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राम मंदिर ट्रस्ट में महाभूकंप: चोरी कांड और दो दिग्गजों के इस्तीफे के बाद अब पूरी तरह बदलेगी अयोध्या की तस्वीर!

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसके बाद पूरे ट्रस्ट के कायाकल्प की तैयारी शुरू हो गई है। आरोपियों के सलाखों के पीछे पहुंचने और ट्रस्ट के दो सबसे मजबूत स्तंभों के अचानक इस्तीफे के बाद अब अयोध्या में प्रशासनिक स्तर पर एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में आग में घी का काम किया है, जिसके बाद केंद्र सरकार से लेकर पीएमओ तक एक्शन मोड में आ गए हैं।

एसआईटी की रिपोर्ट से हड़कंप, अब IAS अधिकारी संभालेगा राम मंदिर की कमान!

इस पूरे विवाद के बीच विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि मंदिर की व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट का पुनर्गठन बेहद जरूरी है। इसके साथ ही एक बड़ी सिफारिश यह की गई है कि अब किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात किया जाए, ताकि वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

पीएमओ के निर्देश पर चंपतराय और अनिल मिश्र का इस्तीफा, 11 जुलाई की बैठक में मचेगा तहलका

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर ट्रस्ट के आंतरिक ढांचे पर पड़ा है। लगातार लग रहे आरोपों, मीडिया के भारी दबाव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) व विश्व हिंदू परिषद (VHP) की नाराजगी के बाद आखिरकार एक बड़ा कदम उठाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सीधे निर्देश पर ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है।

इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने सार्वजनिक रूप से की है। उन्होंने बताया कि आगामी 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक होने वाली है, क्योंकि इसी बैठक में इन दोनों बड़े इस्तीफों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेश लौटते ही इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

रेस में आगे आए ये दो बड़े नाम, लेकिन बदलना होगा ट्रस्ट का संविधान

ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस रेस में प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले से ही चल रहा था, लेकिन अब एक नए नाम की एंट्री ने सबको चौंका दिया है। साल 2005 बैच के आईएएस अधिकारी और अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का नाम इस पद के लिए सबसे प्रमुखता से उभरा है। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य लोकसेवा अधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

हालांकि, आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाने की राह में एक बड़ा तकनीकी पेंच फंसा हुआ है। वर्तमान में राम मंदिर ट्रस्ट की नियमावली (बायलाज) में ‘सीईओ’ जैसे किसी पद का कोई प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में 11 जुलाई की बैठक में सबसे पहले ट्रस्ट के संविधान (उपविधि) में बड़ा संशोधन करना होगा।

खाली हुए कई अहम पद, नई ऊर्जा के साथ सामने आएगा नया ट्रस्ट

अगर 11 जुलाई को चंपतराय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो ट्रस्ट में अचानक तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएंगे। दरअसल, अयोध्या राज परिवार के मुखिया बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद से एक पद पहले से ही रिक्त चल रहा है। इसके अलावा, ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास और वरिष्ठ सदस्य के. परासरण जैसे दिग्गज बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से अब जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं रह पा रहे हैं और बैठकों में भी केवल ऑनलाइन ही हिस्सा लेते हैं। ऐसे में पारदर्शिता लाने और राम मंदिर के बचे हुए कार्यों को नई ऊर्जा के साथ तेजी से पूरा करने के लिए ट्रस्ट में युवा और सक्रिय चेहरों को शामिल कर एक बिल्कुल नए और मजबूत संगठन को तैयार करने की कवायद तेज हो गई है।