जन्माष्टमी पर चांदी के तेवर पड़े नरम: लगातार 3 दिनों में 9,000 रुपये चढ़ने के बाद अचानक फिसली कीमतें, 2.36 लाख रुपये प्रति किलो पर आया भाव

जन्माष्टमी पर चांदी के तेवर पड़े नरम: लगातार 3 दिनों में 9,000 रुपये चढ़ने के बाद अचानक फिसली कीमतें, 2.36 लाख रुपये प्रति किलो पर आया भाव

देश भर में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरी श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन मौके पर जब मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप 'लड्डू गोपाल' के पूजन, अभिषेक और शृंगार की तैयारियां चरम पर हैं, तब सर्राफा बाजार से आभूषण खरीदारों, श्रद्धालुओं और निवेशकों के लिए एक अत्यंत राहत भरी खबर सामने आई है। आम तौर पर भारतीय परंपरा में यह देखा जाता है कि किसी भी प्रमुख त्योहार पर जब पूजा के बर्तनों, चांदी के सिक्कों, मूर्तियों और गहनों की खुदरा मांग तेज होती है, तो कीमती धातुओं के भाव आसमान छूने लगते हैं। हालांकि, इस बार जन्माष्टमी के दिन बाजार की चाल सामान्य धारणा के बिल्कुल विपरीत नजर आई और घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में सुस्ती दर्ज की गई।

सर्राफा बाजार में आज चांदी का भाव गिरकर 2,36,020 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करता हुआ देखा गया। राष्ट्रीय स्तर पर चांदी की दरों में प्रति किलोग्राम 52 रुपये की सांकेतिक नरमी आई है। यह गिरावट भले ही अंकों में बहुत विशाल न दिखे, लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक असर इसलिए बहुत बड़ा है क्योंकि इससे ठीक पहले के तीन कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में 9,000 रुपये प्रति किलोग्राम का तूफानी उछाल दर्ज किया गया था। जन्माष्टमी के दिन इस तेज रफ्तार पर ब्रेक लगने से उन सभी परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं जो कान्हा के लिए चांदी के झूले, छोटी बांसुरी, मुकुट, चरण पादुकाएं या फिर आगामी धनतेरस और वैवाहिक सीजन के लिए चांदी की खरीदारी की योजना बना रहे थे।

देश के प्रमुख शहरों में आज का चांदी का भाव: जानिए दिल्ली, यूपी, बिहार और मुंबई के ताजा आंकड़े

स्थानीय बुलियन डीलर्स और राज्य स्तरीय सर्राफा संघों द्वारा जारी किए गए ताजा हाजिर भावों के अनुसार, देश के विभिन्न महानगरों और राज्यों में चांदी की कीमतों में 52 रुपये से लेकर 273 रुपये प्रति किलोग्राम तक की नरमी दर्ज की गई है:

  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में 52 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई, जिसके बाद भाव 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। एक दिन पहले गुरुवार को चांदी 6,084 रुपये की भारी बढ़त के साथ 2.36 लाख रुपये के ऊपरी दायरे में बंद हुई थी। खुदरा काउंटर पर 10 ग्राम चांदी का भाव 2,360 रुपये और 100 ग्राम चांदी की कीमत 23,000 रुपये दर्ज की गई।

  • उत्तर प्रदेश (लखनऊ व कानपुर): यूपी की राजधानी लखनऊ में चांदी के भाव में प्रति किलोग्राम 200 रुपये की नरमी आई। इसके बाद यहां चांदी 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। कानपुर के थोक बाजार में भी इसी दायरे में सौदे होते देखे गए।

  • बिहार (पटना): बिहार की राजधानी पटना के प्रसिद्ध बाकरगंज सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में सबसे तेज 273 रुपये प्रति किलो की गिरावट देखी गई। इस कटौती के बाद पटना में चांदी का भाव 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है।

  • राजस्थान (जयपुर): जेवरात और चांदी की नक्काशीदार कलाकृतियों के प्रमुख केंद्र जयपुर में चांदी की कीमत 225 रुपये सस्ती होकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

