Paresh Rawal Son In Awarapan 2: 'आवारापन 2' में परेश रावल के बेटे ने अपनी एक्टिंग से लूटी महफिल! क्लाइमैक्स में पलटी पूरी बाजी, क्या आपने पहचाना?

Paresh Rawal Son In Awarapan 2: 'आवारापन 2' में परेश रावल के बेटे ने अपनी एक्टिंग से लूटी महफिल! क्लाइमैक्स में पलटी पूरी बाजी, क्या आपने पहचाना?

बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी की हालिया रिलीज एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'आवारापन 2' इस समय बॉक्स ऑफिस और सोशल मीडिया पर जबरदस्त तहलका मचा रही है। साल 2007 की कल्ट क्लासिक फिल्म के 19 साल बाद जब 'शिवम पंडित' के रूप में इमरान हाशमी ने बड़े पर्दे पर वापसी की, तो दर्शकों का हुजूम सिनेमाघरों में उमड़ पड़ा। फिल्म के गाने, दमदार एक्शन और इमोशनल कहानी की तो हर तरफ चर्चा हो ही रही है, लेकिन इन सबके बीच फिल्म के एक खास चेहरे ने दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फिल्म में एक बेहद मासूम लेकिन कहानी के टर्निंग प्वाइंट पर बड़ा धमाका करने वाले किरदार 'सिकंदर' ने हर किसी को भावुक कर दिया। यदि आप भी थिएटर में इस दमदार किरदार को देखकर यह सोच रहे थे कि यह नया अभिनेता कौन है, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कोई और नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के दिग्गज और मंझे हुए अभिनेता परेश रावल और पूर्व मिस इंडिया व अभिनेत्री स्वरूप संपत के छोटे बेटे अनिरुद्ध रावल (Aniruddh Rawal) हैं। अनिरुद्ध ने अपनी पहली ही फीचर फिल्म में अपने संजीदा अभिनय से साबित कर दिया है कि अदाकारी का हुनर उनके खून में दौड़ता है।

कौन हैं अनिरुद्ध रावल? 'आवारापन 2' में निभाया 'सिकंदर' का वो रहस्यमयी किरदार

फिल्म 'आवारापन 2' में अनिरुद्ध रावल ने 'सिकंदर' नाम के एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण युवक की भूमिका निभाई है। कहानी के दूसरे भाग में जब शिवम पंडित (इमरान हाशमी) अपने जीवन के सबसे बड़े भावनात्मक और नैतिक संकट से गुजर रहा होता है, तब सिकंदर का किरदार कहानी को एक नया मोड़ देता है।

फिल्म के क्लाइमैक्स में अनिरुद्ध के दृश्यों और उनकी आंखों के भावों ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। एक नवागंतुक (डेब्यूटेंट) अभिनेता के तौर पर इमरान हाशमी, दिशा पाटनी और शबाना आजमी जैसे स्थापित कलाकारों के सामने बिना किसी झिझक के स्क्रीन पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना वाकई काबिले-तारीफ है। फिल्म रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर दर्शक अनिरुद्ध की परफॉर्मेंस की छोटी-छोटी क्लिप्स शेयर कर उनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं।

कैमरे के पीछे से शुरुआत: सलमान खान की 'सुल्तान' और 'टाइगर जिंदा है' में रहे असिस्टेंट डायरेक्टर

परेश रावल जैसे महानायक के बेटे होने के बावजूद अनिरुद्ध रावल को यह मौका किसी थाली में परोसकर नहीं मिला। अक्सर स्टार किड्स पर बिना मेहनत के सीधे मुख्य भूमिकाएं पाने का आरोप लगता है, लेकिन अनिरुद्ध ने बॉलीवुड में अपने सफर की शुरुआत बिल्कुल बुनियादी स्तर यानी ग्राउंड जीरो से की।

अनिरुद्ध ने सिनेमा की बारीकियों, तकनीकी पहलुओं और बड़े पैमाने पर फिल्म मेकिंग के क्राफ्ट को समझने के लिए कैमरे के पीछे कई सालों तक पसीना बहाया। उन्होंने यशराज फिल्म्स (YRF) के बैनर तले बनी बॉलीवुड के दबंग सलमान खान की दो ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्मों 'सुल्तान' (2016) और 'टाइगर जिंदा है' (2017) में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर (AD) काम किया। सेट पर हजारों लोगों की भीड़ को संभालना, शॉट्स की प्लानिंग करना और दिग्गजों को काम करते देखना ही अनिरुद्ध की सबसे बड़ी पहली पाठशाला बनी।

नसीरुद्दीन शाह की शागिर्दी और हंसल मेहता की 'स्कूप' से मिला अभिनय का तराशा हुआ रूप

