सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम लिखी भावुक पाती: बोले- 'श्रीकृष्ण के निष्काम कर्म और धर्म के संदेश को जीवन में उतारें'
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर समूचे प्रदेश और देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस पावन पर्व पर जनता के नाम एक विशेष पाती (पत्र) प्रेषित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, उनकी लीलाओं और श्रीमद्भगवद्गीता के अमर संदेश को आत्मसात करने का भावुक आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव जाति को धर्म, सत्य, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में स्पष्ट किया कि श्रीकृष्ण का प्राकट्य अधर्म, अत्याचार और अन्याय के अंधकार को मिटाकर ज्ञान, प्रेम और न्याय का प्रकाश फैलाने के लिए हुआ था। वर्तमान दौर में जब समाज विभिन्न प्रकार की नैतिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में भगवान श्रीकृष्ण का जीवन पथ और उनका दिव्य कर्मयोग प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण एवं समाज कल्याण के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करने की शक्ति प्रदान करता है।
सीएम योगी की पाती में क्या है खास? गीता के कर्मयोग का दिया मंत्र
मुख्यमंत्री द्वारा लिखी गई पाती केवल एक पारंपरिक शुभकामना संदेश नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के मूल्यों और आधुनिक जीवन की जिम्मेदारियों के समन्वय का एक उत्कृष्ट दस्तावेज है। मुख्यमंत्री ने पाती में उल्लेख किया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अर्जुन को जो गीता का उपदेश दिया था, वह किसी कालखंड विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि वह शाश्वत और सार्वभौमिक है।
सीएम योगी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य पथ पर निरंतर अग्रसर रहने के 'निष्काम कर्म' के सिद्धांत को अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सेवाभाव से करता है, तभी एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित समाज का निर्माण संभव हो पाता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र से नेतृत्व कौशल, प्रतिकूल परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने की कला और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सहायता करने का संकल्प लें।
मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अभूतपूर्व छटा और सुरक्षा चाक-चौबंद
कान्हा की पावन जन्मस्थली मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव और बरसाना सहित पूरे ब्रजमंडल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास अपने चरम पर है। देश और दुनिया के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु आराध्य के जन्मोत्सव का साक्षी बनने के लिए मथुरा पहुंच रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और इस्कॉन मंदिर को अलौकिक रूप से सजाया गया है। पूरे ब्रज क्षेत्र में 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' और 'राधे-राधे' के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा एवं सुविधा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। मथुरा-वृंदावन को अलग-अलग सुरक्षा जोन और सेक्टरों में विभाजित किया गया है। संवेदनशील स्थलों पर एटीएस, कमांडो, ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी नेटवर्क के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए विशेष इलेक्ट्रिक बसें, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और खोया-पाया केंद्र स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो और संपूर्ण आयोजन दिव्यता व भव्यता के साथ संपन्न कराया जाए।
आधुनिक जीवन और सुशासन में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं की प्रासंगिकता
भगवान श्रीकृष्ण का संदेश केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन, जनसेवा और विधि के शासन का भी मूल आधार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सदा समाज को भयमुक्त और मर्यादित बनाने का कार्य किया। उन्होंने दुर्जनों का दलन कर सज्जनों का परित्राण किया, जो किसी भी लोक कल्याणकारी व्यवस्था का परम लक्ष्य होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में आज जिस प्रकार सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में कार्य हो रहा है, उसमें कहीं न कहीं भारतीय सनातन संस्कृति के उन लोक-कल्याणकारी मूल्यों का समावेश दिखाई देता है जिनकी नींव श्रीकृष्ण ने रखी थी। महिलाओं की सुरक्षा, वंचितों का सशक्तिकरण और युवाओं को अवसर प्रदान करना आधुनिक समाज में धर्म की स्थापना के समान है। श्रीकृष्ण की जीवन दृष्टि हमें सिखाती है कि शांति की स्थापना के लिए साहस और शक्ति का होना अनिवार्य है।
पूरे उत्तर प्रदेश में हर्षोल्लास, मंदिरों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
राजधानी लखनऊ से लेकर गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, कानपुर, मेरठ, बरेली और झांसी तक पूरे प्रदेश में जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जा रहा है। पुलिस थानों, रिजर्व पुलिस लाइनों और कारागारों में भी जन्माष्टमी के परंपरागत उत्सव आयोजित किए जा रहे हैं, जहां झांकियां और भजन संध्याएं विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
गोरखनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में भी बाल गोपाल के प्राकट्योत्सव की विशेष तैयारियां की गई हैं। मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में कान्हा के अभिषेक, महाआरती और माखन-मिश्री के प्रसाद वितरण के साथ समूचा प्रदेश भक्ति रस में डूब गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रदेश के समस्त नागरिकों के सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और उत्तर प्रदेश के निरंतर विकास की मंगल कामना की है।