क्या दिल्ली में जो बिल्डिंग गिरी, वो डीयू का हॉस्टल है? वायरल दावे का सच, जानिए फैक्ट चेक में क्या निकला

क्या दिल्ली में जो बिल्डिंग गिरी, वो डीयू का हॉस्टल है? वायरल दावे का सच, जानिए फैक्ट चेक में क्या निकला

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बहुमंजिला इमारत के ताश के पत्तों की तरह ढहने का एक खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स—एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। धूल के विशाल गुबार और मलबे में तब्दील होती इस इमारत के वीडियो को साझा करते हुए कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) का एक हॉस्टल था, जो अचानक भरभराकर गिर गया और इसके मलबे में कई छात्र दब गए हैं। इस दावे के सामने आते ही डीयू के छात्रों, वहां रहने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों और आम जनता के बीच भारी दहशत और चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, जब इस वायरल वीडियो और दावे की गहन पड़ताल और फैक्ट चेक किया गया, तो सामने आया कि यह दावा पूरी तरह से फर्जी, भ्रामक और निराधार है।

वायरल दावा क्या है?

सोशल मीडिया पर 30 से 45 सेकंड के एक वीडियो क्लिप को अलग-अलग कैप्शन के साथ व्यापक स्तर पर शेयर किया जा रहा है:

  • दावा: यूजर्स लिख रहे हैं—"दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) का हॉस्टल अचानक भरभराकर गिरा, अंदर कई छात्रों के दबे होने की आशंका। प्रशासन की लापरवाही आई सामने।"

  • वीडियो में क्या दिख रहा है: वीडियो में एक 4 से 5 मंजिला पुरानी इमारत देखते ही देखते एक तरफ झुकती है और चंद सेकंडों में भारी धूल के गुबार के साथ जमींदोज हो जाती है, जबकि आसपास खड़े लोग दहशत में भागते और चिल्लाते नजर आ रहे हैं।

फैक्ट चेक में क्या सच आया सामने?

जब इस वीडियो की मुख्य की-फ्रेम्स (Key-frames) को रिवर्स इमेज सर्च और दिल्ली पुलिस व स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक बयानों से मिलाया गया, तो सच्चाई कुछ और ही निकली:

  • डीयू का हॉस्टल नहीं है यह इमारत: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन और छात्र कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि उनके किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपस के किसी हॉस्टल की इमारत में ऐसी कोई दुर्घटना नहीं हुई है। डीयू के सभी हॉस्टल पूरी तरह सुरक्षित हैं।

  • निजी पुरानी रिहायशी/व्यावसायिक इमारत: जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो दिल्ली के एक घनी आबादी वाले इलाके (पुरानी दिल्ली/सब्जी मंडी या उत्तरी दिल्ली क्षेत्र) में स्थित एक बेहद पुरानी, जर्जर और खाली कराई जा चुकी निजी इमारत के ढहने का है।

  • पहले ही खाली करा ली गई थी बिल्डिंग: स्थानीय नगर निगम (MCD) और पुलिस प्रशासन के अनुसार, इमारत की हालत पहले से ही बेहद खस्ताहाल थी और उसमें दरारें आ चुकी थीं। खतरे को भांपते हुए हादसे से पहले ही आसपास के लोगों और उस इमारत में रहने वालों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

  • कोई हताहत नहीं: चूंकि इमारत को समय रहते खाली करा लिया गया था, इसलिए इस हादसे में किसी भी छात्र या नागरिक के हताहत होने या मलबे में दबने की खबर पूरी तरह झूठी साबित हुई।

सनसनी फैलाने के लिए क्यों जोड़ा गया 'डीयू हॉस्टल' का नाम?

फैक्ट चेकर्स और साइबर सेल के जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर व्यूज, रीच और सनसनी बटोरने के लिए अक्सर स्थानीय हादसों के वीडियो को किसी प्रतिष्ठित संस्थान या छात्रों से जोड़ दिया जाता है:

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी एक ऐसा नाम है जिससे देश भर के लाखों परिवार और छात्र भावनात्मक व प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

  • जैसे ही किसी वीडियो के साथ 'हॉस्टल' और 'छात्र' शब्द जोड़ दिया जाता है, लोग बिना सोचे-समझे और बिना पुष्टि किए उसे पारिवारिक और छात्र समूहों में फॉरवर्ड करने लगते हैं, जिससे अफवाह जंगल की आग की तरह फैल जाती है।

निष्कर्ष: वायरल दावा पूरी तरह गलत

पड़ताल से यह पूरी तरह साबित होता है कि:

  1. दिल्ली में गिरी इमारत का दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) या उसके किसी भी हॉस्टल से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।

  2. यह एक पुरानी निजी इमारत थी जिसे खतरनाक घोषित किए जाने के बाद खाली कराया जा चुका था।

  3. सोशल मीडिया पर छात्रों के मलबे में दबे होने की बात पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठी है।

दिल्ली पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता से अपील की है कि वे इस तरह के असत्यापित वीडियो को शेयर करने से बचें और किसी भी आपदा या दुर्घटना की सूचना केवल आधिकारिक प्रशासनिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।

Latest Posts