कैमरे के पीछे काम करने के बाद अनिरुद्ध ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने के लिए पारंपरिक और कठोर प्रशिक्षण का रास्ता चुना। उन्होंने भारतीय रंगमंच और सिनेमा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के मार्गदर्शन में थिएटर और अभिनय की गहरी ट्रेनिंग ली। नसीरुद्दीन शाह के थिएटर ग्रुप 'मोटली' के साथ जुड़कर उन्होंने कई नाटकों में अपने अभिनय को धार दी।

इसके बाद निर्देशक हंसल मेहता की बहुचर्चित और नेटफ्लिक्स की सुपरहिट वेब सीरीज 'स्कूप' (Scoop) में अनिरुद्ध एक महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आए थे। पत्रकारिता और अंडरवर्ल्ड के ताने-बाने पर बनी इस सीरीज में अनिरुद्ध के काम को आलोचकों ने खूब सराहा था। इसके अलावा उन्होंने कुछ शॉर्ट फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, जिसके बाद उन्हें 'आवारापन 2' में सिकंदर के इस जटिल किरदार के लिए चुना गया।

भट्ट और रावल परिवार का 40 साल पुराना सिनेमाई रिश्ता: 'कब्जा' से लेकर 'आवारापन 2' तक

अनिरुद्ध रावल का विशेष फिल्म्स (Vishesh Films) की इस फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू करना केवल एक कास्टिंग का फैसला नहीं है, बल्कि यह हिंदी सिनेमा के दो दिग्गज परिवारों—भट्ट परिवार और रावल परिवार—के बीच 40 साल पुरानी अटूट रचनात्मक विरासत की एक नई कड़ी है।

साल 1980 और 90 के दशक में महेश भट्ट और मुकेश भट्ट की कई ऐतिहासिक फिल्मों में परेश रावल ने यादगार किरदार निभाए थे। चाहे वह 'कब्जा' हो, 'नाम', 'सर' (जिसके लिए परेश रावल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला), 'तमन्ना', 'नाराज' या 'फिर तेरी कहानी याद आई'—परेश रावल ने भट्ट कैंप की फिल्मों में अपने अभिनय के कई रंग दिखाए। अब ठीक चार दशक बाद परेश रावल की अगली पीढ़ी यानी उनके बेटे अनिरुद्ध रावल ने विशेष भट्ट और नितिन कक्कड़ की 'आवारापन 2' से अपने फिल्मी करियर का शंखनाद किया है। इंडस्ट्री के जानकार इसे दो परिवारों की कलात्मक परंपरा का सबसे खूबसूरत विस्तार बता रहे हैं।

बड़े भाई आदित्य रावल भी हैं मंझे हुए कलाकार: परिवार की सादगी और मेहनत की मिसाल

परेश रावल और स्वरूप संपत के बड़े बेटे आदित्य रावल भी अपनी सादगी और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। आदित्य ने अनुराग कश्यप द्वारा निर्मित फिल्म 'बमफाड़' (Bamfaad) से बतौर मुख्य अभिनेता डेब्यू किया था और डिज्नी+ हॉटस्टार की थ्रिलर सीरीज 'आर या पार' में जनजातीय नायक की भूमिका निभाकर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। इसके साथ ही आदित्य एक शानदार लेखक और नाटककार भी हैं, जिन्होंने हंसल मेहता की फिल्म 'फराज' (Faraaz) की पटकथा लिखी थी।

परेश रावल ने अपने एक इंटरव्यू में गर्व से कहा था कि "मैंने कभी अपने बेटों के लिए किसी निर्माता को फोन नहीं किया और न ही उन्हें लॉन्च करने के लिए कोई फिल्म बनाई। मैंने उनसे हमेशा यही कहा कि अगर तुम्हारे अंदर प्रतिभा और ईमानदारी होगी, तो काम खुद तुम्हारे पास चलकर आएगा।" आज दोनों भाई अपनी मेहनत, थिएटर के संस्कारों और काबिलियत के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

बॉक्स ऑफिस पर 'आवारापन 2' का जलवा और अनिरुद्ध के करियर का भविष्य

नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी 'आवारापन 2' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने स्वतंत्रता दिवस के वीकेंड पर रिकॉर्डतोड़ कमाई करते हुए 100 करोड़ क्लब की ओर तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं।

फिल्म में जहां इमरान हाशमी का दर्द और एक्शन दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रहा है, वहीं अनिरुद्ध रावल के इस डेब्यू को बॉलीवुड में एक लंबी रेस के घोड़े की शुरुआत माना जा रहा है। समीक्षकों का मानना है कि अनिरुद्ध के पास वह संजीदगी, गहरा ठहराव और भावुक आंखें हैं जो उन्हें आने वाले समय में एक सशक्त कैरेक्टर एक्टर और मुख्यधारा के अभिनेता के रूप में स्थापित करेंगी। अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में जगह बना लेने वाले अनिरुद्ध रावल का यह सफर बताता है कि सच्ची लगन और जमीन से जुड़कर की गई तैयारी कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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