्रभुता: स्पेयर पार्ट्स और मेक इन इंडिया पर फोकस
भारतीय सशस्त्र बलों के हथियारों और रक्षा प्रणालियों का एक बड़ा हिस्सा आज भी रूसी मूल का है। यूक्रेन युद्ध के चलते पिछले कुछ समय में स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव में जो देरी देखी जा रही थी, उसे दूर करने के लिए दोनों देशों ने एक नया मैकेनिज्म तैयार किया है। मास्टर प्लान के तहत अब केवल रक्षा सौदे करने के बजाय भारत में ही रूसी सैन्य उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स के संयुक्त उत्पादन (Joint Production under Make in India) पर जोर दिया जा रहा है।
दोनों नेता एस-400 (S-400 Triumf) वायु रक्षा प्रणाली की शेष रेजीमेंट्स की समय पर डिलीवरी, सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के आधुनिकीकरण और संयुक्त उद्यमों के तहत उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्माण की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही, तमिलनाडु के कुडनकुलम में रूसी सहयोग से बन रहे 1,000 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की प्रगति और भविष्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के क्षेत्र में असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनने की उम्मीद है।
INSTC और मध्य एशिया कनेक्टिविटी: चीन के प्रभाव को संतुलित करने की साझा नीति
बिश्केक में आयोजित यह एससीओ सम्मेलन भारत की 'एक्सटेंडेड नेबरहुड' (विस्तारित पड़ोस) और 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। भारत और रूस दोनों ही 'अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे' (INSTC) को पूरी तरह सक्रिय करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ईरान के चाबहार बंदरगाह और कैस्पियन सागर के रास्ते रूस और यूरोप तक जाने वाला यह 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टी-मोडल रूट स्वेज नहर की तुलना में माल ढुलाई का समय 40% और लागत 30% तक कम कर देता है।
मध्य एशिया में चीन के आक्रामक 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और आर्थिक एकाधिकार को संतुलित करने के लिए भारत और रूस का यह साझा प्रयास बेहद अहम है। कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों में मौजूद 46 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Minerals) और क्रिटिकल मिनरल्स तक सीधी पहुंच बनाने के लिए भारत-रूस-मध्य एशिया त्रिकोण एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभर रहा है। भारत ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि कोई भी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए ही आगे बढ़ना चाहिए।
पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच 'रणनीतिक स्वायत्तता' का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह बैठक दुनिया को भारत की मजबूत और स्वतंत्र 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का एक स्पष्ट संदेश देती है। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह क्वाड (QUAD) जैसे मंचों पर पश्चिमी देशों के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत रखते हुए भी रूस के साथ अपने ऐतिहासिक और सदाबहार संबंधों से कोई समझौता नहीं करेगा।
शंघाई सहयोग संगठन के मंच से आतंकवाद, सीमा पार चरमपंथ और अलगाववाद के खिलाफ साझा लड़ाई पर भी दोनों नेता एक स्वर में बात करेंगे। बिश्केक से निकलने वाली यह कूटनीतिक गूंज न केवल यूरेशियाई क्षेत्र में शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करेगी, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World) में भारत और रूस की निर्णायक और स्वतंत्र भूमिका पर एक मजबूत वैश्विक मुहर भी लगाएगी।