  • महाराष्ट्र (मुंबई): देश की वित्तीय राजधानी मुंबई के ऐतिहासिक जवेरी बाजार में चांदी का भाव करीब 222 रुपये कमजोर होकर 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया।

(ध्यान रहे कि सर्राफा बाजार के इन प्राथमिक बेस रेट्स में 3 प्रतिशत जीएसटी, स्थानीय परिवहन प्रभार और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं; शोरूम में अंतिम बिलिंग के समय यह अतिरिक्त शुल्क अलग से जोड़े जाते हैं।)

जन्माष्टमी के दिन क्यों सस्ती हुई चांदी? जानिए इसके पीछे के 4 बड़े कारण

त्योहारी मांग के बीच चांदी के भाव में आई इस गिरावट ने आम खरीदारों के साथ-साथ बाजार के नए निवेशकों को भी चकित किया है। कमोडिटी बाजार के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि चांदी केवल एक पारंपरिक निवेश धातु नहीं है, बल्कि यह एक प्रमुख 'इंडस्ट्रियल कमोडिटी' (औद्योगिक धातु) भी है। इसलिए इसकी कीमतें केवल स्थानीय दुकानों पर लगने वाली भीड़ से तय नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों, मुद्रा विनिमय दरों और संस्थागत ट्रेडर्स की गतिविधियों से सीधे संचालित होती हैं। विश्लेषकों ने इस गिरावट के पीछे निम्नलिखित चार प्राथमिक कारक चिन्हित किए हैं:

1. गुरुवार की भारी तेजी के बाद MCX पर तेज मुनाफावसूली

इस गिरावट का सबसे पहला और तात्कालिक कारण तकनीकी मुनाफावसूली (Profit Booking) है। पिछले तीन दिनों में चांदी लगभग 9,000 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो चुकी थी। गुरुवार के सत्र में घरेलू और वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत का जोरदार उछाल आया था, जिसने चांदी को भी तेजी से ऊपर खींच लिया था। जब किसी कमोडिटी में इतने कम समय में इतनी तीव्र बढ़त आती है, तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स मार्केट पर बड़े सटोरिये और संस्थागत निवेशक ऊंचे स्तरों पर अपने सौदों को काटकर मुनाफा घर ले जाना पसंद करते हैं। शुक्रवार की सुबह यही मुनाफावसूली हावी हुई, जिससे वायदा भाव नरम हुए और उसका असर तुरंत हाजिर बाजार तक पहुंच गया।

2. अमेरिकी रोजगार आंकड़े (US Jobs Data) और फेड का डर

अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट की चाल इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की आगामी ब्याज दर नीतियों के इर्द-गिर्द घूम रही है। शुक्रवार को वैश्विक कमोडिटी निवेशकों की पैनी नजर अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों (US Non-Farm Payrolls Data) पर टिकी हुई थी। बाजार में यह अनिश्चितता बनी हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरों में कितनी कटौती करेगा। ब्याज दरों को लेकर अनुमानों में होने वाले इस बदलाव के चलते बड़े फंड मैनेजर्स ने किसी भी नए जोखिम भरे सौदे में पूंजी लगाने के बजाय अपनी पोजीशन को हल्का रखा, जिससे कीमती धातुओं की लिवाली पर ब्रेक लग गया।

3. अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की सतर्कता

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते कूटनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने (Risk-Off Sentiment) का माहौल देखा गया। ऐसी परिस्थितियों में आमतौर पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर तरजीह मिलती है। डॉलर में आने वाली मजबूती से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी मुद्राओं में कमोडिटी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक हाजिर मांग पर क्षणिक दबाव बन जाता है। इस भू-राजनीतिक खींचतान के बीच निवेशकों ने रक्षात्मक रवैया अपनाते हुए बुलियन में आक्रामक खरीदारी करने से परहेज किया।

