लॉरेंस बिश्नोई इंटरव्यू मामले में पंजाब के DSP गुरशेर संधू को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: बर्खास्तगी का सरकारी आदेश रद्द, पुलिस सेवा में वापसी का रास्ता हुआ साफ

लॉरेंस बिश्नोई इंटरव्यू मामले में पंजाब के DSP गुरशेर संधू को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: बर्खास्तगी का सरकारी आदेश रद्द, पुलिस सेवा में वापसी का रास्ता हुआ साफ

पंजाब पुलिस के चर्चित और विवादों में रहे डीएसपी गुरशेर सिंह संधू को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के पुलिस हिरासत के दौरान हुए बहुचर्चित टीवी इंटरव्यू मामले में पंजाब सरकार द्वारा जारी किए गए डीएसपी संधू की सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को हाई कोर्ट ने पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद गुरशेर संधू की पुलिस सेवा में पुनः बहाली का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस फैसले ने न केवल संधू के लिए एक बड़ी राहत का काम किया है, बल्कि राज्य सरकार, गृह विभाग और पुलिस महकमे द्वारा की गई जांच प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्यवाहियों पर भी न्यायिक पुनर्विचार की मुहर लगा दी है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: डीएसपी गुरशेर संधू की बर्खास्तगी का आदेश रद्द

पंजाब सरकार के गृह विभाग ने 2 जनवरी 2025 को एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए डीएसपी गुरशेर सिंह संधू को सेवा से बर्खास्त करने की अधिसूचना जारी की थी। संधू पर आरोप था कि जब लॉरेंस बिश्नोई पंजाब पुलिस की हिरासत में था, तब उनकी मौजूदगी और निगरानी वाले परिसर में यह विवादित इंटरव्यू आयोजित कराया गया था। इस बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ संधू ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासनिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट में मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने मजबूती से दलील रखी कि सरकार ने बिना उचित विभागीय जांच और बिना उनका पक्ष सुने जल्दबाजी में बर्खास्तगी की एकतरफा कार्रवाई की थी। दोनों पक्षों की विस्तृत बहस और रिकॉर्ड्स का अवलोकन करने के बाद उच्च न्यायालय ने माना कि बर्खास्तगी की यह कार्रवाई कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतरती। अदालत ने सरकार के बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए संधू के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे करीब डेढ़ साल से चली आ रही इस कानूनी लड़ाई में उन्हें सबसे बड़ी जीत हासिल हुई है।

खरड़ सीआईए कॉम्प्लेक्स से गैंगस्टर का इंटरव्यू: पूरे देश में मचा था भारी बवाल

इस पूरे मामले की जड़ें मार्च 2023 में प्रसारित हुए उस सनसनीखेज टीवी इंटरव्यू से जुड़ी हैं, जिसने पूरे देश के सुरक्षा तंत्र और जेल प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए थे। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को जब पंजाब पुलिस दिल्ली की तिहाड़ जेल से ट्रांजिट रिमांड पर पंजाब लाई थी, तब एक निजी राष्ट्रीय समाचार चैनल पर बिश्नोई का वीडियो इंटरव्यू ऑन-एयर हुआ था।

इस इंटरव्यू के प्रसारित होते ही पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भूचाल आ गया था। विपक्षी दलों ने जेलों और पुलिस कस्टडी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था और पंजाब पुलिस के विशेष पुलिस महानिदेशक (एसडीजीपी) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की तह तक जाने के निर्देश दिए थे। एसआईटी की तकनीकी जांच में यह पुष्टि हुई थी कि पहला इंटरव्यू खरड़ स्थित सीआईए (CIA) स्टाफ परिसर के भीतर ही आयोजित किया गया था, जहां उस समय डीएसपी गुरशेर संधू बतौर जांच अधिकारी और प्रभारी तैनात थे।

'मुझे बनाया गया बली का बकरा': संधू ने कोर्ट में पेश की एजीटीएफ कस्टडी की दलील

हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में डीएसपी गुरशेर संधू ने खुद को बेकसूर बताते हुए दावा किया था कि पूरे मामले में उन्हें जानबूझकर 'बली का बकरा' बनाया गया है। संधू की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत को बताया कि जब लॉरेंस बिश्नोई को पंजाब लाया गया था, तो वह पहले दिन से ही पंजाब पुलिस की 'एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स' (AGTF) की सीधी हिरासत में था।

संधू ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि खरड़ स्थित सीआईए कॉम्प्लेक्स में भी गैंगस्टर बिश्नोई की सुरक्षा, आवाजाही और कस्टडी की पूरी जिम्मेदारी एजीटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों और उनकी विशेष सुरक्षा टीम के पास थी। उनका काम केवल सामान्य जांच समन्वय तक सीमित था। संधू का तर्क था कि उच्च अधिकारियों की निगरानी और जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए केवल निचले स्तर के अधिकारियों और उन्हें निशाना बनाकर बलि का बकरा बनाया गया, जबकि इस प्रकरण में उनकी कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत का ठोस सबूत नहीं था।

एसआईटी जांच, निलंबन और आय से अधिक संपत्ति के मामले: कानूनी लड़ाई का पूरा घटनाक्रम

लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू मामले के बाद गुरशेर संधू का करियर लगातार विवादों और कानूनी मुकदमों के भंवर में फंसता चला गया था। एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद अक्टूबर 2024 में सरकार ने संधू सहित करीब सात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ पंजाब पुलिस के सतर्कता ब्यूरो (Vigilance Bureau) ने आय से अधिक संपत्ति, जबरन वसूली (Extortion) और विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े आरोपों में अलग से मामले दर्ज किए थे।

विजिलेंस ब्यूरो ने आरोप लगाया था कि अपने कार्यकाल के दौरान संधू ने अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक खर्च किए और कई संपत्तियों का लेन-देन किया। हालांकि, संधू ने इन सभी आरोपों को बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान संधू के वकीलों ने यह साबित करने की कोशिश की कि मुख्य इंटरव्यू मामले में उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई सीधी चार्जशीट या ठोस आपराधिक साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।

पुलिस सेवा में बहाली की राह और पंजाब पुलिस महकमे के लिए बड़ा संदेश

हाई कोर्ट द्वारा बर्खास्तगी का आदेश रद्द किए जाने के बाद अब गेंद पंजाब सरकार और राज्य पुलिस मुख्यालय के पाले में आ गई है। कानूनी जानकारों के अनुसार, इस अदालती आदेश के बाद डीएसपी गुरशेर संधू को पुलिस विभाग में बहाल करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करनी होगी। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज अन्य सतर्कता और विभागीय मामलों की जांच अपने तय कानूनी नियमों के तहत जारी रह सकती है।

यह फैसला पंजाब पुलिस और प्रशासनिक हलकों के लिए एक बहुत बड़ा नजीर बनकर सामने आया है। इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में जनता के दबाव या मीडिया ट्रायल के आधार पर बिना उचित प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच के अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली कठोर दंडात्मक कार्रवाइयां अदालत की कसौटी पर टिक नहीं पाती हैं। गुरशेर संधू की यह अदालती जीत राज्य के प्रशासनिक और पुलिस तंत्र में अनुशासनिक कार्रवाइयों के तौर-तरीकों पर नए सिरे से सोचने को मजबूर करेगी।

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