शादी के दिन गायब हुआ बैंड वाला, घंटों अटकी रही बारात; अब कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया ₹39,000 का भारी जुर्माना
शादी-ब्याह के शुभ अवसर पर बैंड-बाजे की धुन बारात के माहौल को खुशनुमा बना देती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक परिवार को शादी वाले दिन बैंड संचालक की घोर लापरवाही के कारण भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐन बारात निकलने के वक्त एडवांस भुगतान लेने के बावजूद बैंड वाला गायब हो गया। हालांकि, पीड़ित परिवार ने इस धोखे को चुपचाप बर्दाश्त नहीं किया और कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता अदालत) का दरवाजा खटखटाया, जिसने अब बैंड संचालक को कड़ा सबक सिखाया है।
एक महीने पहले एडवांस देकर की थी बुकिंग, ऐन वक्त पर फोन कर दिया बंद
मामला कांगड़ा जिले का है, जहां एक शिकायतकर्ता ने अपने बेटे की 5 फरवरी 2026 को होने वाली शादी के लिए करीब एक महीने पहले ही 5 सदस्यों वाले ब्रास बैंड की बुकिंग की थी। बैंड संचालक के साथ कुल ₹9,000 में सौदा पक्का हुआ था, जिसके लिए परिवार ने ₹4,200 एडवांस के तौर पर भी दे दिए थे। लेकिन शादी वाले दिन जब बारात निकलने का समय आया, तो बैंड का कोई अता-पता नहीं था। परिवार ने जब फोन किया तो पहले कहा गया कि बैंड रास्ते में है, और फिर थोड़ी देर बाद मोबाइल फोन ही स्विच ऑफ कर दिया गया। मजबूरी में परिवार को आनन-फानन में ₹10,000 देकर दूसरा बैंड बुलाना पड़ा।
नोटिस मिलने के बाद भी कोर्ट नहीं पहुंचा आरोपी
शादी संपन्न होने के बाद पीड़ित परिवार ने कांगड़ा जिला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में सेवा में कमी (Deficiency of Service) की शिकायत दर्ज कराई। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और बैंड संचालक को नोटिस भेजा। हालांकि, आरोपी ने न तो कोर्ट में पेश होना जरूरी समझा और न ही अपनी तरफ से कोई जवाब दाखिल किया। बैंड संचालक के इस रवैए को देखते हुए आयोग ने मामले की एकतरफा (Ex-Parte) सुनवाई की और शिकायतकर्ता के दावों को सही पाया।
कंज्यूमर कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, देने होंगे ₹39,000
जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि एडवांस लेने के बाद ऐन मौके पर सेवा न देना न सिर्फ व्यापारिक कदाचार है, बल्कि शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर किसी परिवार को गहरा मानसिक तनाव देना है। कोर्ट ने बैंड संचालक के खिलाफ निम्नलिखित जुर्माना लगाया:
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₹14,000: एडवांस राशि और आपातकाल में दूसरे बैंड पर किए गए अतिरिक्त खर्च की वापसी।
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₹15,000: शादी के दिन हुई भारी मानसिक परेशानी, तनाव और असुविधा का मुआवजा।
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₹10,000: पीड़ित परिवार को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पर हुआ मुकदमे का खर्च।
इस तरह कुल मिलाकर बैंड संचालक को ₹39,000 का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस पूरी राशि पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से लेकर भुगतान के दिन तक 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी चुकाना होगा।