अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच किर्गिस्तान में ईरानी राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी: नाविकों की सुरक्षा और शांति का दिया संदेश, आज शाम रूसी राष्ट्रपति पुतिन संग होगी महा-बैठक

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच किर्गिस्तान में ईरानी राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी: नाविकों की सुरक्षा और शांति का दिया संदेश, आज शाम रूसी राष्ट्रपति पुतिन संग होगी महा-बैठक

मध्य एशिया के देश किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मंच से एक बड़ी वैश्विक कूटनीतिक तस्वीर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पश्चिम एशिया में दोबारा भड़के भीषण सैन्य टकराव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच यह आमने-सामने की पहली प्रत्यक्ष बैठक है, जिस पर पूरी दुनिया की महाशक्तियों और राजनयिक हलकों की नजरें टिकी हुई थीं।

बिश्केक में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और प्रतिनिधिमंडल स्तर की विस्तृत बातचीत की। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ईरान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने और आने वाले समय में अपने द्विपक्षीय व्यापार बास्केट का विस्तार व विविधीकरण (Expand & Diversify) करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पश्चिम एशिया में युद्ध पर भारत का स्पष्ट रुख: 'कूटनीति और संवाद ही समाधान, निर्दोषों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि'

बैठक का सबसे संवेदनशील और अहम मुद्दा पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध और समुद्री सुरक्षा रहा। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे सैन्य तनाव और हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की। पीएम मोदी ने भारत के सुसंगत और सैद्धांतिक रुख को दोहराते हुए कहा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, और सभी विवादों का निपटारा केवल कूटनीति, संयम और प्रत्यक्ष संवाद (Dialogue & Diplomacy) के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।

भारत ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Shipping) और भारतीय नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा का मुद्दा बेहद मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजरानी की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) और व्यापारिक गलियारों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आह्वान किया कि किसी भी परिस्थिति में निर्दोष नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे, व्यापारिक जहाजों और समुद्र में कार्यरत नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत का यह संदेश इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय मर्चेंट नेवी कर्मी कार्यरत हैं और भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

द्विपक्षीय व्यापार विस्तार और चाबहार पोर्ट पर जोर: प्रतिबंधों के बीच नई रणनीति

अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में घोषित 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और ईरान पर लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों के साए में हुई इस बैठक में भारत-ईरान आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा देने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने फार्मास्युटिकल, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं तकनीकी और ऊर्जा क्षेत्र में व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करता है। पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक समृद्धि के लिए चाबहार का निर्बाध संचालन दोनों देशों के साझा हितों के अनुकूल है। इसके साथ ही, भारत ने ईरान को आगामी ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलनों में एक सक्रिय सदस्य के रूप में पूर्ण सहयोग देने की बात कही और पेजेशकियन को भारत आने का निमंत्रण भी दोहराया।

शांति के लिए ईरान ने भारत से मांगी मदद: पेजेशकियन ने की कूटनीतिक पहल की अपील

ईरानी मीडिया और सरकारी रीडआउट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के साथ अपने प्राचीन संबंधों की सराहना की और युद्ध के इस कठिन दौर में भारत द्वारा दिखाए गए संतुलित रुख के लिए धन्यवाद दिया। पेजेशकियन ने कहा कि ईरान युद्ध का विस्तार नहीं चाहता, बल्कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

ईरानी राष्ट्रपति ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, मजबूत अर्थव्यवस्था और सभी पक्षों (अमेरिका, इजरायल, अरब देशों और खाड़ी राष्ट्रों) के साथ संतुलित संबंधों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि भारत अपनी कूटनीतिक क्षमताओं का उपयोग करे। उन्होंने अपील की कि भारत प्रमुख वैश्विक शक्तियों को बातचीत की मेज पर लाने और इस विनाशकारी रक्तपात को रोकने में एक मध्यस्थ व शांतिदूत की भूमिका निभाए। पेजेशकियन ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष सैन्य बल प्रयोग के बजाय कूटनीतिक तंत्र का सम्मान करें।

आज शाम व्लादिमीर पुतिन के साथ महा-बैठक: ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक समीकरण

ईरानी राष्ट्रपति के साथ बैठक संपन्न करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करने जा रहे हैं। बिश्केक के इसी शिखर सम्मेलन के इतर होने वाली मोदी-पुतिन वार्ता पर पश्चिमी देशों से लेकर एशियाई रणनीतिकारों की गहरी नजर बनी हुई है।

इस महा-बैठक में भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी, द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) के उपयोग, रियायती कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति, रक्षा उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स और असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, दोनों नेता यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान, पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर और ब्रिक्स संगठन के विस्तार व सुदृढ़ीकरण पर भी साझा रणनीति बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी का यह बैक-टू-बैक कूटनीतिक संवाद यह साबित करता है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत शांति और स्थिरता की धुरी बनकर उभर रहा है।

बहुध्रुवीय विश्व में भारत की कूटनीतिक धुरी: रणनीतिक स्वायत्तता की सबसे बड़ी मिसाल

वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये बैठकें भारत की स्वतंत्र और संप्रभु विदेश नीति (Strategic Autonomy) का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण हैं। एक तरफ जहां भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ 'क्वाड' और तकनीकी साझेदारियों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह ईरान और रूस जैसे पारंपरिक मित्रों के साथ अपने संबंधों में तनिक भी झिझक नहीं दिखा रहा है।

भारत की नीति स्पष्ट है—राष्ट्रहित सर्वोपरि है और ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता तथा विदेशों में बसे भारतीय नागरिकों की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति से सीधी बातचीत और उसके बाद राष्ट्रपति पुतिन से होने वाला संवाद दुनिया को यह साफ संदेश दे रहा है कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय 'विश्वबंधु' के रूप में सभी पक्षों को शांति, संवाद और विकास के रास्ते पर लाने की क्षमता रखता है।

Latest Posts