नौकरी गई तो कंपनी से मिले पैसे पर लगेगा टैक्स? जानिए सेवरेंस पैकेज का पूरा नियम और टैक्स छूट के कानूनी प्रावधान

नौकरी गई तो कंपनी से मिले पैसे पर लगेगा टैक्स? जानिए सेवरेंस पैकेज का पूरा नियम और टैक्स छूट के कानूनी प्रावधान

वैश्विक मंदी की आहट, कंपनियों में पुनर्गठन (Restructuring) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के चलते जब भी किसी कर्मचारी की नौकरी जाती है, तो कंपनी आम तौर पर उसे एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसे वित्तीय और कानूनी भाषा में सेवरेंस पैकेज (Severance Package) कहा जाता है। नौकरी जाने का भावनात्मक झटका तो अपनी जगह होता ही है, लेकिन कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह खड़ी हो जाती है कि क्या संकट के समय मिले इस पैसे पर भी भारत सरकार टैक्स वसूलेगी? भारतीय आयकर कानून (Income Tax Act) के अनुसार, सेवरेंस पैकेज में मिलने वाला हर घटक एक जैसा नहीं होता। इसमें कुछ घटकों पर पूरी तरह टैक्स छूट (Tax Exemption) मिलती है, जबकि कुछ हिस्सों को सामान्य वेतन मानकर लागू स्लैब रेट पर टैक्स काटा जाता है।

सेवरेंस पैकेज में क्या-क्या शामिल होता है?

आमतौर पर किसी कर्मचारी को नौकरी से अलग किए जाने पर उसके फाइनल सेटलमेंट (Full & Final Settlement) में ये घटक शामिल होते हैं:

  1. नोटिस पे (Notice Period Pay): कंपनी द्वारा तुरंत सेवा समाप्त किए जाने पर नोटिस पीरियड के बदले दी जाने वाली सैलरी।

  2. छंटनी मुआवजा (Retrenchment Compensation): सेवा समाप्त होने के ऐवज में मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि।

  3. ग्रेच्युटी (Gratuity): 5 साल या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी करने पर देय राशि।

  4. लीव इनकैशमेंट (Leave Encashment): बची हुई छुट्टियों के बदले मिलने वाला नकद भुगतान।

  5. प्रॉविडेंट फंड (PF) और अन्य भत्ते: कर्मचारी और नियोक्ता का संचित पीएफ अंशदान।

किस घटक पर कितनी मिलती है टैक्स छूट? जानिए कानूनी प्रावधान

आयकर नियमों के तहत सेवरेंस पैकेज के अलग-अलग हिस्सों पर कर राहत के स्पष्ट नियम तय किए गए हैं:

1. छंटनी मुआवजा (Section 10(10B))

यदि किसी कर्मचारी को औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (Industrial Disputes Act) के नियमों के तहत छंटनी का शिकार होना पड़ता है, तो धारा 10(10B) के तहत टैक्स छूट मिलती है।

  • छूट की सीमा: अधिनियम के फॉर्मूले के तहत निर्धारित राशि या अधिकतम ₹5,00,000 (5 लाख रुपये), दोनों में से जो भी कम हो, उस पर पूरी तरह से टैक्स छूट मिलती है। 5 लाख से अधिक की शेष राशि कर्मचारी की उस वित्त वर्ष की कुल आय में जुड़कर टैक्स स्लैब के तहत कर योग्य मानी जाती है।

2. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति / वीआरएस (Section 10(10C))

यदि कंपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS - Voluntary Retirement Scheme) या गोल्डन हैंडशेक के तहत कर्मचारियों को बाहर कर रही है:

  • धारा 10(10C) के तहत मिलने वाले मुआवजे पर अधिकतम ₹5,00,000 (5 लाख रुपये) तक की टैक्स छूट का लाभ मिलता है।

  • शर्त: यह छूट जीवन में केवल एक बार ही ली जा सकती है और कंपनी की वीआरएस योजना आयकर नियमों (नियम 2BA) के दिशानिर्देशों के अनुकूल होनी चाहिए।

3. ग्रेच्युटी (Gratuity - Section 10(10))

ग्रेच्युटी पर मिलने वाली टैक्स छूट कर्मचारी की श्रेणी पर निर्भर करती है:

  • गैर-सरकारी कर्मचारी: ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम के दायरे में आने वाले निजी कर्मचारियों के लिए जीवनभर की संचयी टैक्स छूट सीमा ₹20 लाख तय है। यदि पहले किसी पिछली नौकरी में ग्रेच्युटी छूट नहीं ली गई है, तो ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है।

4. लीव इनकैशमेंट (Section 10(10AA))

नौकरी छोड़ने या निकाले जाने के समय बची हुई अर्जित छुट्टियों (Earned Leaves) का इनकैशमेंट कराने पर:

  • निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर ₹25,00,000 (25 लाख रुपये) तक कर दिया है। 25 लाख तक की अर्जित छुट्टियों का नकद भुगतान पूरी तरह से कर-मुक्त होता है।

5. नोटिस पे और पीएफ निकासी का नियम

  • नोटिस पे (Notice Pay): नोटिस पीरियड के बदले मिलने वाला पैसा पूरी तरह कर योग्य (Taxable) होता है, क्योंकि इसे सामान्य वेतन (Salary in lieu of notice) की श्रेणी में गिना जाता है।

  • पीएफ (EPF): यदि कर्मचारी ने उस संस्थान में (या पिछली नौकरियों को मिलाकर) 5 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, तो निकाला गया ईपीएफ बैलेंस (ब्याज सहित) पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। 5 साल से कम सेवा पर पीएफ निकासी पर टैक्स और टीडीएस देय हो सकता है।

अचानक बढ़ा टैक्स स्लैब? 'सेक्शन 89' से पाएं बड़ी राहत

सेवरेंस पैकेज मिलने पर कर्मचारी की उस वर्ष की कुल आय अचानक बढ़ जाती है, जिससे वह 20% या 30% के ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में आयकर कानून की धारा 89 (Section 89) के तहत टैक्स रिलीफ का दावा किया जा सकता है।

  • फॉर्म 10E (Form 10E) भरना अनिवार्य: यदि आपको एकमुश्त मुआवजा (Arrears या Compensation in lieu of salary) मिलने से ज्यादा टैक्स देना पड़ रहा है, तो आप ऑनलाइन आयकर पोर्टल पर फॉर्म 10E भरकर टैक्स राहत का लाभ ले सकते हैं। यह नियम यह आकलन करता है कि यदि यह पैसा संबंधित वर्षों में सामान्य रूप से मिलता, तो कितना टैक्स बनता, और उसी आधार पर टैक्स देयता कम हो जाती है।

टीडीएस (TDS) कटौती और क्लेम की प्रक्रिया

कंपनी फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करते समय लागू टैक्स छूटों को घटाने के बाद बची हुई शुद्ध कर योग्य राशि पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) काटती है और यह आपके फॉर्म 16 व फॉर्म 26AS/AIS में दिखाई देता है। यदि आपकी कुल वार्षिक आय टैक्स छूट सीमा के भीतर है या कंपनी ने अधिक टीडीएस काट लिया है, तो आप वित्तीय वर्ष के अंत में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करके अतिरिक्त टैक्स का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।

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