BLA के बाद अब TTP ने बलूचिस्तान में मचाया कत्लेआम: जियारत क्रॉस पर सुरक्षाबलों के काफिले पर घातक हमला
अशांत और रणनीतिक रूप से संवेदनशील बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षाबलों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूच अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा हाल ही में चलाए गए भीषण सैन्य अभियानों के बाद अब प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने बलूचिस्तान में खूनी खेल शुरू कर दिया है।
क्वेटा के निकट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जियारत क्रॉस के पास आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के एक गश्ती काफिले को निशाना बनाते हुए भीषण घात लगाकर हमला (Ambush) किया। इस हमले में फ्रंटियर कोर (FC) और सेना के 5 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 7 अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब सुरक्षाबलों का वाहन नियमित गश्त पर था। आतंकवादियों ने पहले सड़क किनारे छुपाकर रखे गए शक्तिशाली आईईडी (Improvised Explosive Device) में रिमोट कंट्रोल से विस्फोट किया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि सुरक्षाबलों का मुख्य वाहन हवा में उछलकर सड़क से कई मीटर दूर जा गिरा। इसके तुरंत बाद आसपास की पहाड़ियों में पहले से घात लगाकर बैठे भारी हथियारों से लैस टीटीपी के आतंकियों ने घिरे हुए जवानों पर स्वचालित हथियारों और रॉकेट चालित ग्रेनेडों (RPG) से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
बलूचिस्तान में दोहरा संकट: BLA के बाद TTP ने खोला नया खूनी मोर्चा
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बल पहले से ही दक्षिणी और मध्य बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के अभूतपूर्व और समन्वित हमलों से निपटने में जूझ रहे हैं। बीएलए द्वारा राजमार्गों को बंद करने, सैन्य छावनियों पर फिदायीन हमले करने और संवेदनशील बुनियादी ढांचों को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद टीटीपी की इस सक्रियता ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र के होश उड़ा दिए हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान अब दोहरे सशस्त्र विद्रोह के चक्रव्यूह में फंस चुका है। एक तरफ दक्षिण, तटीय मकरान और कलात संभाग में राष्ट्रवादी बलूच विद्रोही समूह (जैसे BLA और BLF) पाकिस्तानी राज्यसत्ता के खिलाफ खुला युद्ध लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर के पश्तून बहुल इलाकों में टीटीपी अपनी जड़ें गहरी कर रहा है। यद्यपि दोनों संगठनों की मूल विचारधाराएं बिल्कुल अलग हैं—जहां बीएलए एक धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी स्वतंत्रता की लड़ाई का दावा करता है, वहीं टीटीपी शरीयत आधारित इस्लामी कट्टरपंथी एजेंडे पर चलता है—लेकिन दोनों का साझा दुश्मन रावलपिंडी का सैन्य मुख्यालय और पाकिस्तानी सुरक्षा बल हैं।
पश्तून बेल्ट में TTP की घुसपैठ और पाकिस्तान सेना की रणनीति पर सवाल
जियारत क्रॉस और उसके आसपास का क्षेत्र मुख्य रूप से बलूचिस्तान के पश्तून बेल्ट और क्वेटा-चमन कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से टीटीपी की गतिविधियां खैबर पख्तूनख्वा (KP) के कबायली जिलों तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संगठन ने बलूचिस्तान के उत्तरी जिलों जैसे झोब, पशिन, चमन और किला अब्दुल्ला में अपने लड़ाकों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया है।
टीटीपी द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए जारी किए गए बयान से साफ है कि संगठन अब बलूचिस्तान के भीतर सैन्य प्रतिष्ठानों पर बड़े हमलों की क्षमता हासिल कर चुका है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना का ध्यान इस समय बलूच विद्रोहियों को दबाने में लगा हुआ था, जिसका सीधा फायदा उठाते हुए टीटीपी ने सुरक्षा में आई इस रणनीतिक चूक का लाभ उठाया और सुरक्षाबलों को भारी नुकसान पहुंचाया।
हमले का तरीका और घायलों की हालत: अस्पताल में इमरजेंसी लागू
धमाके और गोलीबारी की भीषण आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। मुठभेड़ की सूचना मिलते ही पास की छावनी से भारी संख्या में सेना, आतंकवाद निरोधी बल (CTD) और फ्रंटियर कोर के अतिरिक्त दस्ते बख्तरबंद गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, भारी गोलीबारी के बाद हमलावर पास के बीहड़ और पथरीले पहाड़ी रास्तों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
सुरक्षाबलों ने तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली और हेलिकॉप्टरों की मदद से हताहतों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। गंभीर रूप से घायल 7 सैनिकों को तत्काल क्वेटा के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) में एयरलिफ्ट कराया गया, जहां डॉक्टरों ने कई जवानों की हालत बेहद नाजुक बताई है। अस्पताल प्रशासन ने आपातकाल (Emergency) घोषित करते हुए नागरिकों से रक्तदान की अपील की है। इलाके में आतंकवादियों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
CPEC और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराता संकट: दोहरे मोर्चे पर घिरी सेना
बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति का इस कदर बिगड़ना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। ग्वादर पोर्ट से लेकर क्वेटा तक के रणनीतिक रास्तों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण विदेशी निवेश और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना अब एक साथ कई आंतरिक मोर्चों पर उलझ चुकी है। खैबर पख्तूनख्वा में रोजाना होने वाले हमले, बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों का तीव्र होता प्रतिरोध, और अब उसी बलूचिस्तान में टीटीपी का सैन्य काफिलों को निशाना बनाना—यह दर्शाता है कि देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे पर सेना का नियंत्रण तेजी से कमजोर हो रहा है। संसाधनों की भारी कमी और राजनीतिक अस्थिरता के बीच पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए इन अलग-अलग आतंकी नेटवर्कों को एक साथ ट्रैक करना असंभव सा साबित हो रहा है।
सीमा पार तनाव और बलूचिस्तान में अनिश्चितता का माहौल
इस हमले के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच पहले से जारी कूटनीतिक तनाव और अधिक गहराने की संभावना है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि टीटीपी का शीर्ष नेतृत्व अफगान धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के भीतर आतंकी हमलों की साजिश रचता है। हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
जियारत क्रॉस पर हुए इस हमले ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाले दिनों में बलूचिस्तान में हिंसा और अस्थिरता का दौर और अधिक उग्र हो सकता है। जब तक राज्यसत्ता बलूचिस्तान के मूल राजनीतिक, आर्थिक और मानवाधिकार मुद्दों को हल करने के बजाय केवल बल प्रयोग पर निर्भर रहेगी, तब तक विद्रोही और आतंकवादी संगठन सुरक्षा बलों को इसी तरह निशाना बनाते रहेंगे।