दिल्ली में बड़े प्रदर्शन के लिए महबूबा मुफ्ती भी तैयार, पर सीएम उमर अब्दुल्ला के सामने रख दीं ये बड़ी शर्तें; बढ़ी सियासी रार

दिल्ली में बड़े प्रदर्शन के लिए महबूबा मुफ्ती भी तैयार, पर सीएम उमर अब्दुल्ला के सामने रख दीं ये बड़ी शर्तें; बढ़ी सियासी रार

श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (Full Statehood) दिलाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) द्वारा आगामी 20 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुलाए गए 'दिल्ली चलो आंदोलन' को बड़ा झटका लगा है। सूबे की दूसरी सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार तो नहीं किया है, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सामने कुछ ऐसी शर्तें रख दी हैं जिसने राज्य की सियासत में नया मोड़ ला दिया है।

महबूबा मुफ्ती ने शनिवार (18 जुलाई) को स्पष्ट किया कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस आंदोलन में केवल तभी शामिल होंगी, जब उमर अब्दुल्ला अपनी मुख्य मांगों में जम्मू-कश्मीर के मूल मुद्दों को भी जोड़ेंगे।

महबूबा मुफ्ती की वो 3 बड़ी शर्तें (The Three Demands)

पीडीपी चीफ ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला को एक आधिकारिक पत्र लिखकर साफ किया है कि आंदोलन के एजेंडे में केवल पूर्ण राज्य का दर्जा ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित तीन मुद्दे भी अनिवार्य रूप से शामिल होने चाहिए:

  1. आर्टिकल 370 की बहाली: 5 अगस्त 2019 को हटाए गए विशेष दर्जे (Article 370 & 35A) को वापस बहाल करने की मांग।

  2. राजनीतिक बंदियों की रिहाई: घाटी की जेलों में बंद सभी राजनीतिक कैदियों (Political Prisoners) को तुरंत आजाद किया जाए।

  3. पाबंदी हटाना: सामाजिक-राजनीतिक संगठन 'जमात-ए-इस्लामी' (Jamaat-e-Islami) समेत अन्य संगठनों पर से प्रतिबंध हटाया जाए।

'केवल राज्य का दर्जा मांगना जनता से विश्वासघात': पीडीपी

महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला सरकार की रणनीति पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों को घेरा:

महबूबा मुफ्ती का तीखा बयान: "अगर हम दिल्ली जाकर केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की भीख मांगते हैं, तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जो असंवैधानिक कदम उठाया था, हम उसका परोक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं। ऐसा कतई नहीं है। जम्मू-कश्मीर की जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को केवल राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए भारी बहुमत नहीं दिया है। अगर मूल अधिकारों को छोड़कर सिर्फ स्टेटहुड के लिए प्रदर्शन होता है, तो यह जनादेश और जनता के साथ बड़ा विश्वासघात होगा।"

लद्दाख की तर्ज पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की वकालत

महबूबा ने आंदोलन को एकतरफा चलाने के बजाय लद्दाख के सामाजिक-राजनीतिक संगठनों की एकजुटता का उदाहरण दिया। उन्होंने विपक्ष को एकजुट करने के लिए एक रोडमैप सुझाया:

प्रस्तावित कदम अपेक्षित परिणाम
सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सबसे पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ सिविल सोसाइटी (Civil Society) के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
मांगों में एकरूपता (Unity of Agenda) बैठक के जरिए उन सभी मुद्दों पर चर्चा की जाए जो इस समय जम्मू-कश्मीर के लोगों को कमजोर और अमानवीय स्थिति में डाल रहे हैं, ताकि केंद्र के सामने एकजुट आवाज उठाई जा सके।

क्या है उमर अब्दुल्ला का 'दिल्ली चलो' प्लान और क्यों भड़की है BJP?

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल धरने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि केंद्र सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है और वादों के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल करने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

उमर अब्दुल्ला ने देश भर के विपक्षी नेताओं को इस प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, विवाद तब और बढ़ गया जब उमर ने कश्मीर के प्रमुख इस्लामिक नेता मीरवाइज उमर फारुख को भी इस आंदोलन का न्योता भेज दिया। मीरवाइज के अलगाववादी इतिहास को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला बोला है और इसे देशविरोधी ताकतों को एकजुट करने का प्रयास बताया है। महबूबा मुफ्ती की नई शर्तों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला विपक्ष को साथ लाने के लिए अपने एजेंडे में बदलाव करते हैं या नहीं।

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