4. औद्योगिक मांग का संतुलन और इन्वेंट्री का पर्याप्त स्तर

चांदी की कुल खपत का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा औद्योगिक विनिर्माण—विशेष रूप से सोलर पैनल्स (फोटोवोल्टाइक सेल्स), सेमीकंडक्टर चिप्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों—में होता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में विनिर्माण गतिविधियों की गति पर नजर रख रहे उद्योग जगत ने हालिया उच्च स्तरों पर नई थोक खरीद को थोड़ा धीमा कर दिया है। वहीं घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिफाइनर्स और बड़े बुलियन डीलर्स ने त्योहारी सीजन की तैयारी के लिए पहले से ही पर्याप्त मात्रा में चांदी का आयात और स्टॉक जुटा रखा है। बाजार में तरलता और आपूर्ति पूरी तरह सुचारू होने के कारण त्योहार के दिन भी स्थानीय स्तर पर कोई कृत्रिम किल्लत पैदा नहीं हो सकी, जिससे दामों में नरमी का रुख बना रहा।

बाजारों में लड्डू गोपाल के झूलों और चांदी के सिक्कों की खरीदारी में आया उछाल

दामों में आई इस स्थिरता और हल्की नरमी ने जन्माष्टमी के दिन बाजारों की रौनक को कई गुना बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के ठठेरी बाजार, लखनऊ के अमीनाबाद और चौक, तथा बिहार में पटना के बाकरगंज स्थित ज्वेलरी दुकानों पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है।

इस पावन अवसर पर श्रद्धालु विशेष रूप से 10 ग्राम, 20 ग्राम और 50 ग्राम के चांदी के सिक्के, लड्डू गोपाल के लिए चांदी के सिंहासन, पालने, छोटी कटोरी-चम्मच और बांसुरी की खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि पिछले तीन दिनों की तेज बढ़त देखकर कई ग्राहक सहम गए थे, लेकिन शुक्रवार को भावों में ठहराव और गिरावट आने से खरीदारों ने राहत की सांस ली है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह नरमी त्योहार के बजट को संतुलित रखते हुए परंपरा निभाने का एक बेहतरीन अवसर बनकर आई है।

क्या चांदी खरीदने का यह सही मौका है? जानिए विशेषज्ञों की राय और जरूरी सावधानियां

कमोडिटी और वेल्थ एडवाइजर्स का मानना है कि चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट केवल एक अल्पकालिक और तकनीकी करेक्शन (Technical Correction) है। लंबी अवधि के बुनियादी ढांचों पर गौर करें तो दुनिया भर में ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सोलर मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार के चलते चांदी की वैश्विक आपूर्ति में लगातार घाटा (Supply Deficit) देखा जा रहा है। ऐसे में आगामी धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन को ध्यान में रखते हुए इस तरह की किसी भी छोटी गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए 'बाय ऑन डिप्स' (गिरावट पर खरीदारी) का स्वर्णिम मौका माना जा सकता है।

हालांकि, त्योहार की हड़बड़ी और भीड़भाड़ के बीच चांदी के आभूषण या बर्तन खरीदते समय उपभोक्ताओं को कुछ बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए:

  • हमेशा बीआईएस हॉलमार्क (BIS Hallmark) वाली प्रमाणित चांदी ही खरीदें। आभूषणों और कलाकृतियों पर शुद्धता का पैमाना '925' (92.5% स्टर्लिंग सिल्वर) जांचें, जबकि शुद्ध चांदी के सिक्कों और सिल्लियों पर '999' की मार्किंग सुनिश्चित करें।

  • खरीदारी के समय सुनार से कंप्यूटराइज्ड पक्का बिल जरूर मांगें। बिल में चांदी का कुल सकल वजन, शुद्ध वजन, उस दिन का प्रति ग्राम भाव और अलग से लगाया गया मेकिंग चार्ज साफ-साफ दर्ज होना चाहिए।

  • सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों या बिना बिल के नकद लेन-देन से बचें, ताकि किसी भी तरह की मिलावट या ठगी से बचा जा सके।

जन्माष्टमी के पावन दिन पर सर्राफा बाजार में आई यह सुस्ती उन सभी भक्तों के लिए एक मंगलकारी अवसर साबित हो रही है, जो अपने आराध्य के जन्मोत्सव को चांदी की जगमगाती आभा के साथ और अधिक पावन बनाना चाहते हैं।

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