यूपी में आज भी भारी बारिश का अलर्ट: 25 से अधिक जिलों में बाढ़ का तांडव, गंगा-यमुना उफान पर

यूपी में आज भी भारी बारिश का अलर्ट: 25 से अधिक जिलों में बाढ़ का तांडव, गंगा-यमुना उफान पर

उत्तर प्रदेश में मानसून जाते-जाते एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के असर से प्रदेश के कई संभागों में बादलों की आवाजाही और रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ ने आज भी प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। एक तरफ जहां बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को उमस से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही वर्षा और पड़ोसी राज्यों व बैराजों से छोड़े जा रहे पानी ने राज्य में बाढ़ के संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है। प्रदेश के करीब 25 से 26 जिले इस समय बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, जहां लाखों की आबादी जलभराव और कटान की मार से बेहाल है।

मौसम का हाल: आज पूर्वांचल और बुंदेलखंड समेत इन जिलों में बारिश के आसार

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, मानसूनी द्रोणी (Monsoon Trough) और चक्रवाती परिसंचरण का असर उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्वी और तराई वाले जिलों में सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रयागराज, चित्रकूट, मिर्जापुर, वाराणसी, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा और झांसी समेत बुंदेलखंड व विंध्य क्षेत्र के जिलों में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।

इसके साथ ही राजधानी लखनऊ, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा और गोरखपुर संभाग के तराई इलाकों में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और रुक-रुककर बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत और मुरादाबाद क्षेत्र में भी गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश के संकेत हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने वज्रपात (बिजली गिरने) की आशंका को देखते हुए किसानों और आम नागरिकों को खराब मौसम के दौरान खुले खेतों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे न जाने की सख्त सलाह दी है।

प्रदेश के 25 जिलों में बाढ़ का कहर: 4 लाख से अधिक आबादी प्रभावित

लगातार हो रही बारिश और ऊपरी बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा, यमुना, घाघरा (सरयू), शारदा, राप्ती और केन समेत 10 से ज्यादा नदियां उफान पर हैं। इसके चलते प्रदेश के 25 से अधिक जिले सीधे तौर पर बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 4 लाख से अधिक लोग पानी से घिरे हुए हैं।

बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर नगर, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, चंदौली, उन्नाव, हरदोई, फर्रुखाबाद, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, गोंडा, बाराबंकी, अयोध्या, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर और आजमगढ़ शामिल हैं।

  • प्रयागराज व वाराणसी: प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से संगम क्षेत्र के सभी प्रमुख घाट डूब चुके हैं। दारागंज और छतनाग में घाटों के जलमग्न होने के चलते अंतिम संस्कार तक सड़कों और ऊंचे स्थानों पर करने पड़ रहे हैं। वहीं वाराणसी में गंगा के सभी 84 घाटों का संपर्क टूट चुका है और मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह छतों व गलियों में हो रहा है।

  • कानपुर व उन्नाव: कानपुर में गंगा बैराज के सभी गेट खुले होने के बावजूद कटरी के 12 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे लोग अपने ही घरों में कैद होकर छतों पर रहने को मजबूर हैं। उन्नाव में लोन और सई नदी के उफान से कई संपर्क मार्ग कट गए हैं।

  • तराई और पूर्वांचल: लखीमपुर खीरी और बहराइच में नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण शारदा और घाघरा नदियां तबाही मचा रही हैं, जहां दर्जनों गांवों में फसलें डूब चुकी हैं और संपर्क मार्ग टूट चुके हैं।

राहत और बचाव कार्य तेज: NDRF-SDRF तैनात, सीएम योगी की सीधी नजर

बाढ़ के विकराल होते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को ग्राउंड जीरो पर उतरकर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील और जलमग्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और पीएसी की फ्लड यूनिट्स को बोट्स के साथ तैनात किया गया है।

अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब 20 हजार से अधिक ग्रामीणों और पशुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है। प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से सूखा राशन किट, तिरपाल, पीने का शुद्ध पानी और आवश्यक दवाएं बांटी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल टीमें नावों के जरिए गांवों में पहुंचकर क्लोरीनेशन, ओआरएस पैकेट्स और संक्रामक बीमारियों से बचाव के टीके उपलब्ध करा रही हैं।

किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, फसलों को भारी नुकसान

नदियों के उफान और बारिश के चलते किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर में लहलहा रही खरीफ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। तराई और कटरी इलाकों में धान, मक्का, बाजरा, तिल, उड़द और हरी सब्जियों की फसलें तीन से चार दिनों से पानी में डूबी होने के कारण सड़ने लगी हैं। इसके अलावा खेतों और चारागाहों के डूब जाने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शासन ने राजस्व टीमों को निर्देश दिया है कि जैसे ही पानी कम होना शुरू हो, फसलों के नुकसान का सटीक आकलन (सर्वे) कराकर किसानों को तत्काल मुआवजा राशि वितरित की जाए।

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