सीएम योगी आदित्यनाथ ने जारी की 'स्टार्टअप नीति-2026', बोले- देश के स्टार्टअप्स में प्रदेश की हिस्सेदारी 10% से बढ़ाकर करेंगे 20%, 107 नए स्टार्टअप्स को बांटी प्रोत्साहन राशि
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवा उद्यमियों और नवाचारियों को संबोधित करते हुए राज्य के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026' पुस्तिका का आधिकारिक विमोचन किया और साथ ही आधुनिक 'स्टार्टअप मिशन पोर्टल' का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के 107 उभरते हुए स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये और 9 प्रमुख इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए, साथ ही 12 नए इनक्यूबेटर्स को आधिकारिक मान्यता प्रमाण पत्र भी सौंपे।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास दुनिया की सबसे बड़ी, सबसे प्रतिभाशाली और ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स मौजूद है। उन्होंने कहा कि अक्सर विदेशी राजदूत, उच्चायुक्त और वैश्विक निवेशक उनसे पूछते हैं कि 25 करोड़ से अधिक की विशाल आबादी क्या सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती नहीं है? इसके उत्तर में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिसे पूर्ववर्ती सरकारों या आलोचकों द्वारा एक भारी बोझ और चुनौती माना जाता था, वर्तमान सरकार उसे 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) और एक असीम संभावना के रूप में देखती है। सरकार का मुख्य दायित्व केवल इस विशाल युवा शक्ति को सही मार्गदर्शन, वित्तीय प्रोत्साहन, अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, जिसके दम पर उत्तर प्रदेश के युवा आज वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
120 से 24 हजार स्टार्टअप्स और 8 यूनिकॉर्न: यूपी के इकोसिस्टम की अभूतपूर्व छलांग
मुख्यमंत्री ने भारत और उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान आए युगांतरकारी बदलावों का विस्तृत तुलनात्मक ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले पूरे भारत में मात्र 500 स्टार्टअप्स संचालित हो रहे थे, जबकि आज देश में ढाई लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। ठीक इसी प्रकार, वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स की कुल संख्या महज 120 थी, जो आज बढ़कर 24 हजार से अधिक के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि आज उत्तर प्रदेश की धरती से 8 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स खड़े हो चुके हैं, जो राज्य के युवाओं की उद्यमशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगभग छठा भाग (1/6) है, जबकि देश के कुल स्टार्टअप्स में वर्तमान में प्रदेश की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत (1/10) है। सरकार का आगामी संकल्प इस हिस्सेदारी को बहुत जल्द दोगुना करते हुए 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जिस गति से प्रदेश में नवाचार, टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, आने वाले वर्षों में देश का हर पांचवां स्टार्टअप उत्तर प्रदेश के युवाओं द्वारा संचालित होगा।
अकादमिक संस्थानों से समन्वय और आधी आबादी का नेतृत्व: जमीन पर उतरा 'फंड ऑफ फंड्स' का मॉडल
राज्य में स्टार्टअप्स को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए सरकार ने देश के शीर्ष तकनीकी और प्रबंधन संस्थानों को सीधे इस अभियान से जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), ट्रिपल आईटी (IIIT) प्रयागराज, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) और भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) लखनऊ से आने वाले हर इनोवेटिव रिसर्च और बिजनेस प्रपोजल को सरकार बिना किसी देरी के वित्तीय सहयोग और सीड फंडिंग मुहैया करा रही है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के साथ मिलकर 'फंड ऑफ फंड्स' की विशेष व्यवस्था लागू की है, जिससे नए उद्यमियों को शुरुआती पूंजी जुटाने में किसी भी प्रकार की वित्तीय बाधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि उत्तर प्रदेश में संचालित हो रहे कुल स्टार्टअप्स में से लगभग 50 प्रतिशत यानी आधे स्टार्टअप्स का कुशल नेतृत्व और संचालन 'आधी आबादी' यानी महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण का सबसे जीवंत उदाहरण है।
'बीमारू राज्य' की पुरानी छवि ध्वस्त: बॉटम-3 से टॉप-3 इकॉनमी का सफर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की बदहाल स्थिति को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान टूटी-फूटी गड्ढायुक्त सड़कों, बिजली के घोर अभाव और अंधेरे से की जाती थी। पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव और सांप्रदायिक दंगे होना आम बात थी, जिसके चलते स्कूल-कॉलेज और व्यापारिक बाजार महीनों बंद रहते थे और आम नागरिक भय व कर्फ्यू के साये में जीने को विवश था। उस दौर में पांच वर्षों के भीतर 700 से अधिक बड़े दंगे हुए थे, जिसके कारण प्रदेश के भीतर शिक्षा, रोजगार, नवाचार और इनक्यूबेशन सेंटर जैसी प्रगतिशील बातों की चर्चा करना भी केवल एक दिवास्वप्न लगता था।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और पारदर्शी नीतियों के चलते पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश 'बीमारू राज्य' की श्रेणी से बाहर निकलकर देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। इस दौरान प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार, प्रति व्यक्ति आय, महिला वर्कफोर्स की भागीदारी और भारी उद्योगों की संख्या में तीन गुने से अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
नवाचार और विनिर्माण का वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद युवा उद्यमियों को आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में हर संभव नीतिगत और वित्तीय सहयोग जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, सेमीकंडक्टर नीतियां, डाटा सेंटर पार्क्स और लखनऊ में प्रस्तावित देश की पहली एआई सिटी (AI City) जैसे प्रोजेक्ट्स प्रदेश के स्टार्टअप्स को एक अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और विशाल घरेलू बाजार उपलब्ध कराएंगे।
'स्टार्टअप नीति-2026' के माध्यम से राज्य सरकार ने पेटेंट फाइलिंग, इनक्यूबेशन सपोर्ट, लीज रेंटल सब्सिडी और मेंटरशिप के नियमों को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी मांगने वाले न बनें, बल्कि अपनी प्रतिभा और नवाचार के दम पर लाखों अन्य युवाओं को रोजगार देने वाले 'जॉब क्रिएटर' बनकर नए भारत के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दें।