बिल्डर को मिला सख्त सबक: पजेशन अटकाया तो कंज्यूमर कोर्ट ने ठोका डंडा, बायर को ब्याज और मुआवजे सहित वापस दिलाए ₹14 लाख

बिल्डर को मिला सख्त सबक: पजेशन अटकाया तो कंज्यूमर कोर्ट ने ठोका डंडा, बायर को ब्याज और मुआवजे सहित वापस दिलाए ₹14 लाख

घर खरीदने का सपना देख रहे आम खरीदारों (Homebuyers) को वर्षों तक फ्लैट के पजेशन के लिए भटकाने वाले लापरवाह बिल्डरों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया है। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में तय अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन कर फ्लैट देने में देरी करने वाले एक प्रमोटर को अदालत ने सख्त सबक सिखाया है।

अदालत ने पीड़ित होमबायर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिल्डर को आदेश दिया कि वह खरीदार द्वारा जमा की गई लगभग ₹14 लाख की पूरी राशि 9 से 12 प्रतिशत तक के वार्षिक साधारण ब्याज (Simple Interest) के साथ लौटाए। इसके साथ ही, सालों तक घर के लिए दर-दर भटकने और मानसिक तनाव झेलने के एवज में भारी मुआवजा और कानूनी लड़ाई के खर्च का भुगतान करने का भी आदेश जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला? जानिए कैसे ठगा गया घर खरीदार

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित खरीदार ने अपने सपनों का आशियाना बनाने के लिए बिल्डर के हाउसिंग प्रोजेक्ट में एक रेजिडेंशियल फ्लैट बुक कराया था:

  • समय सीमा का वादा: अनुबंध (Builder-Buyer Agreement) के मुताबिक, बिल्डर को फ्लैट की बुकिंग और पहली किस्तों के भुगतान के बाद निर्धारित 36 से 42 महीनों के भीतर फ्लैट का वैध कब्जा (Possession) सौंपना था।

  • किस्तें पूरी, निर्माण अधूरा: खरीदार ने अपनी खून-पसीने की कमाई और होम लोन के जरिए बिल्डर को कुल ₹14 लाख से अधिक का भुगतान तय समय पर कर दिया।

  • सालों की हीलाहवाली: तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी साइट पर निर्माण कार्य कछुआ चाल से चलता रहा। जब खरीदार ने कब्जा मांगा, तो बिल्डर कभी लेबर की कमी, कभी मटेरियल की महंगाई तो कभी सरकारी मंजूरियों में देरी जैसे खोखले बहाने बनाकर पजेशन की तारीख लगातार आगे बढ़ाता रहा।

  • रिफंड से इनकार: परेशान होकर जब बायर ने प्रोजेक्ट से बाहर निकलने और अपनी जमा पूंजी वापस (Refund) मांगी, तो बिल्डर ने कैंसलेशन चार्ज और मनमाने नियम दिखाकर पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया।

कोर्ट ने लगाई बिल्डर को फटकार: 'अनुबंध केवल खरीदार को बांधने के लिए नहीं'

बिल्डर के अड़ियल रवैये से थक-हारकर पीड़ित ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने बिल्डर के तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए सख्त टिप्पणियां कीं:

  • अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice): कोर्ट ने कहा कि खरीदार से पूरी रकम वसूलने के बाद अनिश्चित काल तक फ्लैट का पजेशन लटकाए रखना सेवाओं में गंभीर कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट उदाहरण है।

  • एकतरफा अनुबंध अवैध: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि कोई भी बिल्डर खरीदार को अपने पैसे की डिलीवरी के बिना वर्षों तक इंतजार करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

  • ब्याज सहित रिफंड का आदेश: अदालत ने बिल्डर को निर्देश दिया कि वह आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर बायर को पूरी ₹14 लाख की मूल राशि, भुगतान की तारीख से लेकर रिफंड की तारीख तक के ब्याज सहित अदा करे।

  • मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना: समय पर घर न मिलने के कारण मानसिक तनाव, किराए के मकान में रहने का अतिरिक्त बोझ और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए अतिरिक्त हर्जाना भी बिल्डर पर लगाया गया। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो ब्याज दर में अतिरिक्त बढ़ोतरी और संपत्ति कुर्की के निर्देश दिए गए हैं।

फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी सीख: बिल्डर सताए तो क्या करें?

उपभोक्ता आयोग का यह फैसला उन हजारों घर खरीदारों के लिए एक मजबूत नजीर है जो पजेशन के नाम पर बिल्डरों के झांसे में फंसे हुए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई बिल्डर समय पर घर नहीं दे रहा है, तो खरीदारों के पास कई कानूनी रास्ते मौजूद हैं:

  • कंज्यूमर कोर्ट (Consumer Commission): सेवा में कमी और रिफंड व मुआवजे के लिए जिला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

  • रेरा (RERA - Real Estate Regulatory Authority): रेरा एक्ट की धारा 18 के तहत यदि प्रमोटर तय तिथि पर पजेशन देने में विफल रहता है, तो आवंटी को अपनी पूरी राशि ब्याज सहित वापस लेने या पजेशन मिलने तक हर महीने विलंब ब्याज (Delay Interest) पाने का कानूनी अधिकार है।

  • दस्तावेज सुरक्षित रखें: बिल्डर के साथ किए गए एग्रीमेंट, भुगतान की रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और पजेशन को लेकर हुए ई-मेल या पत्राचार को संभाल कर रखें, जो अदालत में सबसे पुख्ता सबूत बनते हैं।

अदालत के इस कड़े आदेश ने साफ कर दिया है कि बिल्डर अब खरीदारों को कमजोर समझने की भूल न करें; समय पर फ्लैट नहीं दिया तो न सिर्फ पूरी रकम ब्याज सहित लौटानी होगी, बल्कि कोर्ट का भारी जुर्माना भी भुगतना पड़ेगा।

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