पीएम मोदी के लिए यूरोप से आया अनोखा तोहफा: 3 दिन की कड़ी मेहनत से बना था 'चॉकलेट इंडिया गेट', लेकिन भारतीय गर्मी नहीं झेल पाई कारीगरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके प्रति देश-विदेश में बसे भारतीय प्रवासियों का स्नेह किसी से छिपा नहीं है। विदेशी दौरों से लेकर देश में आयोजित होने वाले प्रवासी सम्मेलनों तक, प्रधानमंत्री को दुनिया भर से अनोखे और हस्तनिर्मित उपहार मिलते रहते हैं। इसी कड़ी में यूरोप में कार्यरत भारतीय मूल के एक अंतरराष्ट्रीय पेस्ट्री शेफ और चॉकलेटीयर ने प्रधानमंत्री के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए एक बेहद कल्पनाशील और जटिल कृति तैयार की थी।
शेफ ने शुद्ध डार्क और मिल्क चॉकलेट का इस्तेमाल करके नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक राष्ट्रीय स्मारक 'इंडिया गेट' की एक भव्य और बारीक नक्काशीदार प्रतिकृति (Chocolate Replica) बनाई थी। इस अनूठे शिल्प को तैयार करने में शेफ को लगातार 3 दिनों की कड़ी मेहनत लगी थी। इसके मेहराबों, स्तंभों, उस पर उकेरे जाने वाले प्रतीकों और सीढ़ियों तक को चॉकलेट के जरिए इतनी बारीकी से तराशा गया था कि पहली नजर में यह कोई संगमरमर या बलुआ पत्थर का मॉडल नजर आता था।
रास्ते में भारतीय तापमान ने फेरा पानी: बॉक्स खोला तो पिघल चुका था शिल्प
इस कलाकृति को यूरोप की ठंडी आबोहवा में विशेष तापमान-नियंत्रित वातावरण में तैयार किया गया था। शेफ ने इसे भारत लाने के लिए इंसुलेटेड थर्माकोल बॉक्स और ड्राई आइस पैक्स का उपयोग भी किया था, ताकि यात्रा के दौरान यह ठोस और सुरक्षित बना रहे।
लेकिन यूरोप की शून्य और 10-12 डिग्री वाली ठंड से निकलकर जब यह पार्सल भारत के गर्म और उमस भरे वातावरण में पहुंचा, तो तापमान के इस भारी अंतर को चॉकलेट की नाजुक बनावट ज्यादा देर नहीं झेल पाई। एयरपोर्ट से गंतव्य तक के जमीनी सफर और सुरक्षा जांच के दौरान तापमान बढ़ने से ड्राई आइस का असर खत्म हो गया। जब नई दिल्ली में आधिकारिक रूप से उपहार सौंपने से पहले बॉक्स को अंतिम बार जांचने के लिए खोला गया, तो शेफ के होश उड़ गए।
बारीक नक्काशी वाला वह भव्य 'चॉकलेट इंडिया गेट' काफी हद तक पिघल चुका था। उसकी संरचना ढह गई थी और मेहराबें आपस में मिलकर चॉकलेट के ढेर में बदल चुकी थीं। अपनी कई रातों की मेहनत और प्रधानमंत्री को सौंपे जाने वाले सपने को इस तरह पिघलते देख शेफ बेहद भावुक और मायूस हो गया।
भावना सबसे ऊपर: पीएमओ और प्रशंसकों ने बांधा ढांढस
भले ही वह भौतिक उपहार अपने मूल स्वरूप में नहीं बच सका, लेकिन शेफ द्वारा सोशल मीडिया पर इस पूरी यात्रा, तैयारी के वीडियो और पिघली हुई चॉकलेट की तस्वीरें साझा किए जाने के बाद इंटरनेट पर सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
लोगों ने शेफ को सांत्वना देते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी किसी भी उपहार की कीमत या उसकी भौतिक स्थिति से ज्यादा उसके पीछे छिपे समर्पण, प्रेम और भावना को महत्व देते हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़े अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी शेफ के इस प्रयास, रचनात्मकता और देश के प्रति उनके प्रेम की दिल से सराहना की। अधिकारियों ने संदेश दिया कि कलाकृति का पिघलना केवल मौसम का असर है, लेकिन तिरंगे और इंडिया गेट के प्रति उनका आदर हर हाल में प्रधानमंत्री तक पहुंच चुका है।
जब चॉकलेट कला के सामने आई मौसम की चुनौती
खाद्य विशेषज्ञों और पेस्ट्री शेफ्स के अनुसार, चॉकलेट स्कल्प्चर (Chocolate Sculpting) बनाना दुनिया के सबसे नाजुक कला रूपों में से एक है। यूरोपियन चॉकलेट में कोको बटर (Cocoa Butter) की मात्रा अधिक होती है, जिसका मेल्टिंग पॉइंट (पिघलने का बिंदु) लगभग 34 से 36 डिग्री सेल्सियस होता है।
भारतीय उपमहाद्वीप के ग्रीष्मकालीन और मानसूनी तापमान में बिना लगातार एयर-कंडीशंड रेफ्रिजरेशन या कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के ऐसी कृतियों को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाना लगभग असंभव होता है। यह घटना भले ही शेफ के लिए एक निराशाजनक अंत लेकर आई, लेकिन इस 'पिघले हुए इंडिया गेट' ने दुनिया भर में बैठे भारतीयों के उस अटूट जुड़ाव को एक बार फिर बयां कर दिया जो वे अपनी मातृभूमि और उसके नेतृत्व के प्रति महसूस करते हैं।