धनुष की राजनीतिक एंट्री की अटकलों के बीच थलपति विजय को मिलेगा धोखा? DMK का तंज कहा- सबसे पहले पाला बदलेंगे करीबी मंत्री
दक्षिण भारत की सियासत में फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति का नाता हमेशा से बेहद गहरा रहा है, और इन दिनों तमिलनाडु की राजनीति एक नए और दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के सत्ता में आने के बाद से ही राज्य का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। इसी बीच, तमिल सिनेमा के एक और दिग्गज स्टार धनुष के राजनीति में आने की अटकलों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इन अटकलों के सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्यमंत्री थलपति विजय और उनकी पार्टी पर करारा तंज कसा है। डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने एक तीखा बयान देते हुए दावा किया है कि यदि अभिनेता धनुष अपनी कोई नई राजनीतिक पार्टी बनाते हैं, तो थलपति विजय के सबसे करीबी रणनीतिकार और राज्य सरकार में मंत्री आधव अर्जुन वह पहले व्यक्ति होंगे जो विजय का साथ छोड़कर धनुष के पाले में चले जाएंगे। इस बयान के बाद से तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विजय के अपने ही खेमे में अंदरखाने बड़ी टूट की तैयारी चल रही है।
तमिलनाडु में राजनीतिक उथल-पुथल का यह नया दौर उस समय शुरू हुआ जब अभिनेता धनुष ने चेन्नई में एक रक्तदान शिविर और फैन क्लब के कार्यक्रम के दौरान अपने समर्थकों को एक बेहद जोशीला संबोधन दिया। इस कार्यक्रम के दौरान धनुष ने अपने प्रशंसकों से अपील की कि वे अपनी एकजुटता को केवल फिल्मों के ऑडियो लॉन्च, जश्न और कट-आउट तक ही सीमित न रखें, बल्कि इस ऊर्जा का इस्तेमाल समाज कल्याण और जमीनी स्तर पर जनसेवा के कार्यों में करें। इसके साथ ही धनुष के फैन क्लब द्वारा एक नए झंडे को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं, जिसमें सफेद और लाल रंगों के साथ एक विशेष स्टार का जिक्र किया गया। हालांकि धनुष के करीबी सूत्रों और उनकी टीम ने इन तमाम गतिविधियों को पूरी तरह से गैर-राजनीतिक बताते हुए केवल सामाजिक सरोकार करार दिया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थलपति विजय ने भी अपनी राजनीतिक जमीन इसी तरह के फैन क्लब्स और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए तैयार की थी। यही कारण है कि धनुष के इन कदमों को उनकी भविष्य की राजनीतिक लॉन्चिंग के रूप में देखा जा रहा है और राज्य की जनता के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में तमिल सिनेमा के दो बड़े सितारे आमने-सामने होंगे। तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां सिनेमा और राजनीति का पुराना और अटूट रिश्ता रहा है। सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि जैसे दिग्गज नेता भी पटकथा और संवाद लेखन से जुड़े रहे हैं, जबकि एम.जी. रामचंद्रन (MGR), जयललिता और विजयकांत जैसे कलाकारों ने फिल्मी पर्दे की लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदला है। इसी कड़ी में थलपति विजय ने भी अपनी पार्टी टीवीके बनाकर एक नया विकल्प पेश किया है। ऐसे में यदि धनुष जैसे स्थापित और राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय अभिनेता भी इस मैदान में उतरते हैं, तो निश्चित रूप से पारंपरिक राजनीतिक दलों के साथ-साथ नए राजनीतिक दलों के लिए भी समीकरण काफी जटिल हो जाएंगे।
'मौसम की तरह रंग बदलते हैं आधव अर्जुन': डीएमके का तीखा हमला और वफादारी पर सवाल
धनुष की संभावित राजनीतिक एंट्री की चर्चाओं के बीच डीएमके ने सीधे तौर पर थलपति विजय के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और मंत्री आधव अर्जुन को निशाना बनाया है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और संगठन सचिव आर.एस. भारती ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान आधव अर्जुन के पुराने राजनीतिक सफर का कच्चा-चिट्ठा खोलते हुए तीखा हमला बोला। भारती ने कहा कि आधव अर्जुन एक ऐसे नेता हैं जो मौसम और हालात के हिसाब से अपना रंग बदलना अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शुरुआत में अर्जुन डीएमके के साथ थे, लेकिन कुछ अनुशासनात्मक कारणों और अंदरूनी कलह के चलते उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने वीसीके (विदुथलाई चिरूथैगल कच्ची) पार्टी का दामन थामा और उसके प्रमुख थोल थिरुमावलवन के साथ जुड़े, लेकिन वहां भी वह लंबे समय तक नहीं टिके और अंततः थलपति विजय की पार्टी टीवीके में शामिल होकर सरकार में मंत्री पद हासिल करने में सफल रहे।
डीएमके नेता आर.एस. भारती ने आगे आक्रामक रुख अपनाते हुए भविष्यवाणी की कि आधव अर्जुन की वैचारिक निष्ठा किसी एक दल के साथ पक्की नहीं है। उन्होंने खुले तौर पर यह दावा किया कि अगर आने वाले दिनों में अभिनेता धनुष अपनी कोई नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करते हैं, तो उस पार्टी के गठन के दस्तावेजों पर सबसे पहला हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति आधव अर्जुन ही होंगे। डीएमके का यह बयान ऐसे समय आया है जब थलपति विजय की पार्टी और सरकार अपनी शुरुआती सफलताओं के बाद विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीएमके इस तरह के बयानों के जरिए न केवल थलपति विजय के अंदरूनी सहयोगियों के बीच शक और अविश्वास का बीज बोना चाहती है, बल्कि यह भी संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अभिनेता आधारित राजनीतिक दल केवल अल्पकालिक और अवसरवादी गठबंधनों पर टिके होते हैं, जिनमें वैचारिक दृढ़ता का अभाव होता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले दिनों में घमासान और अधिक तेज होने वाला है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री थलपति विजय अपनी युवा और लोकप्रिय छवि के दम पर राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं विपक्षी पार्टियां उनके सहयोगियों की पृष्ठभूमि को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रही हैं। धनुष के राजनीतिक मैदान में उतरने की अटकलें भले ही अभी शुरुआती दौर में हों, लेकिन इसने राज्य की सियासत में नए कयासों को जन्म दे दिया है। यदि यह अटकलें सच साबित होती हैं, तो आने वाले चुनावों में मुकाबला केवल डीएमके और एआईएडीएमके तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तमिल सिनेमा के दो बड़े दिग्गजों के बीच भी राजनीतिक वर्चस्व की एक दिलचस्प और कड़ी जंग देखने को मिल सकती है। फिलहाल, थलपति विजय के खेमे की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है और आने वाले दिनों में धनुष अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या स्पष्ट रुख अपनाते हैं, इस पर पूरे दक्षिण भारत की निगाहें टिकी हुई हैं।